अस-सजदा · 10/30
अनुवाद उच्चारण — अस-सजदा
وَقَالُوا أَإِذَا ضَلَلْنَا فِي الْأَرْضِ أَإِنَّا لَفِي خَلْقٍ جَدِيدٍ ۚ بَلْ هُم بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ كَافِرُونَ ۝١٠
Wa qaalooo `a-izaa dalalnaa fil ardi `a-innaa lafee khalqin jadeed; bal hum biliqaaa`i rabbihim kaafirroon
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग कहते हैं कि जब हम ज़मीन में नापैद हो जाएँगे तो क्या हम फिर नया जन्म लेगे (क़यामत से नही) बल्कि ये लोग अपने परवरदिगार के (सामने हुज़ूरी ही) से इन्कार रखते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَلَلْنَا فِي الْأَرْضِ: हम धरती में खो गए, यानी मरकर मिट्टी में मिल गए, हमारा शरीर ज़मीन में गायब हो गया।
  • خَلْقٍ جَدِيدٍ: नई सृष्टि, दोबारा पैदा होना, नया जीवन।
  • بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ: अपने रब से मिलने का, यानी क़ियामत के दिन उठाए जाने और हिसाब के लिए हाज़िर होने का।
  • كَافِرُونَ: इनकार करने वाले, न मानने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबी ﷺ लोगों को मौत के बाद दोबारा जीवित होने और क़ियामत के दिन की ख़बर देते थे, तो मक्का के मुशरिकीन (बुतपरस्त) अजीब अंदाज़ में हैरानी और मज़ाक़िया लहजे में कहते थे: "क्या जब हम मरकर धरती में मिट्टी हो जाएँगे, हड्डियाँ और गोश्त ज़मीन में गायब हो जाएँगे, तो क्या हमें दोबारा नई सृष्टि में पैदा किया जाएगा?" वे इस बात को नामुमकिन समझते थे और उसे दूर की कौड़ी कहकर उड़ा देते थे।

उनका यह कहना सिर्फ़ हैरानी या सवाल नहीं था, बल्कि असल में वे अपने रब से मिलने, हिसाब-किताब और जज़ा-सज़ा के दिन को ही नहीं मानते थे। उनके दिलों में आख़िरत का यक़ीन नहीं था, इसलिए वे इस तरह की बातें करते थे। अल्लाह तआला ने उनके इस रवैये का जवाब देते हुए फ़रमाया: "बल्कि वे अपने रब से मिलने के इनकारी हैं।" यानी असल मसला उनका शक या हैरानी नहीं है, बल्कि उनका कुफ़्र और सरकशी है। वे जानबूझकर सच्चाई से मुँह मोड़ रहे हैं, क्योंकि अगर वे सच में सवाल पूछ रहे होते, तो उन्हें जवाब मिल जाता। लेकिन उनका उद्देश्य सिर्फ़ इनकार और मज़ाक़ था।


दावती पहलू (नसीहत):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि जिस रब ने हमें पहली बार पैदा किया, वही हमें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है। जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया, उसके लिए हमारा दोबारा जीवित करना बिल्कुल आसान है। यही वह यक़ीन है जो इंसान को अमल की तरफ़ ले जाता है। जो शख्स यक़ीन रखता है कि उसे एक दिन अपने रब के सामने हाज़िर होना है, वह कभी गुनाहों में डूबा नहीं रह सकता, और न ही ज़ुल्म कर सकता है।

आओ, हम अपने दिलों में आख़िरत का यक़ीन मज़बूत करें, क़ुरआन की इन आयतों पर ग़ौर करें, और अपनी ज़िंदगी को इस तरह गुज़ारें कि जब हम अपने रब से मिलें, तो हमारा चेहरा रोशन हो, और हमें जन्नत की ख़ुशख़बरी मिले। याद रखिए, यह दुनिया कुछ दिनों की है, लेकिन आख़िरत हमेशा की ज़िंदगी है। उस दिन की तैयारी आज ही कर लीजिए, क्योंकि कल का पता नहीं। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 8-12 — अस-सजदा

8ثُمَّ جَعَلَ نَسْلَهُ مِن سُلَالَةٍ مِّن مَّاءٍ مَّهِينٍ
उसकी नस्ल (इन्सानी जिस्म के) खुलासा यानी (नुत्फे के से) ज़लील पानी से बनाई
9ثُمَّ سَوَّاهُ وَنَفَخَ فِيهِ مِن رُّوحِهِ ۖ وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَالْأَفْئِدَةَ ۚ قَلِيلًا مَّا تَشْكُرُونَ
फिर उस (के पुतले) को दुरुस्त किया और उसमें अपनी तरफ से रुह फूँकी और तुम लोगों के (सुनने के) लिए कान और (देखने के लिए) ऑंखें और (समझने के लिए) दिल बनाएँ (इस पर भी) तुम लोग बहुत कम शुक्र करते हो
10وَقَالُوا أَإِذَا ضَلَلْنَا فِي الْأَرْضِ أَإِنَّا لَفِي خَلْقٍ جَدِيدٍ ۚ بَلْ هُم بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ كَافِرُونَ
और ये लोग कहते हैं कि जब हम ज़मीन में नापैद हो जाएँगे तो क्या हम फिर नया जन्म लेगे (क़यामत से नही) बल्कि ये लोग अपने परवरदिगार के (सामने हुज़ूरी ही) से इन्कार रखते हैं
11۞ قُلْ يَتَوَفَّاكُم مَّلَكُ الْمَوْتِ الَّذِي وُكِّلَ بِكُمْ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मल्कुलमौत जो तुम्हारे ऊपर तैनात है वही तुम्हारी रुहें क़ब्ज़ करेगा उसके बाद तुम सबके सब अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे
12وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الْمُجْرِمُونَ نَاكِسُو رُءُوسِهِمْ عِندَ رَبِّهِمْ رَبَّنَا أَبْصَرْنَا وَسَمِعْنَا فَارْجِعْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا إِنَّا مُوقِنُونَ
और (ऐ रसूल) तुम को बहुत अफसोस होगा अगर तुम मुजरिमों को देखोगे कि वह (हिसाब के वक्त) अपने परवरदिगार की बारगाह में अपने सर झुकाए खड़े हैं और(अर्ज़ कर रहे हैं) परवरदिगार हमने (अच्छी तरह देखा और सुन लिया तू हमें दुनिया में एक दफा फिर लौटा दे कि हम नेक काम करें
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Tuesday, August 18, 2026

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