अस-सजदा · 11/30
अनुवाद उच्चारण — अस-सजदा
۞ قُلْ يَتَوَفَّاكُم مَّلَكُ الْمَوْتِ الَّذِي وُكِّلَ بِكُمْ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ ۝١١
Qul yatawaffaakum malakul mawtil lazee wukkila bikum Thumma ilaa rabbikum turja`oon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मल्कुलमौत जो तुम्हारे ऊपर तैनात है वही तुम्हारी रुहें क़ब्ज़ करेगा उसके बाद तुम सबके सब अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे

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अनुवाद — Tafsir

(क़ुल) कह दीजिए, “तुम्हें मौत का फ़रिश्ता (मलकुल मौत) वफ़ात देता है जो तुम पर मुक़र्रर किया गया है, फिर तुम अपने रब की तरफ़ लौटाए जाओगे।”

शब्दों के अर्थ:

  • يَتَوَفَّاكُم (यतवफ़्फ़ाकुम): तुम्हारी रूहें क़ब्ज़ करता है, यानी तुम्हें मौत देता है।
  • مَّلَكُ الْمَوْتِ (मलकुल मौत): मौत का फ़रिश्ता, जिसे अज़राईल के नाम से भी जाना जाता है।
  • وُكِّلَ بِكُمْ (वुक्किला बिकुम): तुम पर मुक़र्रर किया गया है, यानी उसे तुम्हारी रूहें क़ब्ज़ करने का ज़िम्मा दिया गया है।
  • تُرْجَعُونَ (तुरजऊन): लौटाए जाओगे, वापस किए जाओगे।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए जो मौत के बाद दोबारा जी उठने का इनकार करते हैं — “तुम्हें मौत का फ़रिश्ता वफ़ात देता है, जो तुम्हारी रूहें क़ब्ज़ करने पर मुक़र्रर है। जब तुम्हारी अजल (मौत का वक़्त) पूरी हो जाती है, तो वह तुम्हारी रूह क़ब्ज़ कर लेता है, और इसमें एक लम्हे की भी देर या तेज़ी नहीं होती। फिर तुम सब अपने रब की तरफ़ लौटाए जाओगे — यानी मरने के बाद क़यामत के दिन तुम दोबारा ज़िंदा किए जाओगे और अपने अमलों का हिसाब दोगे। अगर तुम्हारे अमल अच्छे होंगे तो अच्छा बदला मिलेगा, और अगर बुरे होंगे तो बुरा अंजाम भुगतना होगा।”

यह आयत हमें याद दिलाती है कि मौत कोई इत्तेफ़ाक़ या हादसा नहीं है, बल्कि यह अल्लाह तआला के मुक़र्रर किए हुए फ़रिश्ते के ज़रिए एक नियत और मुक़म्मल इंतज़ाम है। हर इंसान की रूह एक मुक़र्रर वक़्त पर क़ब्ज़ की जाती है, और यह सिलसिला क़यामत तक जारी रहेगा। इसके बाद सबको अपने रब की तरफ़ पलटना है — यही हमारा आख़िरी पड़ाव है। जिसे यह यक़ीन हो जाए कि उसे अपने रब के सामने हाज़िर होना है और अपने हर अमल का हिसाब देना है, वह कभी ग़ाफ़िल नहीं रह सकता, और न ही वह अल्लाह की नाफ़रमानी में मशरूफ़ रह सकता है। यह आयत हमें मौत की तैयारी की तरग़ीब देती है — कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारें, ताकि जब हम अपने रब की तरफ़ लौटें तो हमारा इस्तक़बाल रहमत और मग़फ़िरत से हो। याद रखिए, मौत की कोई मोहलत नहीं है, और हर साँस हमें उस मुलाक़ात के क़रीब ले जा रही है।



📜 आयत 9-13 — अस-सजदा

9ثُمَّ سَوَّاهُ وَنَفَخَ فِيهِ مِن رُّوحِهِ ۖ وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَالْأَفْئِدَةَ ۚ قَلِيلًا مَّا تَشْكُرُونَ
फिर उस (के पुतले) को दुरुस्त किया और उसमें अपनी तरफ से रुह फूँकी और तुम लोगों के (सुनने के) लिए कान और (देखने के लिए) ऑंखें और (समझने के लिए) दिल बनाएँ (इस पर भी) तुम लोग बहुत कम शुक्र करते हो
10وَقَالُوا أَإِذَا ضَلَلْنَا فِي الْأَرْضِ أَإِنَّا لَفِي خَلْقٍ جَدِيدٍ ۚ بَلْ هُم بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ كَافِرُونَ
और ये लोग कहते हैं कि जब हम ज़मीन में नापैद हो जाएँगे तो क्या हम फिर नया जन्म लेगे (क़यामत से नही) बल्कि ये लोग अपने परवरदिगार के (सामने हुज़ूरी ही) से इन्कार रखते हैं
11۞ قُلْ يَتَوَفَّاكُم مَّلَكُ الْمَوْتِ الَّذِي وُكِّلَ بِكُمْ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मल्कुलमौत जो तुम्हारे ऊपर तैनात है वही तुम्हारी रुहें क़ब्ज़ करेगा उसके बाद तुम सबके सब अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे
12وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الْمُجْرِمُونَ نَاكِسُو رُءُوسِهِمْ عِندَ رَبِّهِمْ رَبَّنَا أَبْصَرْنَا وَسَمِعْنَا فَارْجِعْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا إِنَّا مُوقِنُونَ
और (ऐ रसूल) तुम को बहुत अफसोस होगा अगर तुम मुजरिमों को देखोगे कि वह (हिसाब के वक्त) अपने परवरदिगार की बारगाह में अपने सर झुकाए खड़े हैं और(अर्ज़ कर रहे हैं) परवरदिगार हमने (अच्छी तरह देखा और सुन लिया तू हमें दुनिया में एक दफा फिर लौटा दे कि हम नेक काम करें
13وَلَوْ شِئْنَا لَآتَيْنَا كُلَّ نَفْسٍ هُدَاهَا وَلَٰكِنْ حَقَّ الْقَوْلُ مِنِّي لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
और अब तो हमको (क़यामत का)े पूरा पूरा यक़ीन है और (ख़ुदा फरमाएगा कि) अगर हम चाहते तो दुनिया ही में हर शख़्श को (मजबूर करके) राहे रास्त पर ले आते मगर मेरी तरफ से (रोजे अज़ा) ये बात क़रार पा चुकी है कि मै जहन्नुम को जिन्नात और आदमियों से भर दूँगा
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अनुवाद — अस-सजदा 11

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Tuesday, August 18, 2026

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