Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَنَّىٰ: कैसे, किस तरह से।
- يَمْسَسْنِي: मुझे छुआ हो, मेरे पास आया हो।
- بَشَرٌ: इंसान, यहाँ अर्थ है पति या कोई पुरुष।
- قَضَىٰ: आदेश दिया, फैसला किया, इरादा किया।
- كُن: हो जा।
व्याख्या:
जब फ़रिश्ते ने मरियम (अलैहिस्सलाम) को बशारत दी कि अल्लाह उन्हें एक पाक और नेक बेटा (ईसा अलैहिस्सलाम) प्रदान करेगा, तो मरियम ने हैरानी और आश्चर्य के साथ कहा: "ऐ मेरे रब! मेरे लिए बच्चा कैसे हो सकता है, जबकि मुझे किसी इंसान ने छुआ तक नहीं?" यानी न तो मेरा कोई पति है और न ही मैं किसी गलत रिश्ते में हूँ। यह सवाल इनकार या शक के कारण नहीं था, बल्कि यह उस स्वाभाविक आश्चर्य का इज़हार था जो किसी भी पवित्र औरत को हो सकता है, क्योंकि आम तौर पर बच्चे का जन्म पति-पत्नी के मिलन से होता है।
इस पर फ़रिश्ते ने जवाब दिया: "ऐसा ही है, अल्लाह जो चाहता है पैदा करता है।" यानी अल्लाह की कुदरत के आगे कोई चीज़ मुश्किल नहीं है। वह जब किसी चीज़ का इरादा करता है, तो उसके लिए सिर्फ़ यह कहना काफी होता है: "हो जा", और वह चीज़ तुरंत हो जाती है। यह अल्लाह की उस ताकत का बयान है जो हर कारण और हर वजह से ऊपर है। जिस तरह अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) को बिना माँ-बाप के पैदा किया, उसी तरह वह ईसा (अलैहिस्सलाम) को बिना पिता के पैदा कर सकता है। अल्लाह के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है, और यह घटना उसकी कुदरत का एक अज़ीम नमूना है।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह की कुदरत असीमित है। वह जब किसी चीज़ का इरादा करता है, तो उसके लिए सिर्फ़ "कुन" (हो जा) कहना काफी है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में कभी निराश नहीं होना चाहिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।
- मरियम (अलैहिस्सलाम) की यह दुआ और सवाल हमें सिखाता है कि इंसान को अपने रब से बात करते वक्त अदब और इज्ज़त के साथ सवाल पूछना चाहिए। वह हैरानी का इज़हार कर रही थीं, लेकिन उन्होंने "रब्बी" (ऐ मेरे रब) कहकर शुरू किया।
- यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह के लिए हर चीज़ आसान है। जब हम किसी मुश्किल में हों, तो हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह ने बिना पिता के बच्चा पैदा करके दिखाया है, तो हमारी छोटी-बड़ी हर ज़रूरत को वह आसानी से पूरा कर सकता है।
- यह आयत ईसा (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश को एक मोजिज़ा (चमत्कार) बताती है, जो अल्लाह की कुदरत का सबूत है। इससे हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह पर भरोसा रखने वाले कभी बेसहारा नहीं होते।
📜 आयत 45-49 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 47
सूरा आल-इमरान आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये सुनकर मरियम ताज्जुब से) कहने लगी परवरदिगार मुझे लड़का…सूरा आयत 47/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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