अर-रूम · 44/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
مَن كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُ ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِأَنفُسِهِمْ يَمْهَدُونَ ۝٤٤
Man kafara fa`alaihi kufruhoo wa man `amila saalihan fali anfusihim yamhadoon
📖 हिंदी अर्थ
जो काफ़िर बन बैठा उस पर उस के कुफ्र का वबाल है और जिन्होने अच्छे काम किए वह अपने ही आसाइश का सामान कर रहें है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَن كَفَرَ – जिसने कुफ्र किया (अल्लाह और उसके दीन को नकारा)
  • فَعَلَيْهِ كُفْرُهُ – उसके कुफ्र का वबाल (बुरा परिणाम) उसी पर पड़ेगा
  • يَمْهَدُونَ – वे बिछाते हैं, तैयार करते हैं (अपने लिए जगह बनाते हैं)

तफसीर:

अल्लाह तआला इस आयत में साफ़ और स्पष्ट शब्दों में इंसान को उसके कर्मों का फल बताते हैं। जो शख्स कुफ्र करता है, यानी अल्लाह की वहदानियत (एकता) और उसके रसूल ﷺ की सच्चाई को नकारता है, तो उसके कुफ्र का नुक़सान किसी और को नहीं बल्कि उसी को होगा। उसका अंजाम जहन्नम की आग में हमेशा के लिए रहना है। अल्लाह को उसके कुफ्र से कोई नुक़सान नहीं पहुँचता, और न ही उसके ईमान से अल्लाह को कोई फ़ायदा होता है। यह सब इंसान के अपने भले और बुरे के लिए है।

दूसरी तरफ़, जो लोग नेक अमल करते हैं — यानी ईमान लाते हैं और अल्लाह की रज़ा के लिए अच्छे काम करते हैं — वे असल में अपने लिए ही जन्नत में ठिकाना तैयार कर रहे हैं। जिस तरह एक मुसाफ़िर अपने सफ़र के लिए रास्ता हमवार करता है और आराम की जगह तैयार करता है, उसी तरह नेक अमल करने वाला अपने लिए जन्नत के महल और मंज़िलें तैयार करता है। यह उसकी मेहनत और अच्छे कर्मों का फल है जो उसे हमेशा की ज़िंदगी में मिलेगा।

यह आयत हमें बड़ी प्यारी सीख देती है कि हर इंसान अपनी किस्मत खुद बनाता है। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी, समझ दी, और रास्ता दिखा दिया। अब यह हमारी मर्ज़ी है कि हम कुफ्र का रास्ता चुनें और अपने लिए आग तैयार करें, या ईमान और नेक अमल का रास्ता चुनें और अपने लिए जन्नत की नेमतें हासिल करें। अल्लाह बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है — उसने अपने बंदों पर ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि खुद बंदे अपनी जान पर ज़ुल्म करते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को नेक अमल में गुज़ारें, ताकि आख़िरत में हमारा ठिकाना जन्नत हो — जहाँ कोई ग़म नहीं, कोई दर्द नहीं, सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और खुशी है।



📜 आयत 42-46 — अर-रूम

42قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلُ ۚ كَانَ أَكْثَرُهُم مُّشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चल फिरकर देखो तो कि जो लोग उसके क़ब्ल गुज़र गए उनके (अफ़आल) का अंजाम क्या हुआ उनमें से बहुतेरे तो मुशरिक ही हैं
43فَأَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ الْقَيِّمِ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَ يَوْمٌ لَّا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللَّهِ ۖ يَوْمَئِذٍ يَصَّدَّعُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम उस दिन के आने से पहले जो खुदा की तरफ से आकर रहेगा (और) कोई उसे रोक नहीं सकता अपना रुख़ मज़बूत (और सीधे दीन की तरफ किए रहो उस दिन लोग (परेशान होकर) अलग अलग हो जाएँगें
44مَن كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُ ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِأَنفُسِهِمْ يَمْهَدُونَ
जो काफ़िर बन बैठा उस पर उस के कुफ्र का वबाल है और जिन्होने अच्छे काम किए वह अपने ही आसाइश का सामान कर रहें है
45لِيَجْزِيَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ مِن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْكَافِرِينَ
ताकि जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए उनको ख़ुदा अपने फज़ल व (करम) से अच्छी जज़ा अता करेगा वह यक़ीनन कुफ्फ़ार से उलफ़त नहीं रखता
46وَمِنْ آيَاتِهِ أَن يُرْسِلَ الرِّيَاحَ مُبَشِّرَاتٍ وَلِيُذِيقَكُم مِّن رَّحْمَتِهِ وَلِتَجْرِيَ الْفُلْكُ بِأَمْرِهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये भी है कि वह हवाओं को (बारिश) की ख़ुशख़बरी के वास्ते (क़ब्ल से) भेज दिया करता है और ताकि तुम्हें अपनी रहमत की लज्ज़त चखाए और इसलिए भी कि (इसकी बदौलत) कश्तियां उसके हुक्म से चल खड़ी हो और ताकि तुम उसके फज़ल व करम से (अपनी रोज़ी) की तलाश करो और इसलिए भी ताकि तुम शुक्र करो
अर-रूमकुरान सूची
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अनुवाद — अर-रूम 44

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Tuesday, August 18, 2026

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