आल-इमरान · 173/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
الَّذِينَ قَالَ لَهُمُ النَّاسُ إِنَّ النَّاسَ قَدْ جَمَعُوا لَكُمْ فَاخْشَوْهُمْ فَزَادَهُمْ إِيمَانًا وَقَالُوا حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ ۝١٧٣
Allazeena qaala lahumun naasu innan naasa qad jama`oo lakum fakhshawhuin fazaadahum eemaannanwa wa qaaloo hasbunal laahu wa ni`malwakeel
📖 हिंदी अर्थ
यह वह हैं कि जब उनसे लोगों ने आकर कहना शुरू किया कि (दुशमन) लोगों ने तुम्हारे (मुक़ाबले के) वास्ते (बड़ा लश्कर) जमा किया है पस उनसे डरते (तो बजाए ख़ौफ़ के) उनका ईमान और ज्यादा हो गया और कहने लगे (होगा भी) ख़ुदा हमारे वास्ते काफ़ी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَسْبُنَا اللهُ: हमारे लिए अल्लाह ही काफी है।
  • الْوَكِيلُ: वह जिस पर भरोसा किया जाए और जिसे अपने मामले सौंपे जाएं।

तफसीर (व्याख्या):

ये वे लोग हैं जिनसे कुछ लोगों (मुशरिकों) ने कहा कि अबू सुफियान और उसके साथियों ने तुम्हारे खिलाफ बड़ी भारी ताकत इकट्ठा कर ली है, और वे तुम्हें जड़ से मिटाने के लिए फिर से आ रहे हैं। उन्होंने डराया कि उनका सामना करने से बचो, क्योंकि उनके मुकाबले में तुम्हारे लिए कोई ताकत नहीं है। लेकिन इस डरावनी खबर ने उनके ईमान को और मजबूत कर दिया, उनका यकीन अल्लाह के वादे पर और पक्का हो गया। वे डरे नहीं, बल्कि उन्होंने अल्लाह पर पूरा भरोसा करते हुए कहा: "हमारे लिए अल्लाह ही काफी है, और वही सबसे अच्छा कार्य-साधक (भरोसे का ठिकाना) है।" उन्होंने अपनी नीयत को खालिस कर लिया और जिहाद के लिए पूरी तैयारी के साथ निकल पड़े।

फायदे (सबक):

  1. मुसीबत और खतरे के समय अल्लाह पर भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत है। जब दिल अल्लाह से जुड़ जाए, तो दुनिया की कोई ताकत उसे विचलित नहीं कर सकती।
  2. दुश्मन की धमकियां और डरावनी खबरें मोमिन के ईमान को कमजोर नहीं करतीं, बल्कि उसके यकीन को और बढ़ा देती हैं।
  3. "حَسْبُنَا اللهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ" का वज़ीफा (अमल) हर मुसलमान के लिए बहुत बड़ी नेमत है। इसे पढ़ने वाले को अल्लाह की तरफ से काफी होने का वादा है।
  4. यह आयत सिखाती है कि मुश्किल घड़ी में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह की मदद पर भरोसा करके आगे बढ़ना चाहिए। अल्लाह अपने भरोसेमंद बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।


📜 आयत 171-175 — आल-इमरान

171۞ يَسْتَبْشِرُونَ بِنِعْمَةٍ مِّنَ اللَّهِ وَفَضْلٍ وَأَنَّ اللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ الْمُؤْمِنِينَ
ख़ुदा नेअमत और उसके फ़ज़ल (व करम) और इस बात की ख़ुशख़बरी पाकर कि ख़ुदा मोमिनीन के सवाब को बरबाद नहीं करता
172الَّذِينَ اسْتَجَابُوا لِلَّهِ وَالرَّسُولِ مِن بَعْدِ مَا أَصَابَهُمُ الْقَرْحُ ۚ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا مِنْهُمْ وَاتَّقَوْا أَجْرٌ عَظِيمٌ
निहाल हो रहे हैं (जंगे ओहद में) जिन लोगों ने जख्म खाने के बाद भी ख़ुदा और रसूल का कहना माना उनमें से जिन लोगों ने नेकी और परहेज़गारी की (सब के लिये नहीं सिर्फ) उनके लिये बड़ा सवाब है
173الَّذِينَ قَالَ لَهُمُ النَّاسُ إِنَّ النَّاسَ قَدْ جَمَعُوا لَكُمْ فَاخْشَوْهُمْ فَزَادَهُمْ إِيمَانًا وَقَالُوا حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ
यह वह हैं कि जब उनसे लोगों ने आकर कहना शुरू किया कि (दुशमन) लोगों ने तुम्हारे (मुक़ाबले के) वास्ते (बड़ा लश्कर) जमा किया है पस उनसे डरते (तो बजाए ख़ौफ़ के) उनका ईमान और ज्यादा हो गया और कहने लगे (होगा भी) ख़ुदा हमारे वास्ते काफ़ी है
174فَانقَلَبُوا بِنِعْمَةٍ مِّنَ اللَّهِ وَفَضْلٍ لَّمْ يَمْسَسْهُمْ سُوءٌ وَاتَّبَعُوا رِضْوَانَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ ذُو فَضْلٍ عَظِيمٍ
और वह क्या अच्छा कारसाज़ है फिर (या तो हिम्मत करके गए मगर जब लड़ाई न हुई तो) ये लोग ख़ुदा की नेअमत और फ़ज़ल के साथ (अपने घर) वापस आए और उन्हें कोई बुराई छू भी नहीं गयी और ख़ुदा की ख़ुशनूदी के पाबन्द रहे और ख़ुदा बड़ा फ़ज़ल करने वाला है
175إِنَّمَا ذَٰلِكُمُ الشَّيْطَانُ يُخَوِّفُ أَوْلِيَاءَهُ فَلَا تَخَافُوهُمْ وَخَافُونِ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
यह (मुख्बिर) बस शैतान था जो सिर्फ़ अपने दोस्तों को (रसूल का साथ देने से) डराता है पस तुम उनसे तो डरो नहीं अगर सच्चे मोमिन हो तो मुझ ही से डरते रहो
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अनुवाद — आल-इमरान 173

सूरा आल-इमरान आयत 173 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यह वह हैं कि जब उनसे लोगों ने आकर कहना…

सूरा आयत 173/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 171–175. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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