Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُوتُوا الْعِلْمَ: जिन्हें ज्ञान दिया गया।
- لَبِثْتُمْ: तुम ठहरे रहे।
- فِي كِتَابِ اللَّهِ: अल्लाह के लिखे हुए (उसके पूर्व ज्ञान और फैसले) में।
- يَوْمِ الْبَعْثِ: उठाए जाने का दिन (क़ियामत)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब क़ियामत का दिन आएगा और अल्लाह तआला सभी लोगों को क़ब्रों से उठाएगा, तो मुन्किरों (इन्कार करने वालों) की हालत यह होगी कि वे समझेंगे कि वे दुनिया में बहुत कम समय रुके थे। उस समय वे झूठी क़समें खाएँगे कि हम तो केवल एक घड़ी या एक दिन ही रुके थे।
तब वे लोग, जिन्हें अल्लाह ने सच्चा ज्ञान और पक्का ईमान दिया था — चाहे वे फ़रिश्ते हों, नबी हों या नेक मोमिनीन — उन्हें जवाब देंगे और उनकी झूठी बात का खंडन करते हुए कहेंगे: "तुम अल्लाह के लिखे हुए (उसके पूर्व फैसले) में उस दिन से, जब तुम्हें पैदा किया गया, क़ियामत के दिन तक ठहरे रहे हो।" यानी तुम्हारा दुनिया में रहना, फिर क़ब्र में रहना — यह सब कुछ अल्लाह के इल्म और उसकी किताब (लौह-ए-महफ़ूज़) में लिखा हुआ था।
फिर वे कहेंगे: "तो यही वह दिन है जिसे तुम इन्कार किया करते थे।" यानी यह वही क़ियामत का दिन है जिसके आने को तुम दुनिया में झुठलाते थे और मज़ाक उड़ाते थे। अब यह दिन आ गया है और तुम इसे अपनी आँखों से देख रहे हो।
"लेकिन तुम लोग (दुनिया में) यह नहीं जानते थे" कि बा'स (दोबारा उठाया जाना) सच है और यह ज़रूर वाक़्य होने वाला है। तुम्हारी नादानी और अज्ञानता की वजह से तुमने इस पर ईमान नहीं लाया और इसका इन्कार किया। अगर तुम जानते होते, तो ईमान लाते और अच्छे कर्म करते।
दावती पहलू (उपदेशात्मक पहलू):
यह आयत हमें बताती है कि क़ियामत का दिन अटल सत्य है। जो लोग आज इस पर शक करते हैं या इसे भूलकर दुनिया में मशगूल रहते हैं, वे उस दिन पछताएँगे। लेकिन अल्लाह ने जिन्हें सच्चा ज्ञान और ईमान दिया, वे उस दिन सबसे बेहतर हालत में होंगे। हमें चाहिए कि हम इस दुनिया को आख़िरत की खेती समझें, क़ियामत पर पक्का यक़ीन रखें और अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें। यही वह रास्ता है जो हमें उस दिन की शर्मिंदगी से बचाएगा और हमें जन्नत की तरफ ले जाएगा। अल्लाह हम सबको सच्चा ज्ञान और पक्का ईमान अता करे। आमीन।
📜 आयत 54-58 — सूरा अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 56
सूरा अर-रूम आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों को (ख़ुदा की बारगाह से) इल्म और…सूरा आयत 56/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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