Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَشَرٌ مِّثْلُنَا: हमारे जैसा इंसान
- نَظُنُّكَ: हम तुम्हें समझते हैं / हमारा ख़याल है
- لَمِنَ الْكَاذِبِينَ: झूठों में से
तफ़सीर:
जब नबी शुऐब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को तौहीद का पैग़ाम दिया और उन्हें नाप-तौल में कमी करने, लोगों को उनका हक़ कम देने और ज़मीन में फ़साद फैलाने से रोका, तो उनकी क़ौम ने जवाब में कहा: "तुम तो हमारे जैसे ही एक इंसान हो।" उनका कहना था कि तुम कोई फ़रिश्ता नहीं हो, ना तुम खाना-पीना छोड़ सकते हो, ना तुम्हारे पास कोई ऐसी चीज़ है जो तुम्हें हमसे अलग करे। उन्होंने ये कहकर नबुव्वत का मुक़ाबला किया कि एक इंसान दूसरे इंसान पर रसूल होकर कैसे भेजा जा सकता है? और फिर उन्होंने कहा: "हमें तो पूरा यक़ीन है कि तुम झूठों में से हो।" यानी उन्होंने न सिर्फ़ आपकी नबुव्वत को झुठलाया बल्कि आपको झूठा कहने की जुर्रत भी की।
ये अल्लाह के रसूलों के साथ उनकी क़ौमों का हमेशा से रवैया रहा है। जब कोई नबी अपनी क़ौम के पास आता, तो वे कहते: "तुम हमारे जैसे इंसान हो, तुम पर रिसालत कैसे आ गई?" वे ये भूल जाते थे कि अल्लाह ने हमेशा इंसानों में से ही रसूल चुने हैं, क्योंकि इंसान ही इंसानों की हालत को समझ सकता है और उनके सामने अल्लाह का पैग़ाम पेश कर सकता है। अल्लाह तआला ने फ़रिश्तों को नहीं भेजा, बल्कि इंसानों में से ही पैग़म्बर चुने ताकि लोग उनसे सीख सकें, उनकी ज़िंदगी को देख सकें और उनके अख़लाक़ से फ़ायदा उठा सकें।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि नबियों के साथ उनकी क़ौमों का ये रवैया सिर्फ़ शुऐब (अलैहिस्सलाम) के साथ नहीं था, बल्कि हर नबी के साथ यही हुआ। लेकिन नबियों ने हिम्मत नहीं हारी, उन्होंने अल्लाह पर भरोसा किया और अपना पैग़ाम पहुँचाते रहे। ये हमारे लिए सबक़ है कि सच्चाई पर क़ायम रहें, चाहे लोग हमें झुठलाएँ या हमारा मज़ाक़ उड़ाएँ। अल्लाह की मदद सच्चे लोगों के साथ होती है, और आख़िरकार सच्चाई ही जीतती है। जैसे शुऐब (अलैहिस्सलाम) की क़ौम को अल्लाह के अज़ाब ने आ पकड़ा, वैसे ही हर झुठलाने वाली क़ौम का अंजाम बुरा होता है।
📜 आयत 184-188 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 186
सूरा अश-शुआरा आयत 186 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम तो हमारे ही ऐसे एक आदमी हो और…सूरा आयत 186/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 184–188. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


