अश-शुआरा · 62/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالَ كَلَّا ۖ إِنَّ مَعِيَ رَبِّي سَيَهْدِينِ ۝٦٢
Qaala kallaaa inna ma`iya Rabbee sa yahdeen
📖 हिंदी अर्थ
कि अब तो पकड़े गए मूसा ने कहा हरगिज़ नहीं क्योंकि मेरे साथ मेरा परवरदिगार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • कल्ला (كَلَّا): हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं होगा। यह शब्द यहाँ निषेध और तसल्ली के अर्थ में है।
  • इन्ना म'इया रब्बी (إِنَّ مَعِيَ رَبِّي): बेशक मेरा रब मेरे साथ है — उसकी मदद, हिफ़ाज़त और नुसरत मेरे साथ है।
  • सयहदीन (سَيَهْدِينِ): वह मुझे रास्ता दिखाएगा — यानी नजात का रास्ता, छुटकारे का रास्ता।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनकी क़ौम बनी इसराइल समुद्र के किनारे पहुँचे और पीछे फ़िरऔन की फ़ौजें उनका पीछा करती हुई नज़र आईं, तो बनी इसराइल के लोग घबरा गए और बोले: "हम तो पकड़ लिए गए!" उस वक़्त हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने पूरे यक़ीन और इत्मिनान के साथ फ़रमाया:

"कल्ला!" — हरगिज़ नहीं! ऐसा हरगिज़ नहीं होगा जैसा तुम सोच रहे हो। यह शब्द उन्होंने इसलिए कहा ताकि अपनी क़ौम के दिलों से ख़ौफ़ और घबराहट को निकाल दें और उन्हें यक़ीन दिलाएँ कि अल्लाह का वादा सच्चा है।

"इन्ना म'इया रब्बी" — बेशक मेरा रब मेरे साथ है। यह सिर्फ़ एक जुमला नहीं था, बल्कि यह ईमान की गहराई और यक़ीन की बुलंदी थी। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) जानते थे कि अल्लाह ने उनसे वादा किया है कि वह उन्हें नजात देंगे, और अल्लाह का वादा कभी ख़िलाफ़ नहीं होता। उन्होंने अपनी निगाहें इंसानी ताक़तों पर नहीं, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत पर टिकाईं।

"सयहदीन" — वह मुझे रास्ता दिखाएगा। यानी अल्लाह मुझे वह रास्ता दिखाएगा जिससे हम बच निकलेंगे। और हुआ भी ऐसा ही — अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को वह़ी की कि अपनी लाठी समुद्र पर मारो, तो समुद्र फट गया और रास्ता बन गया, और बनी इसराइल सलामती से पार निकल गए।


दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

यह आयत हमें सिखाती है कि जब इंसान अल्लाह पर पूरा भरोसा कर लेता है, तो अल्लाह उसे हर मुश्किल से निकालने का रास्ता ज़रूर दिखाता है। ज़िंदगी में कभी-कभी हालात ऐसे हो जाते हैं कि इंसान समझता है कि अब कोई रास्ता नहीं, लेकिन अल्लाह का वादा है: "जो अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसके लिए रास्ता निकालता है और उसे ऐसी जगह से रिज़्क़ देता है जिसका उसे ख़याल भी नहीं होता।"

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का यह क़ौल हर मुसलमान के लिए सबक़ है कि मुश्किल वक़्त में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। अल्लाह हमेशा अपने बंदों के साथ होता है जो उस पर भरोसा करते हैं। यही ईमान की ताक़त है — कि इंसान के दिल में यह यक़ीन हो कि अल्लाह की मदद क़रीब है, चाहे हालात कितने भी ख़राब क्यों न हों।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि जब हम अल्लाह के रास्ते पर चलते हैं, तो अल्लाह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह हमेशा हमारे साथ होता है, हमारी मदद करता है और हमें सही रास्ता दिखाता है। इसलिए हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसी से मदद माँगें।



📜 आयत 60-64 — अश-शुआरा

60فَأَتْبَعُوهُم مُّشْرِقِينَ
ग़रज़ (मूसा) तो रात ही को चले गए
61فَلَمَّا تَرَاءَى الْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَابُ مُوسَىٰ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ
और उन लोगों ने सूरज निकलते उनका पीछा किया तो जब दोनों जमाअतें (इतनी करीब हुयीं कि) एक दूसरे को देखने लगी तो मूसा के साथी (हैरान होकर) कहने लगे
62قَالَ كَلَّا ۖ إِنَّ مَعِيَ رَبِّي سَيَهْدِينِ
कि अब तो पकड़े गए मूसा ने कहा हरगिज़ नहीं क्योंकि मेरे साथ मेरा परवरदिगार है
63فَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اضْرِب بِّعَصَاكَ الْبَحْرَ ۖ فَانفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظِيمِ
वह फौरन मुझे कोई (मुखलिसी का) रास्ता बता देगा तो हमने मूसा के पास वही भेजी कि अपनी छड़ी दरिया पर मारो (मारना था कि) फौरन दरिया फुट के टुकड़े टुकड़े हो गया तो गोया हर टुकड़ा एक बड़ा ऊँचा पहाड़ था
64وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ الْآخَرِينَ
और हमने उसी जगह दूसरे फरीक (फिरऔन के साथी) को क़रीब कर दिया
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अनुवाद — अश-शुआरा 62

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Tuesday, August 18, 2026

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