अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْكِتَابَ: यहाँ इसका अर्थ लिखने की कला (लेखन) है।
- الْحِكْمَةَ: बात और काम में सही बात को समझना, सत्य वचन बोलना, और कार्यों में सही निर्णय लेना।
- التَّوْرَاةَ: वह पवित्र ग्रंथ जो अल्लाह ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारा।
- الإِنجِيلَ: वह पवित्र ग्रंथ जो अल्लाह ने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारा।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश और उनके मु'जिज़ात का ज़िक्र करते हुए बताता है कि वह उन्हें किताब (लिखने की कला), हिक्मत (समझदारी और सही फ़ैसले की तौफ़ीक़), तौरात (जो मूसा अलैहिस्सलाम पर उतारी गई) और इंजील (जो उन पर उतारी जाने वाली थी) सिखाएगा। यह अल्लाह की उस महान शक्ति का प्रमाण है जो वह अपने पैग़म्बरों को विशेष ज्ञान और हिक्मत से नवाज़ता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने चुने हुए बंदों को दुनियावी और दीनी इल्म दोनों देता है। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को यह सब कुछ बिना किसी सांसारिक शिक्षक के, सीधे अल्लाह की ओर से मिला। यह उनके नबुव्वत का सबूत है और उन लोगों के लिए नसीहत है जो उन्हें सिर्फ़ इंसान समझते थे।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इल्म और हिक्मत अल्लाह की बड़ी नेमत है। जिसे अल्लाह चाहता है, उसे यह नेमत देता है। हमें भी चाहिए कि अल्लाह से इल्म और समझ की दुआ करें, और उसके दिए हुए इल्म को अच्छे कामों में इस्तेमाल करें। यह भी याद रखें कि अल्लाह के पैग़म्बरों पर जो किताबें उतारी गईं, वे सब अल्लाह की तरफ़ से थीं और हमारा ईमान उन सब पर है। यही हमारी सफलता का रास्ता है — अल्लाह के सभी पैग़म्बरों पर ईमान लाना और उनकी शिक्षाओं पर अमल करना।
📜 आयत 46-50 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 48
सूरा आल-इमरान आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ मरयिम) ख़ुदा उसको (तमाम) किताबे आसमानी और अक्ल…सूरा आयत 48/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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