अर-रूम · 56/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَقَالَ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ وَالْإِيمَانَ لَقَدْ لَبِثْتُمْ فِي كِتَابِ اللَّهِ إِلَىٰ يَوْمِ الْبَعْثِ ۖ فَهَٰذَا يَوْمُ الْبَعْثِ وَلَٰكِنَّكُمْ كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ ۝٥٦
Wa qaalal lazeena ootul `ilma wal eemaana laqad labistum fee kitaabil laahi ilaa yawmil ba`si fahaazaa yawmul ba`si wa laakinnakum kuntum laa ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों को (ख़ुदा की बारगाह से) इल्म और ईमान दिया गया है जवाब देगें कि (हाए) तुम तो ख़ुदा की किताब के मुताबिक़ रोज़े क़यामत तक (बराबर) ठहरे रहे फिर ये तो क़यामत का ही दिन है मगर तुम लोग तो उसका यक़ीन ही न रखते थे

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُوتُوا الْعِلْمَ: जिन्हें ज्ञान दिया गया।
  • لَبِثْتُمْ: तुम ठहरे रहे।
  • فِي كِتَابِ اللَّهِ: अल्लाह के लिखे हुए (उसके पूर्व ज्ञान और फैसले) में।
  • يَوْمِ الْبَعْثِ: उठाए जाने का दिन (क़ियामत)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब क़ियामत का दिन आएगा और अल्लाह तआला सभी लोगों को क़ब्रों से उठाएगा, तो मुन्किरों (इन्कार करने वालों) की हालत यह होगी कि वे समझेंगे कि वे दुनिया में बहुत कम समय रुके थे। उस समय वे झूठी क़समें खाएँगे कि हम तो केवल एक घड़ी या एक दिन ही रुके थे।

तब वे लोग, जिन्हें अल्लाह ने सच्चा ज्ञान और पक्का ईमान दिया था — चाहे वे फ़रिश्ते हों, नबी हों या नेक मोमिनीन — उन्हें जवाब देंगे और उनकी झूठी बात का खंडन करते हुए कहेंगे: "तुम अल्लाह के लिखे हुए (उसके पूर्व फैसले) में उस दिन से, जब तुम्हें पैदा किया गया, क़ियामत के दिन तक ठहरे रहे हो।" यानी तुम्हारा दुनिया में रहना, फिर क़ब्र में रहना — यह सब कुछ अल्लाह के इल्म और उसकी किताब (लौह-ए-महफ़ूज़) में लिखा हुआ था।

फिर वे कहेंगे: "तो यही वह दिन है जिसे तुम इन्कार किया करते थे।" यानी यह वही क़ियामत का दिन है जिसके आने को तुम दुनिया में झुठलाते थे और मज़ाक उड़ाते थे। अब यह दिन आ गया है और तुम इसे अपनी आँखों से देख रहे हो।

"लेकिन तुम लोग (दुनिया में) यह नहीं जानते थे" कि बा'स (दोबारा उठाया जाना) सच है और यह ज़रूर वाक़्य होने वाला है। तुम्हारी नादानी और अज्ञानता की वजह से तुमने इस पर ईमान नहीं लाया और इसका इन्कार किया। अगर तुम जानते होते, तो ईमान लाते और अच्छे कर्म करते।

दावती पहलू (उपदेशात्मक पहलू):

यह आयत हमें बताती है कि क़ियामत का दिन अटल सत्य है। जो लोग आज इस पर शक करते हैं या इसे भूलकर दुनिया में मशगूल रहते हैं, वे उस दिन पछताएँगे। लेकिन अल्लाह ने जिन्हें सच्चा ज्ञान और ईमान दिया, वे उस दिन सबसे बेहतर हालत में होंगे। हमें चाहिए कि हम इस दुनिया को आख़िरत की खेती समझें, क़ियामत पर पक्का यक़ीन रखें और अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें। यही वह रास्ता है जो हमें उस दिन की शर्मिंदगी से बचाएगा और हमें जन्नत की तरफ ले जाएगा। अल्लाह हम सबको सच्चा ज्ञान और पक्का ईमान अता करे। आमीन।



📜 आयत 54-58 — अर-रूम

54۞ اللَّهُ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن ضَعْفٍ ثُمَّ جَعَلَ مِن بَعْدِ ضَعْفٍ قُوَّةً ثُمَّ جَعَلَ مِن بَعْدِ قُوَّةٍ ضَعْفًا وَشَيْبَةً ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۖ وَهُوَ الْعَلِيمُ الْقَدِيرُ
खुदा ही तो है जिसने तुम्हें (एक निहायत) कमज़ोर चीज़ (नुत्फे) से पैदा किया फिर उसी ने (तुम में) बचपने की कमज़ोरी के बाद (शबाब की) क़ूवत अता की फिर उसी ने (तुममें जवानी की) क़ूवत के बाद कमज़ोरी और बुढ़ापा पैदा कर दिया वह जो चाहता पैदा करता है-और वही बड़ा वाकिफकार और (हर चीज़ पर) क़ाबू रखता है
55وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يُقْسِمُ الْمُجْرِمُونَ مَا لَبِثُوا غَيْرَ سَاعَةٍ ۚ كَذَٰلِكَ كَانُوا يُؤْفَكُونَ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी तो गुनाहगार लोग कसमें खाएँगें कि वह (दुनिया में) घड़ी भर से ज्यादा नहीं ठहरे यूँ ही लोग (दुनिया में भी) इफ़तेरा परदाज़ियाँ करते रहे
56وَقَالَ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ وَالْإِيمَانَ لَقَدْ لَبِثْتُمْ فِي كِتَابِ اللَّهِ إِلَىٰ يَوْمِ الْبَعْثِ ۖ فَهَٰذَا يَوْمُ الْبَعْثِ وَلَٰكِنَّكُمْ كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
और जिन लोगों को (ख़ुदा की बारगाह से) इल्म और ईमान दिया गया है जवाब देगें कि (हाए) तुम तो ख़ुदा की किताब के मुताबिक़ रोज़े क़यामत तक (बराबर) ठहरे रहे फिर ये तो क़यामत का ही दिन है मगर तुम लोग तो उसका यक़ीन ही न रखते थे
57فَيَوْمَئِذٍ لَّا يَنفَعُ الَّذِينَ ظَلَمُوا مَعْذِرَتُهُمْ وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
तो उस दिन सरकश लोगों को न उनकी उज्र माअज़ेरत कुछ काम आएगी और न उनकी सुनवाई होगी
58وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَلَئِن جِئْتَهُم بِآيَةٍ لَّيَقُولَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُبْطِلُونَ
और हमने तो इस कुरान में (लोगों के समझाने को) हर तरह की मिसल बयान कर दी और अगर तुम उनके पास कोई सा मौजिज़ा ले आओ
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीRevelation
56आयत

अनुवाद — अर-रूम 56

सूरा अर-रूम आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों को (ख़ुदा की बारगाह से) इल्म और…

सूरा आयत 56/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए