अन-नूर · 16/64
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नूर
وَلَوْلَا إِذْ سَمِعْتُمُوهُ قُلْتُم مَّا يَكُونُ لَنَا أَن نَّتَكَلَّمَ بِهَٰذَا سُبْحَانَكَ هَٰذَا بُهْتَانٌ عَظِيمٌ ۝١٦
Wa law laaa iz sami`tu moohu qultum maa yakoonu lanaaa an natakallama bihaazaa Subhaanaka haaza buhtaanun `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और जब तुमने ऐसी बात सुनी थी तो तुमने लोगों से क्यों न कह दिया कि हमको ऐसी बात मुँह से निकालनी मुनासिब नहीं सुबहान अल्लाह ये बड़ा भारी बोहतान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَلَوْلَا — क्यों नहीं / ऐसा क्यों नहीं हुआ
  • إِذْ سَمِعْتُمُوهُ — जब तुमने उसे (उस आरोप को) सुना
  • مَا يَكُونُ لَنَا — हमें शोभा नहीं देता / हमारे लिए उचित नहीं है
  • أَن نَّتَكَلَّمَ بِهَذَا — कि हम यह बात अपनी ज़ुबान पर लाएँ
  • سُبْحَانَكَ — (यहाँ) तेरी पाकी बयान करते हैं, यानी अल्लाह की पाकी और बरअत (बेगुनाही) का इज़हार
  • بُهْتَانٌ عَظِيمٌ — बहुत बड़ा झूठ, बहुत बड़ा कलंक और बहुत बड़ा आरोप

तफ़सीर:

जब मोमिनों ने नबी ﷺ की पाक बीवी हज़रत आइशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) के ख़िलाफ़ वह घिनौना आरोप (इफ़्क) लगाते हुए सुना, तो अल्लाह तआला ने उन्हें नसीहत दी कि तुम्हें उस वक़्त यह कहना चाहिए था: "हमें हरगिज़ जायज़ नहीं कि हम ऐसी बात अपनी ज़ुबान पर लाएँ।"

यानी जब तुमने यह झूठा और बेहूदा इल्ज़ाम सुना, तो तुम पर फ़र्ज़ था कि तुम फ़ौरन उसे रद्द कर देते और कहते: "ऐ अल्लाह! तू पाक है, तू बहुत बड़ा और पाक-पाक है।" यह कहकर तुम अल्लाह की पाकी का इज़हार करते कि अल्लाह अपने नबी ﷺ की बीवी को ऐसे कलंक से पाक रखता है।

और फिर यह कहते: "यह तो बहुत बड़ा बुहतान (झूठ और कलंक) है।" यानी यह आरोप इतना बड़ा झूठ है कि उसे सुनते ही दिल को यक़ीन हो जाता है कि यह सरासर झूठ है, क्योंकि नबी ﷺ की बीवी की पाकदामनी और नबी ﷺ की पाक ज़ात ऐसे इल्ज़ाम से बिल्कुल पाक हैं।

इस आयत में अल्लाह तआला मोमिनों को सिखा रहा है कि जब किसी मुसलमान के बारे में कोई बुरी बात सुनो, ख़ासकर अहले-बैत और नबी ﷺ के ख़ानदान के बारे में, तो तुम्हारा फ़र्ज़ है कि तुम उसे फ़ौरन रद्द करो, उस पर यक़ीन न करो, और अल्लाह की पाकी बयान करते हुए उसे झूठ और बुहतान क़रार दो।

यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी तालीम है कि हम किसी भी मुसलमान के बारे में बुरी बात सुनें, तो उसे फैलाने के बजाय उसे रद्द करें और अच्छा गुमान रखें। अल्लाह तआला हमें इस तालीम पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 14-18 — सूरा अन-नूर

14وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ لَمَسَّكُمْ فِي مَا أَفَضْتُمْ فِيهِ عَذَابٌ عَظِيمٌ
और अगर तुम लोगों पर दुनिया और आख़िरत में ख़ुदा का फज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो जिस बात का तुम लोगों ने चर्चा किया था उस की वजह से तुम पर कोई बड़ा (सख्त) अज़ाब आ पहुँचता
15إِذْ تَلَقَّوْنَهُ بِأَلْسِنَتِكُمْ وَتَقُولُونَ بِأَفْوَاهِكُم مَّا لَيْسَ لَكُم بِهِ عِلْمٌ وَتَحْسَبُونَهُ هَيِّنًا وَهُوَ عِندَ اللَّهِ عَظِيمٌ
कि तुम अपनी ज़बानों से इसको एक दूसरे से बयान करने लगे और अपने मुँह से ऐसी बात कहते थे जिसका तुम्हें इल्म व यक़ीन न था (और लुत्फ ये है कि) तुमने इसको एक आसान बात समझी थी हॉलाकि वह ख़ुदा के नज़दीक बड़ी सख्त बात थी
16وَلَوْلَا إِذْ سَمِعْتُمُوهُ قُلْتُم مَّا يَكُونُ لَنَا أَن نَّتَكَلَّمَ بِهَٰذَا سُبْحَانَكَ هَٰذَا بُهْتَانٌ عَظِيمٌ
और जब तुमने ऐसी बात सुनी थी तो तुमने लोगों से क्यों न कह दिया कि हमको ऐसी बात मुँह से निकालनी मुनासिब नहीं सुबहान अल्लाह ये बड़ा भारी बोहतान है
17يَعِظُكُمُ اللَّهُ أَن تَعُودُوا لِمِثْلِهِ أَبَدًا إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
ख़ुदा तुम्हारी नसीहत करता है कि अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़बरदार फिर कभी ऐसा न करना
18وَيُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और ख़ुदा तुम से (अपने) एहकाम साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम है
अन-नूरकुरान सूची
64आयत
मदनीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — अन-नूर 16

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Friday, October 2, 2026

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