अश-शुआरा · 68/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝٦٨
Wa inna Rabbaka la Huwal `Azeezur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें तो शक ही न था कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अल-अज़ीज़ (العزيز): वह शक्तिशाली जो अपने दुश्मनों पर पूरी तरह से हावी हो, कोई उसे हरा न सके।
  • अर-रहीम (الرحيم): वह जो अपने बंदों पर बहुत दयालु और कृपालु हो, विशेषकर मोमिनों पर।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका रब, जो आपको और आपके साथियों को हर मुश्किल में संभालता है, वही सच्चा अज़ीज़ (सर्वशक्तिमान) और रहीम (अत्यंत दयावान) है। उसकी इज़्ज़त और क़ुदरत का यह आलम है कि जब उसने फ़िरऔन और उसकी सरकश क़ौम को सज़ा देनी चाही, तो उनकी तमाम ताक़त, सेना और जादूगरी उसे रोक न सकी — उसने उन्हें समुद्र में डुबोकर हमेशा के लिए मिटा दिया। यह उसकी अज़्ज़त (शक्ति) का नमूना है कि वह अपने दुश्मनों से बदला लेने में किसी का मोहताज नहीं। और उसकी रहमत (दया) का नमूना यह है कि उसी ने मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथ के ईमानवालों को उस तबाही से बचाकर निकाला, उन्हें सुरक्षित किनारे तक पहुँचाया और उन्हें फ़िरऔन के ज़ुल्म से छुटकारा दिलाया।

यह आयत मोमिनों के दिलों को सुकून देती है कि चाहे दुश्मन कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, अल्लाह की ताक़त के आगे उसकी कोई हक़ीक़त नहीं। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उनके लिए उसकी रहमत हर मुसीबत में साथ देती है। यही वजह है कि अल्लाह ने यहाँ अपने दो खूबसूरत नाम एक साथ ज़िक्र किए — अज़ीज़ और रहीम — ताकि बंदा जान ले कि उसका रब जहाँ सख़्त सज़ा देने वाला है, वहीं अपने नेक बंदों पर बेइंतिहा मेहरबान भी है।

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में कभी भी अल्लाह की ताक़त को कमज़ोर न समझें, और न ही उसकी रहमत से मायूस हों। अगर हम सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करें, तो वह हमें हर मुश्किल से निकालने की ताक़त रखता है। यही अल्लाह का वादा है — जो उस पर भरोसा करे, उसे वह कभी अकेला नहीं छोड़ता।



📜 आयत 66-70 — सूरा अश-शुआरा

66ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ
फिर दूसरे फरीक़ (फिरऔन और उसके साथियों) को डुबोकर हलाक़ कर दिया
67إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
बेशक इसमें यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और उनमें अक्सर ईमान लाने वाले ही न थे
68وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें तो शक ही न था कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है
69وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ إِبْرَاهِيمَ
और (ऐ रसूल) उन लोगों के सामने इबराहीम का किस्सा बयान करों
70إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَا تَعْبُدُونَ
जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
68आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 68

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Friday, October 2, 2026

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