अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَاءَتْ: बहुत बुरी है, अत्यंत खराब है।
- مُسْتَقَرًّا: ठहरने की जगह, रहने का स्थान।
- مُقَامًا: क़ियाम की जगह, हमेशा रहने का स्थान।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मोमिनों के क़ौल (कथन) का हिस्सा है जो अल्लाह से दुआ करते हैं कि उन्हें जहन्नम के अज़ाब से बचा ले। वे कहते हैं: "ऐ हमारे रब! हमें जहन्नम के अज़ाब से दूर रख, क्योंकि उसका अज़ाब ऐसा है जो लाज़िमी तौर पर अपने साथी को नहीं छोड़ता।" फिर वे कहते हैं: "बेशक जहन्नम ठहरने और रहने के लिहाज़ से बहुत ही बुरी जगह है।"
यानी जहन्नम न सिर्फ़ उस वक़्त बुरी है जब इंसान उसमें दाख़िल होता है, बल्कि वह हमेशा के लिए ठहरने की जगह भी बदतरीन है। जो लोग उसमें डाले जाएंगे, उनके लिए न वहाँ आराम है, न सुकून, न कोई उम्मीद। वहाँ का ठिकाना भी बुरा और क़ियाम (हमेशा रहना) भी बुरा।
यह आयत हमें सिखाती है कि मोमिन हमेशा अल्लाह से डरता है और उससे पनाह माँगता है। वह अपनी इबादत पर इतराता नहीं, बल्कि उसे कम समझता है और अल्लाह की रहमत का मोहताज रहता है। यही हाल मोमिन का होना चाहिए — दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ और जहन्नम का डर, जो उसे नेकी पर मजबूर करे और गुनाह से रोके।
याद रखिए, जहन्नम की आग ऐसी है जो दिलों तक पहुँचती है और उसका अज़ाब हमेशा रहने वाला है। इसलिए अक्लमंद वही है जो इस दुनिया में अपने रब की इबादत करे, उसके हुक्मों पर चले और उससे जहन्नम की आग से बचाने की दुआ करे। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — वह चाहता है कि हम उससे माँगें, तौबा करें और उसकी रहमत की तरफ लौटें। जो लोग उसकी तरफ लौटते हैं, उनके लिए जन्नत की नेमतें हैं, जहाँ न कोई दर्द है, न कोई ग़म — सिर्फ़ सुकून और खुशी।
📜 आयत 64-68 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 66
सूरा अल-फुरकान आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक वह बहुत बुरा ठिकाना और बुरा मक़ाम हैसूरा आयत 66/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 64–68. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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