आल-इमरान · 122/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِذْ هَمَّت طَّائِفَتَانِ مِنكُمْ أَن تَفْشَلَا وَاللَّهُ وَلِيُّهُمَا ۗ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ ۝١٢٢
Iz hammat taaa`ifataani minkum an tafshalaa wallaahu waliyyuhumaa; wa `alal laahi falyatawakkalil mu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
ये उस वक्त क़ा वाक़या है जब तुममें से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • हَمَّتْ: उसने इरादा किया, मन में ठान लिया।
  • طَائِفَتَانِ: दो गिरोह, दो समूह।
  • تَفْشَلَا: कमज़ोर पड़ जाएँ, पीछे हट जाएँ, साहस छोड़ दें।
  • وَلِيُّهُمَا: उनका संरक्षक, सहायक और कार्यसंभालने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! उस समय को याद करो जब तुम्हारे साथियों में से दो गिरोहों—बनी सलमा (ख़ज़रज क़बीले से) और बनी हारिसा (औस क़बीले से)—ने कमज़ोरी दिखाने और मैदान-ए-जंग से पीछे हटने का इरादा कर लिया था। यह वह समय था जब मुनाफ़िक़ों का सरदार अब्दुल्लाह बिन उबै अपने साथियों को लेकर लौट गया था, और इन दोनों गिरोहों के दिलों में भी डर और झिझक पैदा हो गई थी कि कहीं हम वापस न चलें। लेकिन अल्लाह ने अपनी विशेष मेहरबानी से उन्हें इस कमज़ोरी से बचा लिया, उनके दिलों को मज़बूत किया और वे तुम्हारे साथ डटे रहे। अल्लाह ही उनका संरक्षक और सहायक है, वही उनकी हिफ़ाज़त करता है और उन्हें सही रास्ते पर चलाता है।

इसलिए ईमानवालों को चाहिए कि वे हर हालत में अल्लाह पर ही भरोसा करें, क्योंकि भरोसे का सबसे सही और योग्य स्थान अल्लाह ही है। वही है जो कमज़ोरों को ताक़त देता है, डरने वालों को हिम्मत देता है और अपने बंदों की मदद करता है। मुसलमानों को किसी इंसान, किसी गिरोह या किसी सांसारिक साधन पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि अपना पूरा भरोसा अल्लाह पर ही रखना चाहिए।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह अपने ईमानवाले बंदों का संरक्षक है, और जब वह किसी का संरक्षक होता है, तो उसकी कमज़ोरी ताक़त में बदल जाती है और उसका डर हिम्मत में।
  2. इंसान के दिल में कभी-कभी कमज़ोरी और झिझक आ जाती है, लेकिन अल्लाह की मदद और उसकी तरफ़ से सब्र देने से यह कमज़ोरी दूर हो जाती है। यह अल्लाह की रहमत है कि वह अपने बंदों को उनकी कमज़ोरियों से बचाता है।
  3. मुसलमान को चाहिए कि वह हर काम में अल्लाह पर भरोसा करे, क्योंकि भरोसा करने वाले को अल्लाह कभी निराश नहीं करता। यही ईमान की निशानी है कि बंदा अपने मामलों को अल्लाह के सुपुर्द कर दे।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा सहायक है और वही अपने बंदों को हर मुसीबत से निकालने की ताक़त रखता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 120-124 — आल-इमरान

120إِن تَمْسَسْكُمْ حَسَنَةٌ تَسُؤْهُمْ وَإِن تُصِبْكُمْ سَيِّئَةٌ يَفْرَحُوا بِهَا ۖ وَإِن تَصْبِرُوا وَتَتَّقُوا لَا يَضُرُّكُمْ كَيْدُهُمْ شَيْئًا ۗ إِنَّ اللَّهَ بِمَا يَعْمَلُونَ مُحِيطٌ
(ऐ ईमानदारों) अगर तुमको भलाई छू भी गयी तो उनको बुरा मालूम होता है और जब तुमपर कोई भी मुसीबत पड़ती है तो वह ख़ुश हो जाते हैं और अगर तुम सब्र करो और परहेज़गारी इख्तेयार करो तो उनका फ़रेब तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुंचाएगा (क्योंकि) ख़ुदा तो उनकी कारस्तानियों पर हावी है
121وَإِذْ غَدَوْتَ مِنْ أَهْلِكَ تُبَوِّئُ الْمُؤْمِنِينَ مَقَاعِدَ لِلْقِتَالِ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और (ऐ रसूल) एक वक्त वो भी था जब तुम अपने बाल बच्चों से तड़के ही निकल खड़े हुए और मोमिनीन को लड़ाई के मोर्चों पर बिठा रहे थे और खुदा सब कुछ जानता और सुनता है
122إِذْ هَمَّت طَّائِفَتَانِ مِنكُمْ أَن تَفْشَلَا وَاللَّهُ وَلِيُّهُمَا ۗ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
ये उस वक्त क़ा वाक़या है जब तुममें से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये
123وَلَقَدْ نَصَرَكُمُ اللَّهُ بِبَدْرٍ وَأَنتُمْ أَذِلَّةٌ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दी
124إِذْ تَقُولُ لِلْمُؤْمِنِينَ أَلَن يَكْفِيَكُمْ أَن يُمِدَّكُمْ رَبُّكُم بِثَلَاثَةِ آلَافٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُنزَلِينَ
पस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हॉ (ज़रूर काफ़ी है)
आल-इमरानकुरान सूची
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मदनीRevelation
122आयत

अनुवाद — आल-इमरान 122

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Tuesday, August 18, 2026

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