अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَلَوْلَا — क्यों नहीं / ऐसा क्यों नहीं हुआ
- إِذْ سَمِعْتُمُوهُ — जब तुमने उसे (उस आरोप को) सुना
- مَا يَكُونُ لَنَا — हमें शोभा नहीं देता / हमारे लिए उचित नहीं है
- أَن نَّتَكَلَّمَ بِهَذَا — कि हम यह बात अपनी ज़ुबान पर लाएँ
- سُبْحَانَكَ — (यहाँ) तेरी पाकी बयान करते हैं, यानी अल्लाह की पाकी और बरअत (बेगुनाही) का इज़हार
- بُهْتَانٌ عَظِيمٌ — बहुत बड़ा झूठ, बहुत बड़ा कलंक और बहुत बड़ा आरोप
तफ़सीर:
जब मोमिनों ने नबी ﷺ की पाक बीवी हज़रत आइशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) के ख़िलाफ़ वह घिनौना आरोप (इफ़्क) लगाते हुए सुना, तो अल्लाह तआला ने उन्हें नसीहत दी कि तुम्हें उस वक़्त यह कहना चाहिए था: "हमें हरगिज़ जायज़ नहीं कि हम ऐसी बात अपनी ज़ुबान पर लाएँ।"
यानी जब तुमने यह झूठा और बेहूदा इल्ज़ाम सुना, तो तुम पर फ़र्ज़ था कि तुम फ़ौरन उसे रद्द कर देते और कहते: "ऐ अल्लाह! तू पाक है, तू बहुत बड़ा और पाक-पाक है।" यह कहकर तुम अल्लाह की पाकी का इज़हार करते कि अल्लाह अपने नबी ﷺ की बीवी को ऐसे कलंक से पाक रखता है।
और फिर यह कहते: "यह तो बहुत बड़ा बुहतान (झूठ और कलंक) है।" यानी यह आरोप इतना बड़ा झूठ है कि उसे सुनते ही दिल को यक़ीन हो जाता है कि यह सरासर झूठ है, क्योंकि नबी ﷺ की बीवी की पाकदामनी और नबी ﷺ की पाक ज़ात ऐसे इल्ज़ाम से बिल्कुल पाक हैं।
इस आयत में अल्लाह तआला मोमिनों को सिखा रहा है कि जब किसी मुसलमान के बारे में कोई बुरी बात सुनो, ख़ासकर अहले-बैत और नबी ﷺ के ख़ानदान के बारे में, तो तुम्हारा फ़र्ज़ है कि तुम उसे फ़ौरन रद्द करो, उस पर यक़ीन न करो, और अल्लाह की पाकी बयान करते हुए उसे झूठ और बुहतान क़रार दो।
यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी तालीम है कि हम किसी भी मुसलमान के बारे में बुरी बात सुनें, तो उसे फैलाने के बजाय उसे रद्द करें और अच्छा गुमान रखें। अल्लाह तआला हमें इस तालीम पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 14-18 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 16
सूरा अन-नूर आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब तुमने ऐसी बात सुनी थी तो तुमने लोगों…सूरा आयत 16/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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