अश-शुआरा · 159/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝١٥٩
Wa inna Rabbaka la Huwal `Azeezur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब और मेहरबान है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • العَزِيزُ: वह शक्तिशाली जो सब पर ग़ालिब हो, अपने दुश्मनों से बदला लेने वाला और जिसे कोई हरा न सके।
  • الرَّحِيمُ: अत्यंत दयालु, जो अपने बंदों पर रहम करता है, ख़ासकर उन पर जो तौबा करके उसकी ओर लौटते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका रब — जो आपको संदेश देने के लिए भेजा गया है — वही सच्चा और महान है। वह अज़ीज़ है, यानी सर्वशक्तिमान और अजेय, जो अपने दुश्मनों को उनके कुकर्मों की सज़ा देने पर पूरी ताक़त रखता है। जिन लोगों ने उसके रसूलों को झुठलाया और उसकी आयतों को नकारा, वे उसके क़हर (प्रकोप) से बच नहीं सकते। उसकी पकड़ से कोई भाग नहीं सकता, और वह हर उस व्यक्ति से बदला लेने पर क़ादिर है जो उसके हुक्म की उल्लंघना करता है।

साथ ही, वह रहीम (अत्यंत दयालु) है — उसकी रहमत उसके ग़ुस्से से कहीं बढ़कर है। वह उन बंदों पर दया करता है जो अपने गुनाहों से तौबा करके उसकी ओर लौटते हैं, उसके हुक्मों को मानते हैं और उसकी राह में चलते हैं। उसकी रहमत का दामन बहुत विस्तृत है — वह गुनाहगारों को माफ़ करता है, कमज़ोरों को ताक़त देता है, और अपने इबादत करने वालों को अपनी मेहरबानी से नवाज़ता है।

यह आयत हमें दो बातें सिखाती है: एक तरफ़ अल्लाह का इंतक़ाम (बदला) उनके लिए है जो हक़ को झुठलाते हैं और ज़ुल्म पर अड़े रहते हैं — यह उनके लिए चेतावनी है। दूसरी तरफ़ उसकी रहमत उनके लिए है जो सच्चे दिल से उसकी ओर रुजू करते हैं — यह मोमिनों के लिए खुशख़बरी है।

तो ऐ इंसान! तू किसी भी हालत में हो, अल्लाह की रहमत से निराश न हो। उसका दरवाज़ा हमेशा खुला है — बस एक क़दम उसकी ओर बढ़ा, वह दौड़कर तुझसे मिलने आएगा। और याद रख, उसकी ताक़त के आगे कोई ताक़त नहीं टिक सकती, इसलिए उसकी नाफ़रमानी से डर, और उसकी रहमत की उम्मीद रख — यही सच्चे मोमिन की पहचान है।



📜 आयत 157-161 — सूरा अश-शुआरा

157فَعَقَرُوهَا فَأَصْبَحُوا نَادِمِينَ
इस पर भी उन लोगों ने उसके पाँव काट डाले और (उसको मार डाला) फिर ख़़ुद पशेमान हुए
158فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
फिर उन्हें अज़ाब ने ले डाला-बेशक इसमें यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और इनमें के बहुतेरे ईमान लाने वाले भी न थे
159وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब और मेहरबान है
160كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ الْمُرْسَلِينَ
इसी तरह लूत की क़ौम ने पैग़म्बरों को झुठलाया
161إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ
जब उनके भाई लूत ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
159आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 159

सूरा अश-शुआरा आयत 159 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसमें शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर)…

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Monday, September 28, 2026

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