अन-नमल · 90/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
وَمَن جَاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَكُبَّتْ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ هَلْ تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٩٠
Wa man jaaa`a bissai yi`ati fakubbat wujoohuhum fin Naari hal tujzawna illaa maa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग बुरा काम करेंगे वह मुँह के बल जहन्नुम में झोक दिए जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा कि) जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे बस उसी का जज़ा तुम्हें दी जाएगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّيِّئَةِ (बुराई): यहाँ इसका अर्थ शिर्क (ईश्वर के साथ साझीदार बनाना) और बड़े पाप तथा बुरे कर्म हैं।
  • فَكُبَّتْ وُجُوهُهُمْ (उनके चेहरे के बल गिराए जाएँगे): अर्थात उन्हें उल्टा (सिर के बल) आग में फेंका जाएगा, ताकि उनका अपमान और अधिक हो।
  • هَلْ تُجْزَوْنَ (क्या तुम्हें बदला दिया जा रहा है): यह एक प्रश्नवाचक वाक्य है जो डाँट-फटकार और तिरस्कार के रूप में होगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस न्याय के दिन का भयानक दृश्य प्रस्तुत करती है जब हर व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा। जो कोई भी इस दुनिया में शिर्क (ईश्वर के साथ किसी को साझीदार बनाने) और बुरे कर्मों के साथ आया, उसका अंजाम बहुत ही भयावह होगा। ऐसे लोगों को क़यामत के दिन उनके चेहरे के बल जहन्नम की आग में डाल दिया जाएगा। यह उनके लिए सबसे बड़ी रुसवाई और अपमान की स्थिति होगी कि वे अपने चेहरे के बल आग में गिराए जाएँगे।

फिर उनसे डाँट-फटकार और तिरस्कार के स्वर में कहा जाएगा: "क्या तुम्हें आज उसी का बदला दिया जा रहा है जो तुम स्वयं दुनिया में करते थे?" यानी यह अल्लाह का कोई ज़ुल्म नहीं, बल्कि तुम्हारे अपने कर्मों का ही परिणाम है। तुमने दुनिया में जो बोया था, आज वही काट रहे हो। यह सज़ा उनके अपने किए का स्वाभाविक नतीजा है, क्योंकि अल्लाह तआला किसी पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं करता।

यह आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अपने जीवन में हर उस काम से बचें जो अल्लाह को नापसंद है। शिर्क सबसे बड़ा पाप है, और उसके बाद बुरे कर्म और गुनाह भी इंसान को इसी भयानक अंजाम तक ले जा सकते हैं। लेकिन साथ ही यह भी याद रखें कि अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है — जो कोई भी सच्चे दिल से तौबा करके अपने जीवन को सुधार ले, अल्लाह उसे माफ करने के लिए तैयार है। इसलिए आज ही अपने कर्मों को सुधारें, अल्लाह की इबादत को अपनी ज़िंदगी का केंद्र बनाएँ, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचने की कोशिश करें जब कोई भी सिफ़ारिश या मदद काम नहीं आएगी। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 88-92 — अन-नमल

88وَتَرَى الْجِبَالَ تَحْسَبُهَا جَامِدَةً وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ السَّحَابِ ۚ صُنْعَ اللَّهِ الَّذِي أَتْقَنَ كُلَّ شَيْءٍ ۚ إِنَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَفْعَلُونَ
और तुम पहाड़ों को देखकर उन्हें मज़बूर जमे हुए समझतें हो हालाकि ये (क़यामत के दिन) बादल की तरह उड़े उडे फ़िरेगें (ये भी) ख़ुदा की कारीगरी है कि जिसने हर चीज़ को ख़ूब मज़बूत बनाया है बेशक जो कुछ तुम लोग करते हो उससे वह ख़ूब वाक़िफ़ है
89مَن جَاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ خَيْرٌ مِّنْهَا وَهُم مِّن فَزَعٍ يَوْمَئِذٍ آمِنُونَ
जो शख्स नेक काम करेगा उसके लिए उसकी जज़ा उससे कहीं बेहतर है ओर ये लोग उस दिन ख़ौफ व ख़तरे से महफूज़ रहेंगे
90وَمَن جَاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَكُبَّتْ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ هَلْ تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और जो लोग बुरा काम करेंगे वह मुँह के बल जहन्नुम में झोक दिए जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा कि) जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे बस उसी का जज़ा तुम्हें दी जाएगी
91إِنَّمَا أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ رَبَّ هَٰذِهِ الْبَلْدَةِ الَّذِي حَرَّمَهَا وَلَهُ كُلُّ شَيْءٍ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُسْلِمِينَ
(ऐ रसूल उनसे कह दो कि) मुझे तो बस यही हुक्म दिया गया है कि मै इस शहर (मक्का) के मालिक की इबादत करुँ जिसने उसे इज्ज़त व हुरमत दी है और हर चीज़ उसकी है और मुझे ये हुक्म दिया गया कि मै (उसके) फरमाबरदार बन्दों में से हूँ
92وَأَنْ أَتْلُوَ الْقُرْآنَ ۖ فَمَنِ اهْتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهْتَدِي لِنَفْسِهِ ۖ وَمَن ضَلَّ فَقُلْ إِنَّمَا أَنَا مِنَ الْمُنذِرِينَ
और ये कि मै क़ुरान पढ़ा करुँ फिर जो शख्स राह पर आया तो अपनी ज़ात के नफे क़े वास्ते राह पर आया और जो गुमराह हुआ तो तुम कह दो कि मै भी एक एक डराने वाला हूँ
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अनुवाद — अन-नमल 90

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Tuesday, August 18, 2026

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