अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا أُوتِيتُم – जो कुछ तुम्हें दिया गया है (धन, संतान, सुख-साधन)
- مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا – दुनिया की ज़िंदगी का अस्थायी सामान और आनंद
- زِينَتُهَا – उसकी सजावट और शोभा
- خَيْرٌ وَأَبْقَى – बेहतर और अधिक स्थायी (जो कभी खत्म न हो)
- أَفَلَا تَعْقِلُونَ – क्या तुम अक्ल से काम नहीं लेते?
विस्तृत तफसीर:
ऐ लोगों! जो कुछ भी तुम्हें इस दुनिया में दिया गया है—चाहे वह धन-दौलत हो, औलाद हो, शान-शौकत हो, या कोई और सांसारिक सुख-साधन—यह सब कुछ फ़ानी (नाशवान) है। यह महज़ दुनिया की ज़िंदगी का अस्थायी सामान है और उसकी सजावट है, जिसका आनंद तुम कुछ दिनों तक उठाते हो, फिर यह सब खत्म हो जाता है। यह ऐसा सामान है जो ज़रूरत के वक़्त काम आता है, लेकिन इसकी कोई हक़ीक़त नहीं, क्योंकि यह क्षणभंगुर है।
लेकिन जो कुछ अल्लाह के पास है—यानी उसका इनाम, उसकी रहमत, जन्नत की नेमतें, और उसकी रज़ा—वह इस सबसे कहीं बेहतर है और बहुत अधिक स्थायी है। अल्लाह का दिया हुआ इनाम कभी खत्म नहीं होता, न कभी पुराना होता है, और न ही उसमें कोई कमी आती है। यह हमेशा रहने वाला है, जबकि दुनिया का सामान कुछ दिनों का मेहमान है।
अब ज़रा सोचो—क्या तुम्हारी अक्ल यह नहीं समझती कि जो चीज़ बाक़ी रहने वाली है, वह उस चीज़ से बेहतर है जो खत्म हो जाने वाली है? क्या कोई समझदार इंसान उस चीज़ को पकड़े रहेगा जो मिट्टी में मिल जाए, और उस चीज़ को छोड़ देगा जो हमेशा क़ायम रहे? यह तो साफ़ बात है कि अक्लमंद वही है जो फ़ानी (नाशवान) पर बाक़ी (स्थायी) को तरजीह दे।
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की चमक-दमक और उसके सुखों पर मोहित न हों। यह सब एक परीक्षा है। अल्लाह ने यह सब कुछ इसलिए दिया है ताकि देखा जाए कि कौन इन चीज़ों में खोकर अपने रब को भूल जाता है, और कौन इन्हीं चीज़ों का इस्तेमाल करके अल्लाह की रज़ा हासिल करता है। जो इंसान दुनिया को आख़िरत का खेत समझता है और अपने कामों को अल्लाह की रज़ा के लिए करता है, वही असली कामयाब है।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें दुनिया और आख़िरत के बीच सही संतुलन बनाने की तालीम देती है। दुनिया का माल और सुख-साधन अल्लाह की नेमत हैं, लेकिन इन्हें ही सब कुछ समझ लेना बड़ी नादानी है। अल्लाह की रहमत और उसका इनाम उस चीज़ की तरह है जो कभी खत्म नहीं होती—जन्नत के बाग़, वहाँ की नहरें, वहाँ के महल, और सबसे बड़ी नेमत—अल्लाह का दीदार। यह सब उन लोगों के लिए है जो अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके हुक्मों पर चलते हैं, और दुनिया को आख़िरत पर कभी तरजीह नहीं देते।
तो आओ, हम अपनी अक्ल को काम में लाएँ और उस चीज़ को चुनें जो बाक़ी रहने वाली है, न कि उस चीज़ को जो मिट जाने वाली है। अल्लाह हम सबको सही समझ और सही अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 58-62 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 60
सूरा अल-क़सस आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम लोगों को जो कुछ अता हुआ है तो…सूरा आयत 60/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








