अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- हَمَّتْ: उसने इरादा किया, मन में ठान लिया।
- طَائِفَتَانِ: दो गिरोह, दो समूह।
- تَفْشَلَا: कमज़ोर पड़ जाएँ, पीछे हट जाएँ, साहस छोड़ दें।
- وَلِيُّهُمَا: उनका संरक्षक, सहायक और कार्यसंभालने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! उस समय को याद करो जब तुम्हारे साथियों में से दो गिरोहों—बनी सलमा (ख़ज़रज क़बीले से) और बनी हारिसा (औस क़बीले से)—ने कमज़ोरी दिखाने और मैदान-ए-जंग से पीछे हटने का इरादा कर लिया था। यह वह समय था जब मुनाफ़िक़ों का सरदार अब्दुल्लाह बिन उबै अपने साथियों को लेकर लौट गया था, और इन दोनों गिरोहों के दिलों में भी डर और झिझक पैदा हो गई थी कि कहीं हम वापस न चलें। लेकिन अल्लाह ने अपनी विशेष मेहरबानी से उन्हें इस कमज़ोरी से बचा लिया, उनके दिलों को मज़बूत किया और वे तुम्हारे साथ डटे रहे। अल्लाह ही उनका संरक्षक और सहायक है, वही उनकी हिफ़ाज़त करता है और उन्हें सही रास्ते पर चलाता है।
इसलिए ईमानवालों को चाहिए कि वे हर हालत में अल्लाह पर ही भरोसा करें, क्योंकि भरोसे का सबसे सही और योग्य स्थान अल्लाह ही है। वही है जो कमज़ोरों को ताक़त देता है, डरने वालों को हिम्मत देता है और अपने बंदों की मदद करता है। मुसलमानों को किसी इंसान, किसी गिरोह या किसी सांसारिक साधन पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि अपना पूरा भरोसा अल्लाह पर ही रखना चाहिए।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह अपने ईमानवाले बंदों का संरक्षक है, और जब वह किसी का संरक्षक होता है, तो उसकी कमज़ोरी ताक़त में बदल जाती है और उसका डर हिम्मत में।
- इंसान के दिल में कभी-कभी कमज़ोरी और झिझक आ जाती है, लेकिन अल्लाह की मदद और उसकी तरफ़ से सब्र देने से यह कमज़ोरी दूर हो जाती है। यह अल्लाह की रहमत है कि वह अपने बंदों को उनकी कमज़ोरियों से बचाता है।
- मुसलमान को चाहिए कि वह हर काम में अल्लाह पर भरोसा करे, क्योंकि भरोसा करने वाले को अल्लाह कभी निराश नहीं करता। यही ईमान की निशानी है कि बंदा अपने मामलों को अल्लाह के सुपुर्द कर दे।
- यह आयत हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा सहायक है और वही अपने बंदों को हर मुसीबत से निकालने की ताक़त रखता है।
📜 आयत 120-124 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 122
सूरा आल-इमरान आयत 122 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये उस वक्त क़ा वाक़या है जब तुममें से दो…सूरा आयत 122/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 120–124. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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