आल-इमरान · 48/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
وَيُعَلِّمُهُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَالتَّوْرَاةَ وَالْإِنجِيلَ ۝٤٨
Wa yu`allimuhul Kitaaba wal Hikmata wat Tawraata wal Injeel
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ मरयिम) ख़ुदा उसको (तमाम) किताबे आसमानी और अक्ल की बातें और (ख़ासकर) तौरेत व इन्जील सिखा देगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْكِتَابَ: यहाँ इसका अर्थ लिखने की कला (लेखन) है।
  • الْحِكْمَةَ: बात और काम में सही बात को समझना, सत्य वचन बोलना, और कार्यों में सही निर्णय लेना।
  • التَّوْرَاةَ: वह पवित्र ग्रंथ जो अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारा।
  • الإِنجِيلَ: वह पवित्र ग्रंथ जो अल्लाह ने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारा।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश और उनके मु'जिज़ात का ज़िक्र करते हुए बताता है कि वह उन्हें किताब (लिखने की कला), हिक्मत (समझदारी और सही फ़ैसले की तौफ़ीक़), तौरात (जो मूसा अलैहिस्सलाम पर उतारी गई) और इंजील (जो उन पर उतारी जाने वाली थी) सिखाएगा। यह अल्लाह की उस महान शक्ति का प्रमाण है जो वह अपने पैग़म्बरों को विशेष ज्ञान और हिक्मत से नवाज़ता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने चुने हुए बंदों को दुनियावी और दीनी इल्म दोनों देता है। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को यह सब कुछ बिना किसी सांसारिक शिक्षक के, सीधे अल्लाह की ओर से मिला। यह उनके नबुव्वत का सबूत है और उन लोगों के लिए नसीहत है जो उन्हें सिर्फ़ इंसान समझते थे।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इल्म और हिक्मत अल्लाह की बड़ी नेमत है। जिसे अल्लाह चाहता है, उसे यह नेमत देता है। हमें भी चाहिए कि अल्लाह से इल्म और समझ की दुआ करें, और उसके दिए हुए इल्म को अच्छे कामों में इस्तेमाल करें। यह भी याद रखें कि अल्लाह के पैग़म्बरों पर जो किताबें उतारी गईं, वे सब अल्लाह की तरफ़ से थीं और हमारा ईमान उन सब पर है। यही हमारी सफलता का रास्ता है — अल्लाह के सभी पैग़म्बरों पर ईमान लाना और उनकी शिक्षाओं पर अमल करना।

🎧 सुनें

📜 आयत 46-50 — आल-इमरान

46وَيُكَلِّمُ النَّاسَ فِي الْمَهْدِ وَكَهْلًا وَمِنَ الصَّالِحِينَ
और (बचपन में) जब झूले में पड़ा होगा और बड़ी उम्र का होकर (दोनों हालतों में यकसॉ) लोगों से बाते करेगा और नेको कारों में से होगा
47قَالَتْ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي وَلَدٌ وَلَمْ يَمْسَسْنِي بَشَرٌ ۖ قَالَ كَذَٰلِكِ اللَّهُ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ إِذَا قَضَىٰ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُن فَيَكُونُ
(ये सुनकर मरियम ताज्जुब से) कहने लगी परवरदिगार मुझे लड़का क्योंकर होगा हालॉकि मुझे किसी मर्द ने छुआ तक नहीं इरशाद हुआ इसी तरह ख़ुदा जो चाहता है करता है जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस कह देता है 'हो जा' तो वह हो जाता है
48وَيُعَلِّمُهُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَالتَّوْرَاةَ وَالْإِنجِيلَ
और (ऐ मरयिम) ख़ुदा उसको (तमाम) किताबे आसमानी और अक्ल की बातें और (ख़ासकर) तौरेत व इन्जील सिखा देगा
49وَرَسُولًا إِلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَنِّي قَدْ جِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ ۖ أَنِّي أَخْلُقُ لَكُم مِّنَ الطِّينِ كَهَيْئَةِ الطَّيْرِ فَأَنفُخُ فِيهِ فَيَكُونُ طَيْرًا بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُبْرِئُ الْأَكْمَهَ وَالْأَبْرَصَ وَأُحْيِي الْمَوْتَىٰ بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُنَبِّئُكُم بِمَا تَأْكُلُونَ وَمَا تَدَّخِرُونَ فِي بُيُوتِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
और बनी इसराइल का रसूल (क़रार देगा और वह उनसे यूं कहेगा कि) मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) यह निशानी लेकर आया हूं कि मैं गुंधीं हुई मिट्टी से एक परिन्दे की सूरत बनाऊॅगा फ़िर उस पर (कुछ) दम करूंगा तो वो ख़ुदा के हुक्म से उड़ने लगेगा और मैं ख़ुदा ही के हुक्म से मादरज़ाद (पैदायशी) अंधे और कोढ़ी को अच्छा करूंगा और मुर्दो को ज़िन्दा करूंगा और जो कुछ तुम खाते हो और अपने घरों में जमा करते हो मैं (सब) तुमको बता दूंगा अगर तुम ईमानदार हो तो बेशक तुम्हारे लिये इन बातों में (मेरी नबूवत की) बड़ी निशानी है
50وَمُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيَّ مِنَ التَّوْرَاةِ وَلِأُحِلَّ لَكُم بَعْضَ الَّذِي حُرِّمَ عَلَيْكُمْ ۚ وَجِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और तौरेत जो मेरे सामने मौजूद है मैं उसकी तसदीक़ करता हूं और (मेरे आने की) एक ग़रज़ यह (भी) है कि जो चीजे तुम पर हराम है उनमें से बाज़ को (हुक्मे ख़ुदा से) हलाल कर दूं और मैं तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) निशानी लेकर तुम्हारे पास आया हूं
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अनुवाद — आल-इमरान 48

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Tuesday, August 18, 2026

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