अश-शुआरा · 6/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
فَقَدْ كَذَّبُوا فَسَيَأْتِيهِمْ أَنبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ ۝٦
Faqad kazzaboo fasa yaateehim ambaaa`u maa kaanoo bihee yastahzi`oon
📖 हिंदी अर्थ
उन लोगों ने झुठलाया ज़रुर तो अनक़रीब ही (उन्हें) इस (अज़ाब) की हक़ीकत मालूम हो जाएगी जिसकी ये लोग हँसी उड़ाया करते थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَّبُوا: उन्होंने झुठलाया (अर्थात नबी ﷺ और क़ुरआन को झुठलाया)
  • أَنبَاء: समाचार, ख़बरें (यहाँ अर्थ है उस अज़ाब और अंजाम की ख़बरें)
  • يَسْتَهْزِئُونَ: वे मज़ाक उड़ाते हैं, उपहास करते हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन काफ़िरों की हालत बयान कर रहा है जिन्होंने क़ुरआन और रसूलुल्लाह ﷺ को झुठलाया और उस पर हँसी-मज़ाक किया। अल्लाह फ़रमाता है कि जब उनके पास सच्चाई आई तो उन्होंने उसे नकार दिया और उसका उपहास किया। लेकिन यह मत सोचो कि यह मज़ाक उनके लिए बेअंजाम रहेगा। अल्लाह ने वादा किया है कि उनके पास वह सब कुछ आकर रहेगा जिसका वे मज़ाक उड़ा रहे हैं — यानी अज़ाब और अंजाम की ख़बरें।

यह आयत एक गंभीर चेतावनी है कि जो लोग अल्लाह की आयतों का मज़ाक उड़ाते हैं, उनके पास वह चीज़ ज़रूर आएगी जिसका वे उपहास कर रहे हैं। यह अल्लाह का अटल नियम है — सत्य का उपहास करने वालों को उस सत्य की सच्चाई का सामना करना ही पड़ता है, चाहे वह दुनिया में हो या आख़िरत में।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन और इस्लाह के मामले में कभी उपहास और मज़ाक नहीं करना चाहिए। यह एक गंभीर पाप है जो इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन की आयतों पर गहराई से विचार करें, उन्हें समझें और उन पर अमल करें। क़ुरआन एक ऐसी किताब है जो इंसान को ज़िंदगी का सही रास्ता दिखाती है, और जो लोग इसे अपनाते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है। आइए हम उन लोगों में से न बनें जो सच्चाई को ठुकराते हैं, बल्कि उन लोगों में से बनें जो सच्चाई को क़बूल करते हैं और उस पर चलते हैं।



📜 आयत 4-8 — सूरा अश-शुआरा

4إِن نَّشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ آيَةً فَظَلَّتْ أَعْنَاقُهُمْ لَهَا خَاضِعِينَ
अगर हम चाहें तो उन लोगों पर आसमान से कोई ऐसा मौजिज़ा नाज़िल करें कि उन लोगों की गर्दनें उसके सामने झुक जाएँ
5وَمَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ مُحْدَثٍ إِلَّا كَانُوا عَنْهُ مُعْرِضِينَ
और (लोगों का क़ायदा है कि) जब उनके पास कोई कोई नसीहत की बात ख़ुदा की तरफ से आयी तो ये लोग उससे मुँह फेरे बगैर नहीं रहे
6فَقَدْ كَذَّبُوا فَسَيَأْتِيهِمْ أَنبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
उन लोगों ने झुठलाया ज़रुर तो अनक़रीब ही (उन्हें) इस (अज़ाब) की हक़ीकत मालूम हो जाएगी जिसकी ये लोग हँसी उड़ाया करते थे
7أَوَلَمْ يَرَوْا إِلَى الْأَرْضِ كَمْ أَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ
क्या इन लोगों ने ज़मीन की तरफ भी (ग़ौर से) नहीं देखा कि हमने हर रंग की उम्दा उम्दा चीजें उसमें किस कसरत से उगायी हैं
8إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
यक़ीनन इसमें (भी क़ुदरत) ख़ुदा की एक बड़ी निशानी है मगर उनमें से अक्सर ईमान लाने वाले ही नहीं
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 6

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Friday, October 2, 2026

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