Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَبِطَتْ (हबितत) – बेकार हो गईं, नष्ट हो गईं, उनका कोई फल न रहा।
- أَعْمَالُهُمْ (आ'मालुहुम) – उनके कर्म, उनके अच्छे काम।
- نَّاصِرِينَ (नासिरीन) – मददगार, सहायक, रक्षक।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये वे लोग हैं जिनके सारे अच्छे कर्म और नेकियाँ इस दुनिया और आख़िरत दोनों में बेकार और नष्ट हो गईं। उनके किए हुए कामों का कोई फल उन्हें नहीं मिलेगा, क्योंकि उन्होंने अल्लाह पर ईमान नहीं लाया और उसके दीन को नकार दिया। उनके अच्छे काम, चाहे वे दिखने में कितने ही भले क्यों न हों, अल्लाह की दृष्टि में उनका कोई मूल्य नहीं रखते, क्योंकि उनकी नींव ही ईमान और सच्ची नीयत पर नहीं टिकी थी।
दुनिया में उनके कर्मों का फल यह हुआ कि उन्हें न तो अल्लाह की रहमत मिली और न ही उनके कामों में बरकत हुई। आख़िरत में तो उन्हें कोई बचाव नहीं मिलेगा। जब अल्लाह का अज़ाब आएगा, तो उन्हें बचाने वाला कोई नहीं होगा। न कोई दोस्त, न कोई रिश्तेदार, न कोई शक्तिशाली व्यक्ति उनकी मदद कर सकेगा। वे पूरी तरह अकेले और बेसहारा होंगे, और अल्लाह की पकड़ से उन्हें कोई छुटकारा नहीं दे सकेगा।
फ़ायदे (सबक):
- ईमान ही कर्मों की स्वीकृति की शर्त है: यह आयत सिखाती है कि अच्छे कर्म तभी अल्लाह के यहाँ क़बूल होते हैं जब उनके साथ सच्चा ईमान और सही नीयत हो। बिना ईमान के किए गए कर्म, चाहे कितने ही बड़े क्यों न हों, आख़िरत में किसी काम नहीं आएँगे।
- अल्लाह की पकड़ से बचाने वाला कोई नहीं: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाला कोई नहीं है। इसलिए हमें केवल अल्लाह की राह पर चलना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए।
- कर्मों की नींव ईमान पर होनी चाहिए: जिस तरह एक इमारत की नींव मज़बूत होनी चाहिए, उसी तरह हमारे सारे कर्मों की नींव ईमान और अल्लाह के प्रति समर्पण पर होनी चाहिए। यही वह चीज़ है जो हमारे कर्मों को अल्लाह के यहाँ मूल्यवान बनाती है।
- अल्लाह की रहमत की ओर लौटने की प्रेरणा: यह आयत हमें सचेत करती है कि अगर हमारे कर्म ईमान के बिना हैं, तो हमें जल्दी से जल्दी अल्लाह की ओर लौटना चाहिए, ताकि हमारे कर्म बेकार न जाएँ और हम आख़िरत में कामयाब हों।
📜 आयत 20-24 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 22
सूरा आल-इमरान आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यही वह (बदनसीब) लोग हैं जिनका सारा किया कराया दुनिया…सूरा आयत 22/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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