अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَرْمَدًا (सरमदन): लगातार, बिना रुके, हमेशा के लिए।
- بِضِيَاءٍ (बिज़िया): रोशनी, दिन का उजाला।
- أَفَلَا تَسْمَعُونَ (अफ़ला तस्मऊन): क्या तुम नहीं सुनते? यानी समझने और कबूल करने वाले कानों से।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए: "ज़रा मुझे बताओ, अगर अल्लाह तआला तुम्हारे ऊपर रात को क़यामत के दिन तक हमेशा के लिए लगातार बना दे, यानी दिन कभी न आए और हमेशा अंधेरा ही छाया रहे, तो अल्लाह के सिवा कोई और माबूद है जो तुम्हारे पास रोशनी लाए? क्या कोई और इबादत के काबिल है जो तुम्हें दिन का उजाला दे सके?"
यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर समझदार इंसान के पास साफ है — कोई नहीं! सिर्फ अल्लाह ही है जो रात के बाद सुबह लाता है, अंधेरे के बाद उजाला करता है। यह उसकी कुदरत की निशानी है कि वह रात और दिन को बारी-बारी से बदलता है, ताकि तुम आराम भी करो और रिज़्क़ भी तलाश करो।
अगर रात हमेशा के लिए रह जाए, तो ज़िंदगी मुश्किल हो जाएगी, काम-धंधे ठप हो जाएंगे, और इंसानियत तरक्की नहीं कर पाएगी। यही अल्लाह की रहमत है कि उसने रात और दिन का निज़ाम बनाया।
तो क्या तुम यह बात सुनकर भी नहीं समझते? क्या तुम्हारे दिलों पर पर्दा पड़ गया है कि इतनी बड़ी निशानी देखकर भी अल्लाह की वहदानियत (एकता) को कबूल नहीं करते?
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की बनाई हर चीज़ में उसकी कुदरत की निशानी है। रात और दिन का बदलना, सूरज की रोशनी, चाँद की चांदनी — सब उसी के इशारे पर चल रहे हैं। जिसने यह निज़ाम बनाया, वही इबादत के लायक है। हमें चाहिए कि हम इन निशानियों पर गौर करें और अपने रब का शुक्र अदा करें, क्योंकि उसकी रहमतें अनगिनत हैं और उसका एहसान हम पर बेहिसाब है।
याद रखिए! जो अल्लाह को पहचान ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। यही ईमान की मिठास है कि इंसान हर चीज़ में अपने रब की कुदरत देखे और उसके आगे सर झुकाए।
📜 आयत 69-73 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 71
सूरा अल-क़सस आयत 71 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल इन लोगों से) कहो कि भला तुमने देखा…सूरा आयत 71/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 69–73. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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