अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْحَقُّ – यहाँ अल्लाह तआला का नाम है, जो सत्य है।
- أَهْوَاءَهُمْ – उनकी मनमानी इच्छाएँ और ख्वाहिशें।
- ذِكْرِهِمْ – उनकी इज़्ज़त और शान का ज़रिया (क़ुरआन)।
तफ़सीर:
अगर अल्लाह तआला अपने फ़ैसलों और क़ानूनों में उन लोगों की मनमानी इच्छाओं की पैरवी करता जो उसके साथ शरीक ठहराते हैं, तो आसमान और ज़मीन और उनमें रहने वाली सारी मख़लूक़ात का निज़ाम तबाह और बर्बाद हो जाता। क्योंकि इंसान की इच्छाएँ अक्सर जाहिलाना, नफ़्सानी और सीमित होती हैं, वह अंजाम को नहीं देख पाता और न ही उसे सही और ग़लत इंतिज़ाम का इल्म है। अल्लाह की हिकमत यही है कि उसने कायनात को अपनी रहमत, अदल और हिकमत के क़ानून पर चलाया है, न कि किसी की ख्वाहिश पर।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: हमने उन्हें ऐसी चीज़ दी जो उनकी इज़्ज़त, बुलंदी और भलाई की ज़ामिन है — वह है क़ुरआन, जो उन्हें सीधे रास्ते की तरफ़ बुलाता है और उनकी दुनिया और आख़िरत की भलाई का ज़रिया है। लेकिन अफ़सोस कि वे इसी चीज़ से मुँह मोड़ रहे हैं, उस पर ध्यान नहीं देते, न उस पर अमल करते हैं और न उसकी तालीमात को क़बूल करते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का दीन और उसका क़ुरआन ही हमारी असली इज़्ज़त और कामयाबी की कुंजी है। जो लोग अपनी ख्वाहिशों को दीन पर मुक़द्दम रखते हैं, वह न सिर्फ़ खुद को बल्कि पूरे समाज को तबाही की तरफ़ ले जाते हैं। अल्लाह ने हमें क़ुरआन जैसी नेमत दी है जो हर दौर और हर ज़रूरत का हल रखती है। हमें चाहिए कि इस किताब को अपनी ज़िंदगी में उतारें, इस पर ग़ौर करें और इसे अपना रहनुमा बनाएँ। यही हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसकी तालीमात को दूसरों तक पहुँचाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
📜 आयत 69-73 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 71
सूरा अल-मोमिनुन आयत 71 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर कहीं हक़ उनकी नफसियानी ख्वाहिश की पैरवी करता…सूरा आयत 71/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 69–73. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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