अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नूह (नूह अलैहिस्सलाम): अल्लाह के महान पैगंबर, जिन्हें उनकी क़ौम की ओर भेजा गया।
- आबिद होना (اعْبُدُوا): केवल अल्लाह की इबादत करना, उसकी आज्ञा का पालन करना और उसके सिवा किसी और की पूजा न करना।
- माबूद (إِلَٰه): वह जिसकी पूजा की जाए, पूजा के योग्य।
- तक़वा (تَتَّقُونَ): अल्लाह के अज़ाब से डरना, उसकी नाफ़रमानी से बचना और उसके हुक्मों पर अमल करना।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने अपने नबी नूह अलैहिस्सलाम को उनकी क़ौम की ओर भेजा, और यह पहला नबी है जो दुनिया में तौहीद (एकेश्वरवाद) की दावत लेकर आया। नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से कहा: "ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की इबादत करो, उसे अकेला मानो और उसके साथ किसी को शरीक न करो। तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं है। जो मूर्तियाँ और बुत तुम पूजते हो, वे न तो तुम्हें फायदा पहुँचा सकती हैं और न नुकसान। क्या तुम अल्लाह के अज़ाब से नहीं डरते? क्या तुम उसकी नाफ़रमानी से बचने का ख़याल नहीं करते?"
यह आयत हमें सिखाती है कि दावत का पहला पैगाम हमेशा तौहीद होता है। जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अल्लाह की इबादत की दावत दी, उसी तरह हर नबी का पैगाम यही रहा। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की इबादत ही इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) है, और उससे मुँह मोड़ना इंसान के लिए तबाही का सबब है।
आज भी हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में अल्लाह को अकेला मानें, उसी से मदद माँगें, उसी से डरें और उसी से उम्मीद रखें। जब हम अल्लाह की इबादत करते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है, हमारी मुश्किलें आसान होती हैं और हमें सच्ची कामयाबी मिलती है। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है, और यही वह रास्ता है जिसे हर नबी ने अपनी उम्मत को दिखाया।
📜 आयत 21-25 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 23
सूरा अल-मोमिनुन आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने नूह को उनकी काैम के पास पैग़म्बर बनाकर…सूरा आयत 23/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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