अन-नमल · 89/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ خَيْرٌ مِّنْهَا وَهُم مِّن فَزَعٍ يَوْمَئِذٍ آمِنُونَ ۝٨٩
Man jaaa`a bilhasanati falahoo khairum minhaa wa hum min faza`iny Yawma`izin aaminoon
📖 हिंदी अर्थ
जो शख्स नेक काम करेगा उसके लिए उसकी जज़ा उससे कहीं बेहतर है ओर ये लोग उस दिन ख़ौफ व ख़तरे से महफूज़ रहेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الحَسَنَةَ (अल-हसनah): अच्छा काम, ईमान और नेक आमाल।
  • خَيْرٌ مِّنْهَا (ख़ैरुन मिन्हा): उससे बेहतर और उत्तम बदला।
  • فَزَعٍ (फ़ज़'): घबराहट, डर, भयानक घटना।

तफ़सीर:

जो व्यक्ति अल्लाह की ओर ईमान, उसकी वहदानियत (एकता) और उसकी इबादत के साथ आता है, और अपने जीवन में नेक काम करता है, तो उसके लिए अल्लाह के पास उससे भी बेहतर और उत्तम इनाम है — वह है जन्नत। यह इनाम उसके अच्छे कामों से कहीं बढ़कर है, क्योंकि अल्लाह की रहमत और करम उसके बंदों पर बेहद फ़ज़ीलत वाला है। और ऐसे लोग क़यामत के दिन के उस भयानक डर और घबराहट से महफ़ूज़ (सुरक्षित) होंगे, जब सारी मख़लूक़ात (सृष्टि) घबराई हुई होगी, अल्लाह उन्हें सुकून और अम्न (शांति) अता करेगा। यह अल्लाह का वादा है जो कभी नहीं टूटता — जो लोग उसकी तरफ़ ईमान और नेक आमाल के साथ आते हैं, उनके लिए जन्नत और अम्न है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना मेहरबान है — वह हमारे छोटे-छोटे नेक कामों को भी कबूल करता है और उसका बदला उससे कहीं बेहतर देता है। इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए, चाहे हमारे अच्छे काम कितने ही कम क्यों न हों। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। आओ, हम अपने जीवन को ईमान और नेक आमाल से सजाएँ, ताकि क़यामत के उस भयानक दिन हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह ने अम्न और सुकून अता किया है। यही असली कामयाबी है — और यही वह चीज़ है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में खुशहाल बनाती है।



📜 आयत 87-91 — सूरा अन-नमल

87وَيَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَن شَاءَ اللَّهُ ۚ وَكُلٌّ أَتَوْهُ دَاخِرِينَ
और (उस दिन याद करो) जिस दिन सूर फूँका जाएगा तो जितने लोग आसमानों मे हैं और जितने लोग ज़मीन में हैं (ग़रज़ सब के सब) दहल जाएंगें मगर जिस शख्स को ख़ुदा चाहे (वो अलबत्ता मुतमइन रहेगा) और सब लोग उसकी बारगाह में ज़िल्लत व आजिज़ी की हालत में हाज़िर होगें
88وَتَرَى الْجِبَالَ تَحْسَبُهَا جَامِدَةً وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ السَّحَابِ ۚ صُنْعَ اللَّهِ الَّذِي أَتْقَنَ كُلَّ شَيْءٍ ۚ إِنَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَفْعَلُونَ
और तुम पहाड़ों को देखकर उन्हें मज़बूर जमे हुए समझतें हो हालाकि ये (क़यामत के दिन) बादल की तरह उड़े उडे फ़िरेगें (ये भी) ख़ुदा की कारीगरी है कि जिसने हर चीज़ को ख़ूब मज़बूत बनाया है बेशक जो कुछ तुम लोग करते हो उससे वह ख़ूब वाक़िफ़ है
89مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ خَيْرٌ مِّنْهَا وَهُم مِّن فَزَعٍ يَوْمَئِذٍ آمِنُونَ
जो शख्स नेक काम करेगा उसके लिए उसकी जज़ा उससे कहीं बेहतर है ओर ये लोग उस दिन ख़ौफ व ख़तरे से महफूज़ रहेंगे
90وَمَن جَاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَكُبَّتْ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ هَلْ تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और जो लोग बुरा काम करेंगे वह मुँह के बल जहन्नुम में झोक दिए जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा कि) जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे बस उसी का जज़ा तुम्हें दी जाएगी
91إِنَّمَا أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ رَبَّ هَٰذِهِ الْبَلْدَةِ الَّذِي حَرَّمَهَا وَلَهُ كُلُّ شَيْءٍ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُسْلِمِينَ
(ऐ रसूल उनसे कह दो कि) मुझे तो बस यही हुक्म दिया गया है कि मै इस शहर (मक्का) के मालिक की इबादत करुँ जिसने उसे इज्ज़त व हुरमत दी है और हर चीज़ उसकी है और मुझे ये हुक्म दिया गया कि मै (उसके) फरमाबरदार बन्दों में से हूँ
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
89आयत

अनुवाद — अन-नमल 89

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Monday, September 28, 2026

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