अल-क़सस · 73/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़सस
وَمِن رَّحْمَتِهِ جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ۝٧٣
Wa mir rahmatihee ja`ala lakumul laila wannahaara litaskunoo feehi wa litabtaghoo min fadlihee wa la`allakum tashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
और उसने अपनी मेहरबानी से तुम्हारे वास्ते रात और दिन को बनाया ताकि तुम रात में आराम करो और दिन में उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَحْمَتِهِ: उसकी दया और कृपा से
  • لِتَسْكُنُوا: ताकि तुम आराम करो और चैन पाओ
  • لِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ: ताकि तुम उसका अनुग्रह (रोज़ी) तलाश करो
  • تَشْكُرُونَ: तुम कृतज्ञता व्यक्त करो

तफ़सीर:

अल्लाह तआला की यह बहुत बड़ी रहमत और मेहरबानी है कि उसने अपने बंदों के लिए रात और दिन बनाए। उसने रात को अंधेरा बनाया ताकि तुम उसमें सुकून हासिल करो, अपनी थकान दूर करो और आराम से सो सको। दिन को उसने रोशन बनाया ताकि तुम उसमें उठकर अपनी रोज़ी-रोज़गार की तलाश करो, काम-काज करो और अल्लाह के फज़ल (अनुग्रह) से अपनी ज़रूरतें पूरी करो।

यह अल्लाह की रहमत का ही कमाल है कि उसने रात और दिन के बीच ऐसा संतुलन बनाया है—न रात हमेशा के लिए रहती है कि तुम काम न कर पाओ, न दिन हमेशा के लिए रहता है कि तुम्हें आराम ही न मिले। बल्कि इन दोनों को एक-दूसरे के बाद लाता है, ताकि तुम्हारी ज़िंदगी का निज़ाम चलता रहे।

अल्लाह तआला चाहता है कि इन नेमतों को देखकर तुम उसका शुक्र अदा करो। शुक्र का मतलब सिर्फ ज़बान से "अल्हम्दुलिल्लाह" कहना नहीं है, बल्कि दिल से अल्लाह की नेमतों को पहचानना और उनका सही इस्तेमाल करना भी है। रात को आराम करके तुम अपनी ताकत बहाल करते हो, और दिन में काम करके अपनी और अपने परिवार की ज़रूरतें पूरी करते हो—यह सब अल्लाह की तरफ से है।

प्यारे भाइयों और बहनों! जब हम सुबह उठते हैं और देखते हैं कि अल्लाह ने फिर से दिन बनाया है, तो यह उसकी रहमत है। जब रात होती है और हम आराम करते हैं, तो यह भी उसकी रहमत है। क्या हमें इन नेमतों पर अल्लाह का शुक्र अदा नहीं करना चाहिए? क्या हमें अपनी ज़िंदगी के इन दो हिस्सों को अल्लाह की इबादत और उसकी राह में नहीं लगाना चाहिए?

याद रखिए, शुक्र करने वाले बंदों पर अल्लाह अपनी नेमतें और बढ़ा देता है। अगर हम अल्लाह के इन इनामों की कद्र करेंगे, तो वह हमें और देगा। और अगर हम नाशुक्री करेंगे, तो यह नेमतें भी उठ सकती हैं। इसलिए हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा करते रहें—रात को सोने से पहले और दिन को उठने के बाद—और अपनी ज़िंदगी के हर पल को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक गुज़ारें।



📜 आयत 71-75 — सूरा अल-क़सस

71قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِن جَعَلَ اللَّهُ عَلَيْكُمُ اللَّيْلَ سَرْمَدًا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ مَنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ يَأْتِيكُم بِضِيَاءٍ ۖ أَفَلَا تَسْمَعُونَ
(ऐ रसूल इन लोगों से) कहो कि भला तुमने देखा कि अगर ख़ुदा हमेशा के लिए क़यामत तक तुम्हारे सरों पर रात को छाए रहता तो अल्लाह के सिवा कौन ख़ुदा है जो तुम्हारे पास रौशनी ले आता तो क्या तुम सुनते नहीं हो
72قُلْ أَرَأَيْتُمْ إِن جَعَلَ اللَّهُ عَلَيْكُمُ النَّهَارَ سَرْمَدًا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ مَنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ يَأْتِيكُم بِلَيْلٍ تَسْكُنُونَ فِيهِ ۖ أَفَلَا تُبْصِرُونَ
(ऐ रसूल उन से) कह दो कि भला तुमने देखा कि अगर ख़ुदा क़यामत तक बराबर तुम्हारे सरों पर दिन किए रहता तो अल्लाह के सिवा कौन ख़ुदा है जो तुम्हारे लिए रात को ले आता कि तुम लोग इसमें रात को आराम करो तो क्या तुम लोग (इतना भी) नहीं देखते
73وَمِن رَّحْمَتِهِ جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ لِتَسْكُنُوا فِيهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
और उसने अपनी मेहरबानी से तुम्हारे वास्ते रात और दिन को बनाया ताकि तुम रात में आराम करो और दिन में उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो
74وَيَوْمَ يُنَادِيهِمْ فَيَقُولُ أَيْنَ شُرَكَائِيَ الَّذِينَ كُنتُمْ تَزْعُمُونَ
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन वह उन्हें पुकार कर पूछेगा जिनको तुम लोग मेरा शरीक ख्याल करते थे वह (आज) कहाँ हैं
75وَنَزَعْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا فَقُلْنَا هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ فَعَلِمُوا أَنَّ الْحَقَّ لِلَّهِ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
और हम हर एक उम्मत से एक गवाह (पैग़म्बर) निकाले (सामने बुलाएँगे) फिर (उस दिन मुशरेकीन से) कहेंगे कि अपनी (बराअत की) दलील पेश करो तब उन्हें मालूम हो जाएगा कि हक़ ख़ुदा ही की तरफ़ है और जो इफ़तेरा परवाज़ियाँ ये लोग किया करते थे सब उनसे ग़ायब हो जाएँगी
अल-क़ससकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
73आयत

अनुवाद — अल-क़सस 73

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Saturday, October 3, 2026

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