Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- رَحْمَتِهِ: उसकी दया और कृपा से
- لِتَسْكُنُوا: ताकि तुम आराम करो और चैन पाओ
- لِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ: ताकि तुम उसका अनुग्रह (रोज़ी) तलाश करो
- تَشْكُرُونَ: तुम कृतज्ञता व्यक्त करो
तफ़सीर:
अल्लाह तआला की यह बहुत बड़ी रहमत और मेहरबानी है कि उसने अपने बंदों के लिए रात और दिन बनाए। उसने रात को अंधेरा बनाया ताकि तुम उसमें सुकून हासिल करो, अपनी थकान दूर करो और आराम से सो सको। दिन को उसने रोशन बनाया ताकि तुम उसमें उठकर अपनी रोज़ी-रोज़गार की तलाश करो, काम-काज करो और अल्लाह के फज़ल (अनुग्रह) से अपनी ज़रूरतें पूरी करो।
यह अल्लाह की रहमत का ही कमाल है कि उसने रात और दिन के बीच ऐसा संतुलन बनाया है—न रात हमेशा के लिए रहती है कि तुम काम न कर पाओ, न दिन हमेशा के लिए रहता है कि तुम्हें आराम ही न मिले। बल्कि इन दोनों को एक-दूसरे के बाद लाता है, ताकि तुम्हारी ज़िंदगी का निज़ाम चलता रहे।
अल्लाह तआला चाहता है कि इन नेमतों को देखकर तुम उसका शुक्र अदा करो। शुक्र का मतलब सिर्फ ज़बान से "अल्हम्दुलिल्लाह" कहना नहीं है, बल्कि दिल से अल्लाह की नेमतों को पहचानना और उनका सही इस्तेमाल करना भी है। रात को आराम करके तुम अपनी ताकत बहाल करते हो, और दिन में काम करके अपनी और अपने परिवार की ज़रूरतें पूरी करते हो—यह सब अल्लाह की तरफ से है।
प्यारे भाइयों और बहनों! जब हम सुबह उठते हैं और देखते हैं कि अल्लाह ने फिर से दिन बनाया है, तो यह उसकी रहमत है। जब रात होती है और हम आराम करते हैं, तो यह भी उसकी रहमत है। क्या हमें इन नेमतों पर अल्लाह का शुक्र अदा नहीं करना चाहिए? क्या हमें अपनी ज़िंदगी के इन दो हिस्सों को अल्लाह की इबादत और उसकी राह में नहीं लगाना चाहिए?
याद रखिए, शुक्र करने वाले बंदों पर अल्लाह अपनी नेमतें और बढ़ा देता है। अगर हम अल्लाह के इन इनामों की कद्र करेंगे, तो वह हमें और देगा। और अगर हम नाशुक्री करेंगे, तो यह नेमतें भी उठ सकती हैं। इसलिए हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा करते रहें—रात को सोने से पहले और दिन को उठने के बाद—और अपनी ज़िंदगी के हर पल को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक गुज़ारें।
📜 आयत 71-75 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 73
सूरा अल-क़सस आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसने अपनी मेहरबानी से तुम्हारे वास्ते रात और दिन…सूरा आयत 73/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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