अश-शुआरा · 158/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ۝١٥٨
Fa akhazahumul `azaab; inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum m`mineen
📖 हिंदी अर्थ
फिर उन्हें अज़ाब ने ले डाला-बेशक इसमें यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और इनमें के बहुतेरे ईमान लाने वाले भी न थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ: उन्हें उस यातना ने आ पकड़ा।
  • لَآيَةً: निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी (सबक) है।
  • مُؤْمِنِينَ: ईमान लाने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

जब हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम (समूद) ने हठ और ज़िद पर अड़े रहकर सच्चाई को ठुकराया और अपने नबी का मज़ाक उड़ाया, तो अल्लाह का वह अज़ाब जिसका उन्हें डराया गया था, अचानक उन पर आ पड़ा। यह अज़ाब एक भयानक भूकंप (ज़लज़ला) और दहलाने वाली चीख़ (सैहा) की शक्ल में आया, जिसने उन्हें इस तरह तबाह कर दिया कि वे अपने घरों में गिरे पड़े रह गए। यह उनके कुफ़्र और नबी की नाफ़रमानी का सीधा नतीजा था।

इस वाक़िया में उन सब लोगों के लिए एक बहुत बड़ी निशानी और सबक है जो आँखों से देखते हैं और दिल से सोचते हैं। यह घटना सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि एक जीती-जागती शिक्षा है कि जो लोग अल्लाह के रसूलों को झुठलाते हैं और हक़ के सामने घमंड करते हैं, उनका अंजाम क्या होता है। अफ़सोस की बात यह है कि उनमें से अधिकतर लोग ईमान नहीं लाए, वरना वे इस तबाही से बच सकते थे।

यहाँ से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह अपने बंदों पर रहम करने वाला भी है। जो लोग नबी की दावत पर ईमान ले आते हैं, वे अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त में रहते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम क़ुरआन की इन आयतों पर ग़ौर करें और अपने जीवन को नबी की शिक्षाओं के अनुसार ढालें, ताकि हम उस अज़ाब से महफ़ूज़ रहें जो नाफ़रमानों के लिए है। यही सच्ची कामयाबी है कि इंसान दुनिया में अल्लाह की इबादत करे और उसके रसूल की पैरवी करे, क्योंकि आख़िरत की सफलता इसी में है।



📜 आयत 156-160 — सूरा अश-शुआरा

156وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَظِيمٍ
और इसको कोई तकलीफ़ न पहुँचाना वरना एक बड़े (सख्त) ज़ोर का अज़ाब तुम्हे ले डालेगा
157فَعَقَرُوهَا فَأَصْبَحُوا نَادِمِينَ
इस पर भी उन लोगों ने उसके पाँव काट डाले और (उसको मार डाला) फिर ख़़ुद पशेमान हुए
158فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
फिर उन्हें अज़ाब ने ले डाला-बेशक इसमें यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और इनमें के बहुतेरे ईमान लाने वाले भी न थे
159وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब और मेहरबान है
160كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ الْمُرْسَلِينَ
इसी तरह लूत की क़ौम ने पैग़म्बरों को झुठलाया
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
158आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 158

सूरा अश-शुआरा आयत 158 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर उन्हें अज़ाब ने ले डाला-बेशक इसमें यक़ीनन एक बड़ी…

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Sunday, October 4, 2026

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