अल-मोमिनुन · 22/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَعَلَيْهَا وَعَلَى الْفُلْكِ تُحْمَلُونَ ۝٢٢
Wa `alaihaa wa`alal fulki tuhmaloon
📖 हिंदी अर्थ
और उन्हें जानवरों और कश्तियों पर चढे चढ़े फिरते भी हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَعَلَيْهَا: उस पर (अर्थात ऊँटों पर)
  • وَعَلَى الْفُلْكِ: और जहाज़ पर
  • تُحْمَلُونَ: तुम्हें ढोया जाता है / ले जाया जाता है

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी इस आयत में अपनी महान शक्ति और अपने बंदों पर अनगिनत एहसानों का ज़िक्र कर रहे हैं। उन्होंने इंसानों के लिए ज़मीन पर ऊँटों को सवारी बनाया और समुद्र में जहाज़ों को। यह अल्लाह की रहमत और कुदरत की निशानी है कि इंसान ज़मीन पर ऊँटों की पीठ पर सफर करता है और समुद्र में जहाज़ों के ज़रिए दूर-दराज़ के इलाकों तक पहुँचता है।

यहाँ अल्लाह तआला हमें याद दिलाते हैं कि जिस तरह तुम ऊँटों और जहाज़ों पर सवार होकर अपनी मंज़िल तक पहुँचते हो, उसी तरह तुम्हें एक दिन अपने रब के सामने पेश होना है। जिस अल्लाह ने तुम्हें ये सवारियाँ दीं, वही तुम्हें जीवन के सफर में ले जाने वाला है और आख़िरत में भी तुम्हारा हिसाब लेगा।

यह आयत हमें अल्लाह के उन एहसानों पर ग़ौर करने की तरग़ीब देती है जो हम अक्सर भूल जाते हैं। जब हम ऊँट पर सवार होते हैं या जहाज़ में सफर करते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह अल्लाह ही है जिसने इन्हें हमारे अधीन किया। अगर वह चाहे तो इन्हें हमारे काबू से बाहर कर दे, लेकिन अपनी रहमत से उसने इन्हें हमारे लिए आसान बना दिया।

इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि जिस तरह हम सफर के दौरान सवारियों पर भरोसा करते हैं, उसी तरह हमें अपनी ज़िंदगी के हर कदम पर अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। वही हमारा रक्षक और सहारा है। यह हमारे ईमान की तक़वियत का ज़रिया है कि हम अल्लाह की कुदरत के इन नज़ारों को देखकर उसकी तारीफ करें और उसके शुक्रगुज़ार बनें।

अल्लाह तआला ने इस आयत में ज़मीन और समुद्र दोनों के सफर का ज़िक्र किया है, ताकि इंसान हर हालत में अल्लाह की याद करे — चाहे वह ज़मीन पर हो या समुद्र में। यही वास्तविक ईमान है कि इंसान हर जगह और हर हालत में अल्लाह को याद रखे और उसकी नेअमतों का शुक्र अदा करे।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — अल-मोमिनुन

20وَشَجَرَةً تَخْرُجُ مِن طُورِ سَيْنَاءَ تَنبُتُ بِالدُّهْنِ وَصِبْغٍ لِّلْآكِلِينَ
और (हम ही ने ज़ैतून का) दरख्त (पैदा किया) जो तूरे सैना (पहाड़) में (कसरत से) पैदा होता है जिससे तेल भी निकलता है और खाने वालों के लिए सालन भी है
21وَإِنَّ لَكُمْ فِي الْأَنْعَامِ لَعِبْرَةً ۖ نُّسْقِيكُم مِّمَّا فِي بُطُونِهَا وَلَكُمْ فِيهَا مَنَافِعُ كَثِيرَةٌ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
और उसमें भी शक नहीं कि तुम्हारे वास्ते चौपायों में भी इबरत की जगह है और (ख़ाक बला) जो कुछ उनके पेट में है उससे हम तुमको दूध पिलाते हैं और जानवरों में तो तुम्हारे और भी बहुत से फायदे हैं और उन्हीं में से बाज़ तुम खाते हो
22وَعَلَيْهَا وَعَلَى الْفُلْكِ تُحْمَلُونَ
और उन्हें जानवरों और कश्तियों पर चढे चढ़े फिरते भी हो
23وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ أَفَلَا تَتَّقُونَ
और हमने नूह को उनकी काैम के पास पैग़म्बर बनाकर भेजा तो नूह ने (उनसे) कहा ऐ मेरी क़ौम खुदा ही की इबादत करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तो क्या तुम (उससे) डरते नहीं हो
24فَقَالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ كَفَرُوا مِن قَوْمِهِ مَا هَٰذَا إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُرِيدُ أَن يَتَفَضَّلَ عَلَيْكُمْ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَأَنزَلَ مَلَائِكَةً مَّا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي آبَائِنَا الْأَوَّلِينَ
तो उनकी क़ौम के सरदारों ने जो काफिर थे कहा कि ये भी तो बस (आख़िर) तुम्हारे ही सा आदमी है (मगर) इसकी तमन्ना ये है कि तुम पर बुर्जुगी हासिल करे और अगर खुदा (पैग़म्बर ही न भेजना) चाहता तो फरिश्तों को नाज़िल करता हम ने तो (भाई) ऐसी बात अपने अगले बाप दादाओं में (भी होती) नहीं सुनी
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 22

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Tuesday, August 18, 2026

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