Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَرْمَدًا (सरमदन): लगातार, बिना रुके, हमेशा के लिए।
- تَسْكُنُونَ (तस्कुनून): तुम आराम पाओ, सुकून हासिल करो।
- أَفَلَا تُبْصِرُونَ (अफ़ला तुब्सिरून): क्या तुम देखते नहीं हो? क्या तुम्हें समझ नहीं आती?
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन लोगों से कहिए: "ज़रा मुझे बताओ, अगर अल्लाह तआला तुम्हारे ऊपर दिन को क़यामत के दिन तक के लिए लगातार और हमेशा का बना दे, यानी रात कभी न आए, तो क्या अल्लाह के सिवा कोई और माबूद (पूज्य) है जो तुम्हारे लिए रात लाए? वह रात जिसमें तुम सुकून और आराम पाते हो, अपनी दिन भर की थकान और मेहनत से राहत हासिल करते हो?"
यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर समझदार इंसान के पास सिर्फ़ एक ही है: "नहीं, अल्लाह के सिवा कोई नहीं जो रात ला सके।" यह अल्लाह की बड़ी रहमत है कि उसने दिन और रात का यह सिलसिला बनाया है — दिन में काम-काज और रात में आराम। अगर हमेशा दिन ही रहे, तो इंसान की ज़िंदगी मुश्किल हो जाए, उसका शरीर थक जाए और उसे कभी सुकून न मिले। और अगर हमेशा रात ही रहे, तो काम-धंधा, रोज़ी-रोटी और ज़िंदगी के तमाम काम ठप हो जाएँ।
तो क्या तुम लोग इन नेअमतों (अनुग्रहों) को देखते और समझते नहीं हो? क्या तुम्हारी आँखें इन निशानियों को नहीं देखतीं? क्या तुम्हारे दिल इस हक़ीक़त को नहीं समझते कि यह सब किसी और की नहीं, बल्कि सिर्फ़ अल्लाह ही की देन है? फिर तुम उसे छोड़कर दूसरों की इबादत क्यों करते हो? क्या तुम्हें अपने रब की इन बेशुमार नेअमतों पर विचार नहीं करना चाहिए?
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर नेअमत — चाहे वह दिन हो या रात, धूप हो या छाँव — उसी की तरफ़ से है। जब हम रात को सोते हैं और सुकून पाते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह अल्लाह की रहमत है। और जब सुबह उठकर दिन की रोशनी देखते हैं, तो भी यह उसी का करम है। यही तो ईमान की निशानी है कि इंसान हर नेअमत में अल्लाह का हाथ देखे और उसका शुक्र अदा करे।
अल्लाह तआला हमें यह तौफ़ीक़ दे कि हम उसकी नेअमतों को पहचानें, उस पर ईमान लाएँ और सिर्फ़ उसी की इबादत करें। आमीन।
📜 आयत 70-74 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 72
सूरा अल-क़सस आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उन से) कह दो कि भला तुमने देखा…सूरा आयत 72/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


