अश-शुआरा · 61/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
فَلَمَّا تَرَاءَى الْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَابُ مُوسَىٰ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ ۝٦١
Falammaa taraaa`al jam`aani qaala as haabu Moosaaa innaa lamudrakoon
📖 हिंदी अर्थ
और उन लोगों ने सूरज निकलते उनका पीछा किया तो जब दोनों जमाअतें (इतनी करीब हुयीं कि) एक दूसरे को देखने लगी तो मूसा के साथी (हैरान होकर) कहने लगे

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अनुवाद — Tafsir

फिर जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया, तो मूसा (अलैहिस्सलाम) के साथी कहने लगे: "हम तो पकड़ लिए जाएँगे।"

शब्दों के अर्थ:

  • تَرَاءَى: एक-दूसरे को देखना, आमने-सामने होना।
  • الْجَمْعَانِ: दो गिरोह — मूसा (अलैहिस्सलाम) के अनुयायी और फ़िरऔन की सेना।
  • لَمُدْرَكُونَ: पकड़े जाने वाले, जिन्हें दुश्मन अपनी पकड़ में ले लेगा।

व्याख्या:

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) अपने साथियों के साथ समुद्र के किनारे पहुँचे और पीछे से फ़िरऔन की विशाल सेना आती दिखी, तो दोनों गिरोह एक-दूसरे की नज़रों के सामने आ गए। यह वह क्षण था जब मूसा के साथी, जो पहले से ही भय और चिंता में थे, घबरा उठे। उन्होंने कहा: "हम तो अवश्य ही पकड़ लिए जाएँगे!" उनके सामने आगे समुद्र की लहरें थीं और पीछे फ़िरऔन की भारी सेना — दोनों ओर से घिर जाने का ख़तरा था। उन्हें लगा कि अब कोई रास्ता नहीं बचा और वे फ़िरऔन के हाथों से बच नहीं सकते।

यह दृश्य हमें सिखाता है कि इंसान जब मुसीबत में घिर जाता है और हर तरफ़ से रास्ते बंद दिखते हैं, तो वह निराश हो जाता है। लेकिन अल्लाह की मदद उस वक़्त आती है जब इंसान की समझ और तदबीर नाकाम हो जाती है। मूसा (अलैहिस्सलाम) के साथियों की यह घबराहट स्वाभाविक थी, क्योंकि उन्होंने अपनी आँखों से फ़िरऔन की ताक़त देखी थी। मगर अल्लाह ने इसी मुश्किल घड़ी में अपनी क़ुदरत का ऐसा नमूना दिखाया कि समुद्र चीरकर रास्ता बन गया और फ़िरऔन की सेना पानी में डूब गई।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि मुसीबत के वक़्त अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब बंदा अल्लाह पर पूरा भरोसा करता है, तो अल्लाह उसे ऐसे रास्ते से निकालता है जिसका उसे ख़याल भी नहीं होता। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उस वक़्त अपने साथियों को दिलासा दिया और कहा कि अल्लाह मेरे साथ है, वह ज़रूर रास्ता दिखाएगा। यही भरोसा हर मोमिन के लिए रोशनी है — चाहे मुसीबत कितनी ही बड़ी क्यों न हो, अल्लाह की मदद उसके इम्तिहान के बाद ज़रूर आती है।



📜 आयत 59-63 — सूरा अश-शुआरा

59كَذَٰلِكَ وَأَوْرَثْنَاهَا بَنِي إِسْرَائِيلَ
(और जो नाफरमानी करे) इसी तरह सज़ा होगी और आख़िर हमने उन्हीं चीज़ों का मालिक बनी इसराइल को बनाया
60فَأَتْبَعُوهُم مُّشْرِقِينَ
ग़रज़ (मूसा) तो रात ही को चले गए
61فَلَمَّا تَرَاءَى الْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَابُ مُوسَىٰ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ
और उन लोगों ने सूरज निकलते उनका पीछा किया तो जब दोनों जमाअतें (इतनी करीब हुयीं कि) एक दूसरे को देखने लगी तो मूसा के साथी (हैरान होकर) कहने लगे
62قَالَ كَلَّا ۖ إِنَّ مَعِيَ رَبِّي سَيَهْدِينِ
कि अब तो पकड़े गए मूसा ने कहा हरगिज़ नहीं क्योंकि मेरे साथ मेरा परवरदिगार है
63فَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اضْرِب بِّعَصَاكَ الْبَحْرَ ۖ فَانفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظِيمِ
वह फौरन मुझे कोई (मुखलिसी का) रास्ता बता देगा तो हमने मूसा के पास वही भेजी कि अपनी छड़ी दरिया पर मारो (मारना था कि) फौरन दरिया फुट के टुकड़े टुकड़े हो गया तो गोया हर टुकड़ा एक बड़ा ऊँचा पहाड़ था
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
61आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 61

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Saturday, October 3, 2026

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