अल-क़सस · 72/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِن جَعَلَ اللَّهُ عَلَيْكُمُ النَّهَارَ سَرْمَدًا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ مَنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ يَأْتِيكُم بِلَيْلٍ تَسْكُنُونَ فِيهِ ۖ أَفَلَا تُبْصِرُونَ ۝٧٢
Qul ara`aitum in ja`alal laahu `alaikumun nahaara sarmadan ilaa Yawmil Qiyaamati man ilaahun ghairul laahi yaateekum bilailin taskunoona feehi afalaa tubsiroon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल उन से) कह दो कि भला तुमने देखा कि अगर ख़ुदा क़यामत तक बराबर तुम्हारे सरों पर दिन किए रहता तो अल्लाह के सिवा कौन ख़ुदा है जो तुम्हारे लिए रात को ले आता कि तुम लोग इसमें रात को आराम करो तो क्या तुम लोग (इतना भी) नहीं देखते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَرْمَدًا (सरमदन): लगातार, बिना रुके, हमेशा के लिए।
  • تَسْكُنُونَ (तस्कुनून): तुम आराम पाओ, सुकून हासिल करो।
  • أَفَلَا تُبْصِرُونَ (अफ़ला तुब्सिरून): क्या तुम देखते नहीं हो? क्या तुम्हें समझ नहीं आती?

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन लोगों से कहिए: "ज़रा मुझे बताओ, अगर अल्लाह तआला तुम्हारे ऊपर दिन को क़यामत के दिन तक के लिए लगातार और हमेशा का बना दे, यानी रात कभी न आए, तो क्या अल्लाह के सिवा कोई और माबूद (पूज्य) है जो तुम्हारे लिए रात लाए? वह रात जिसमें तुम सुकून और आराम पाते हो, अपनी दिन भर की थकान और मेहनत से राहत हासिल करते हो?"

यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर समझदार इंसान के पास सिर्फ़ एक ही है: "नहीं, अल्लाह के सिवा कोई नहीं जो रात ला सके।" यह अल्लाह की बड़ी रहमत है कि उसने दिन और रात का यह सिलसिला बनाया है — दिन में काम-काज और रात में आराम। अगर हमेशा दिन ही रहे, तो इंसान की ज़िंदगी मुश्किल हो जाए, उसका शरीर थक जाए और उसे कभी सुकून न मिले। और अगर हमेशा रात ही रहे, तो काम-धंधा, रोज़ी-रोटी और ज़िंदगी के तमाम काम ठप हो जाएँ।

तो क्या तुम लोग इन नेअमतों (अनुग्रहों) को देखते और समझते नहीं हो? क्या तुम्हारी आँखें इन निशानियों को नहीं देखतीं? क्या तुम्हारे दिल इस हक़ीक़त को नहीं समझते कि यह सब किसी और की नहीं, बल्कि सिर्फ़ अल्लाह ही की देन है? फिर तुम उसे छोड़कर दूसरों की इबादत क्यों करते हो? क्या तुम्हें अपने रब की इन बेशुमार नेअमतों पर विचार नहीं करना चाहिए?

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर नेअमत — चाहे वह दिन हो या रात, धूप हो या छाँव — उसी की तरफ़ से है। जब हम रात को सोते हैं और सुकून पाते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह अल्लाह की रहमत है। और जब सुबह उठकर दिन की रोशनी देखते हैं, तो भी यह उसी का करम है। यही तो ईमान की निशानी है कि इंसान हर नेअमत में अल्लाह का हाथ देखे और उसका शुक्र अदा करे।

अल्लाह तआला हमें यह तौफ़ीक़ दे कि हम उसकी नेअमतों को पहचानें, उस पर ईमान लाएँ और सिर्फ़ उसी की इबादत करें। आमीन।



📜 आयत 70-74 — अल-क़सस

70وَهُوَ اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ الْحَمْدُ فِي الْأُولَىٰ وَالْآخِرَةِ ۖ وَلَهُ الْحُكْمُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और वही ख़ुदा है उसके सिवा कोई क़ाबिले परसतिश नहीं दुनिया और आख़िरत में उस की तारीफ़ है और उसकी हुकूमत है और तुम लोग (मरने के बाद) उसकी तरफ लौटाए जाओगे
71قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِن جَعَلَ اللَّهُ عَلَيْكُمُ اللَّيْلَ سَرْمَدًا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ مَنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ يَأْتِيكُم بِضِيَاءٍ ۖ أَفَلَا تَسْمَعُونَ
(ऐ रसूल इन लोगों से) कहो कि भला तुमने देखा कि अगर ख़ुदा हमेशा के लिए क़यामत तक तुम्हारे सरों पर रात को छाए रहता तो अल्लाह के सिवा कौन ख़ुदा है जो तुम्हारे पास रौशनी ले आता तो क्या तुम सुनते नहीं हो
72قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِن جَعَلَ اللَّهُ عَلَيْكُمُ النَّهَارَ سَرْمَدًا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ مَنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ يَأْتِيكُم بِلَيْلٍ تَسْكُنُونَ فِيهِ ۖ أَفَلَا تُبْصِرُونَ
(ऐ रसूल उन से) कह दो कि भला तुमने देखा कि अगर ख़ुदा क़यामत तक बराबर तुम्हारे सरों पर दिन किए रहता तो अल्लाह के सिवा कौन ख़ुदा है जो तुम्हारे लिए रात को ले आता कि तुम लोग इसमें रात को आराम करो तो क्या तुम लोग (इतना भी) नहीं देखते
73وَمِن رَّحْمَتِهِ جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
और उसने अपनी मेहरबानी से तुम्हारे वास्ते रात और दिन को बनाया ताकि तुम रात में आराम करो और दिन में उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो
74وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ أَيْنَ شُرَكَائِيَ الَّذِينَ كُنتُمْ تَزْعُمُونَ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन वह उन्हें पुकार कर पूछेगा जिनको तुम लोग मेरा शरीक ख्याल करते थे वह (आज) कहाँ हैं
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अनुवाद — अल-क़सस 72

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Tuesday, August 18, 2026

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