अश-शुआरा · 56/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَإِنَّا لَجَمِيعٌ حَاذِرُونَ ۝٥٦
Wa innaa lajamee`un haaziroon
📖 हिंदी अर्थ
और हम सबके सब बा साज़ों सामान हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَاذِرُونَ (हाज़िरून): सावधान रहने वाले, सतर्क, चौकन्ना, और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

फ़िरऔन (फ़िरऔन) ने अपने दरबारियों और सैन्य अधिकारियों से कहा कि मूसा (अलैहिस्सलाम) के साथ जो बनी इसराइल निकल गए हैं, वे एक छोटी और कमज़ोर जमात है, लेकिन उन्होंने हमारे दीन को छोड़कर हमारी अवज्ञा की और बिना हमारी इजाज़त के निकल गए। वे हमारे लिए ग़ैज़ (क्रोध) और नफ़रत का कारण बने हुए हैं। फिर उसने अपनी ताक़त और तैयारी का दावा करते हुए कहा: "और हम सब के सब सावधान, सतर्क और हर हाल में मुक़ाबले के लिए तैयार हैं।" यानी हम उनका पीछा करेंगे और उन्हें सबक़ सिखाएँगे, क्योंकि हमारे पास पूरी ताक़त, हथियार और फ़ौज है।

यह फ़िरऔन की झूठी शेख़ी और ग़ुरूर था, क्योंकि उसे यक़ीन था कि वह अपनी फ़ौजी ताक़त से मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों को हरा देगा। लेकिन अल्लाह तआला की क़ुदरत के आगे उसकी सारी तैयारियाँ और फ़ौजें बेकार साबित हुईं। यह हमारे लिए एक बड़ा सबक़ है कि इंसान चाहे कितनी ही ताक़त और साज़ो-सामान इकट्ठा कर ले, अल्लाह की मर्ज़ी के बिना वह कुछ नहीं कर सकता। अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है, और जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उन्हें कभी निराश नहीं होना चाहिए।

यहाँ से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चाई और ईमान की राह पर चलने वालों को दुनियावी ताक़तों से डरना नहीं चाहिए। फ़िरऔन जैसे ज़ालिम हुक्मरान चाहे कितनी भी बड़ी फ़ौज और तैयारी रखें, अल्लाह की मदद उन लोगों के साथ होती है जो उसकी राह में सब्र और यक़ीन के साथ डटे रहते हैं। जैसे अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों को फ़िरऔन के ज़ुल्म से निजात दिलाई और उसे समुंद्र में ग़रक़ कर दिया, वैसे ही अल्लाह हर ज़माने में अपने नेक बंदों की मदद करता है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी राह पर चलते रहना चाहिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।

🎧 सुनें

📜 आयत 54-58 — अश-शुआरा

54إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَشِرْذِمَةٌ قَلِيلُونَ
(और कहा) कि ये लोग मूसा के साथ बनी इसराइल थोड़ी सी (मुट्ठी भर की) जमाअत हैं
55وَإِنَّهُمْ لَنَا لَغَائِظُونَ
और उन लोगों ने हमें सख्त गुस्सा दिलाया है
56وَإِنَّا لَجَمِيعٌ حَاذِرُونَ
और हम सबके सब बा साज़ों सामान हैं
57فَأَخْرَجْنَاهُم مِّن جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
(तुम भी आ जाओ कि सब मिलकर ताअककुब (पीछा) करें)
58وَكُنُوزٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ
ग़रज़ हमने इन लोगों को (मिस्र के) बाग़ों और चश्मों और खज़ानों और इज्ज़त की जगह से (यूँ) निकाल बाहर किया
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अनुवाद — अश-शुआरा 56

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Tuesday, August 18, 2026

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