अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- जन्नात (جَنَّات): बाग़, बगीचे, हरे-भरे उद्यान।
- उयून (عُيُون): चश्मे, बहते हुए पानी के स्रोत।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम को उनकी सारी आराम-आराइश, हरियाली और खुशहाली से निकालकर बाहर कर दिया। वे मिस्र की उन बाग़ों और चश्मों से महरूम कर दिए गए, जहाँ वे अपनी ज़िंदगी के दिनों में चैन और सुकून से रहते थे। यह वही लोग थे जिन्होंने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की दावत को ठुकराया और अल्लाह के दीन का मुक़ाबला किया। जब उन्होंने हक़ के आगे सर न झुकाया, तो अल्लाह ने उन्हें उनकी नेअमतों से निकालकर उनके हाल पर छोड़ दिया — और यही अल्लाह की सुन्नत है कि जब कोई क़ौम उसकी नाफ़रमानी पर अड़ जाती है, तो वह उससे उसकी नेअमतें छीन लेता है।
यहाँ अल्लाह तआला हमें सबक़ दे रहा है कि दुनिया की चमक-दमक और माल-दौलत कोई बड़ी चीज़ नहीं। फ़िरऔन के पास बाग़ थे, चश्मे थे, ख़ज़ाने थे, महल थे — लेकिन जब अल्लाह का फ़ैसला आया, तो उनमें से कोई चीज़ उसे बचा न सकी। यही हाल उन लोगों का होता है जो अल्लाह के हुक्म से ग़ाफ़िल होकर सिर्फ़ दुनिया की ख़्वाहिशों में डूबे रहते हैं। मोमिन के लिए यह नसीहत है कि वह दुनिया को अपना असली मक़सद न बनाए, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसकी राह में सब्र और शुक्र को अपना ज़रिया बनाए। जो लोग अल्लाह की राह में क़ुर्बानी देते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया में भी भलाई देता है और आख़िरत में भी — जैसे बनी इसराईल को फ़िरऔन की ज़मीन का वारिस बनाया गया।
यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह की मदद हक़ पर क़ायम रहने वालों के साथ होती है। फ़िरऔन की सारी ताक़त और शान-ओ-शौकत के बावजूद अल्लाह ने उसे ज़लील किया और उसकी सारी नेअमतें उससे छीन लीं। यह उन लोगों के लिए बशारत है जो अल्लाह के दीन पर साबित-क़दम रहते हैं — उनका अंजाम हमेशा बेहतर होता है, चाहे दुनिया में देर से ही सही।
📜 आयत 55-59 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 57
सूरा अश-शुआरा आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तुम भी आ जाओ कि सब मिलकर ताअककुब (पीछा) करें)सूरा आयत 57/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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