अश-शुआरा · 63/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
فَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اضْرِب بِّعَصَاكَ الْبَحْرَ ۖ فَانفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظِيمِ ۝٦٣
Fa awhainaaa ilaa Moosaaa anidrib bi`asaakal bahra fanfalaqa fakaana kullu firqin kattawdil `azeem
📖 हिंदी अर्थ
वह फौरन मुझे कोई (मुखलिसी का) रास्ता बता देगा तो हमने मूसा के पास वही भेजी कि अपनी छड़ी दरिया पर मारो (मारना था कि) फौरन दरिया फुट के टुकड़े टुकड़े हो गया तो गोया हर टुकड़ा एक बड़ा ऊँचा पहाड़ था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَانفَلَقَ: समुद्र फट गया, यानी बीच से अलग हो गया।
  • فِرْقٍ: हर एक हिस्सा या टुकड़ा।
  • الطَّوْدِ الْعَظِيمِ: बहुत बड़ा पहाड़।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम के साथ समुद्र के किनारे पहुँचे और पीछे फ़िरऔन अपनी फ़ौजों के साथ उनका पीछा कर रहा था, तो अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) की ओर वह़्य (प्रकाशना) भेजी कि अपनी लाठी से समुद्र को मारो। जैसे ही उन्होंने लाठी मारी, अल्लाह की क़ुदरत से समुद्र फट गया और बारह रास्ते बन गए—बनी इसराईल के बारह क़बीलों की तादाद के बराबर। हर रास्ता इस तरह अलग हुआ कि पानी दोनों तरफ़ पहाड़ों की तरह खड़ा हो गया, और हर हिस्सा एक बहुत बड़े पहाड़ जैसा दिखाई दे रहा था। यह कोई साधारण फटना नहीं था, बल्कि पानी के टुकड़े इस तरह जम गए जैसे कोई विशाल पर्वत हो, और उनमें से एक बूँद भी नहीं टपकती थी। यह अल्लाह का एक अज़ीम मोजिज़ा (चमत्कार) था, जो उसकी ताक़त और अपने नबी की सच्चाई का सबूत था।

दावत और नसीहत:

यह वाक़िया हमें सिखाता है कि जब बंदा अल्लाह पर भरोसा करता है और उसके हुक्म की तामील करता है, तो अल्लाह उसके लिए ऐसे रास्ते खोल देता है जिनका तसव्वुर भी नहीं किया जा सकता। मूसा (अलैहिस्सलाम) के पास सिर्फ़ एक लाठी थी, लेकिन अल्लाह के हुक्म से वही लाठी समुद्र को चीरने का ज़रिया बन गई। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम अपनी कमज़ोरी की तरफ़ न देखें, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत पर यक़ीन रखें। जब हम अल्लाह के दीन की मदद करते हैं, तो अल्लाह हमारी मदद करता है और हमें मुश्किल से निकलने का रास्ता दिखाता है। यही वह ईमान है जो दिल को सुकून देता है और ज़िंदगी की हर मुसीबत में हमारा सहारा बनता है। आओ, हम भी अल्लाह के हुक्मों पर पूरा यक़ीन करें और उसकी रहमत से कभी मायूस न हों।



📜 आयत 61-65 — सूरा अश-शुआरा

61فَلَمَّا تَرَاءَى الْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَابُ مُوسَىٰ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ
और उन लोगों ने सूरज निकलते उनका पीछा किया तो जब दोनों जमाअतें (इतनी करीब हुयीं कि) एक दूसरे को देखने लगी तो मूसा के साथी (हैरान होकर) कहने लगे
62قَالَ كَلَّا ۖ إِنَّ مَعِيَ رَبِّي سَيَهْدِينِ
कि अब तो पकड़े गए मूसा ने कहा हरगिज़ नहीं क्योंकि मेरे साथ मेरा परवरदिगार है
63فَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اضْرِب بِّعَصَاكَ الْبَحْرَ ۖ فَانفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظِيمِ
वह फौरन मुझे कोई (मुखलिसी का) रास्ता बता देगा तो हमने मूसा के पास वही भेजी कि अपनी छड़ी दरिया पर मारो (मारना था कि) फौरन दरिया फुट के टुकड़े टुकड़े हो गया तो गोया हर टुकड़ा एक बड़ा ऊँचा पहाड़ था
64وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ الْآخَرِينَ
और हमने उसी जगह दूसरे फरीक (फिरऔन के साथी) को क़रीब कर दिया
65وَأَنجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُ أَجْمَعِينَ
और मूसा और उसके साथियों को हमने (डूबने से) बचा लिया
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
63आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 63

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Thursday, October 1, 2026

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