सबा · 36/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
قُلْ إِنَّ رَبِّي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ۝٣٦
Qul inna Rabbee yabsutur rizqa limai yashaaa`u wa yaqdiru wa laakinna aksaran naasi laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिऐ चाहता है) तंग करता है मगर बहुतेरे लोग नहीं जानते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَبْسُطُ الرِّزْقَ: रिज़्क़ (आजीविका) को विस्तृत करना, खोल देना।
  • وَيَقْدِرُ: तंग करना, सीमित कर देना।
  • لِمَن يَشَاءُ: जिसके लिए वह चाहे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन घमंडी लोगों से कह दीजिए जो अपने धन-दौलत और ऐशो-आराम के साधनों पर इतराते हैं और समझते हैं कि यह सब उनकी योग्यता या अल्लाह की विशेष मुहब्बत की वजह से है, कि मेरा रब जिसे चाहता है उसे विस्तृत आजीविका (रिज़्क़) प्रदान करता है और जिसे चाहता है उसकी आजीविका तंग कर देता है। यह न तो उसकी मुहब्बत का सबूत है और न नफ़रत का, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक इम्तिहान (परीक्षा) है। वह धनवान को इसलिए देता है कि देखे वह शुक्र करता है या कुफ़्रान (नाशुक्री) करता है, और निर्धन को इसलिए तंगी देता है कि देखे वह सब्र करता है या बेसब्री और शिकायत करता है। यह सब कुछ अल्लाह की गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) के अनुसार होता है — कभी वह किसी को दुनिया देकर उसे आज़माता है, और कभी किसी से दुनिया छीनकर उसे परखता है। कभी-कभी अल्लाह किसी को धन देता है लेकिन यह उसके करीब होने का सबूत नहीं होता, बल्कि यह उसके लिए ढील (इस्तिद्राज) होती है, ताकि वह और गुमराह होता जाए।

लेकिन अधिकतर लोग इस हक़ीक़त को नहीं जानते, क्योंकि वे ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं करते। वे सिर्फ़ ज़ाहिरी चीज़ों को देखकर भ्रम में पड़ जाते हैं — धनवान को देखकर समझते हैं कि अल्लाह उससे खुश है, और निर्धन को देखकर समझते हैं कि अल्लाह उससे नाराज़ है। हालाँकि हक़ीक़त इसके उलट होती है। अल्लाह ने दुनिया को आख़िरत का खेत बनाया है, और यहाँ की परीक्षा ही असली कसौटी है।

तो ऐ बंदे! तू अपने रब की रहमत और उसकी हिकमत पर भरोसा रख। अगर तुझे तंगी मिले तो सब्र कर, क्योंकि यह भी इम्तिहान है। और अगर तुझे कुशादगी मिले तो शुक्र कर, क्योंकि यह भी आज़माइश है। याद रख, असली कामयाबी दुनिया की दौलत में नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा में है। जो शख्स इन बातों को समझ ले, वह कभी दुनिया के झूठे दिखावे से धोखा नहीं खाता और न ही तंगी से घबराता है, क्योंकि उसे यक़ीन होता है कि उसका रब हर हाल में बेहतर जानता है।



📜 आयत 34-38 — सबा

34وَمَا أَرْسَلْنَا فِي قَرْيَةٍ مِّن نَّذِيرٍ إِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَا إِنَّا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ كَافِرُونَ
और हमने किसी बस्ती में कोई डराने वाला पैग़म्बर नहीं भेजा मगर वहाँ के लोग ये ज़रूर बोल उठेंगे कि जो एहकाम देकर तुम भेजे गए हो हम उनको नहीं मानते
35وَقَالُوا نَحْنُ أَكْثَرُ أَمْوَالًا وَأَوْلَادًا وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ
और ये भी कहने लगे कि हम तो (ईमानदारों से) माल और औलाद में कहीं ज्यादा है और हम पर आख़ेरत में (अज़ाब) भी नहीं किया जाएगा
36قُلْ إِنَّ رَبِّي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिऐ चाहता है) तंग करता है मगर बहुतेरे लोग नहीं जानते हैं
37وَمَا أَمْوَالُكُمْ وَلَا أَوْلَادُكُم بِالَّتِي تُقَرِّبُكُمْ عِندَنَا زُلْفَىٰ إِلَّا مَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ لَهُمْ جَزَاءُ الضِّعْفِ بِمَا عَمِلُوا وَهُمْ فِي الْغُرُفَاتِ آمِنُونَ
और (याद रखो) तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद की ये हस्ती नहीं कि तुम को हमारी बारगाह में मुक़र्रिब बना दें मगर (हाँ) जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए उन लोगों के लिए तो उनकी कारगुज़ारियों की दोहरी जज़ा है और वह लोग (बेहश्त के) झरोखों में इत्मेनान से रहेंगे
38وَالَّذِينَ يَسْعَوْنَ فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ
और जो लोग हमारी आयतों (की तोड़) में मुक़ाबले की नीयत से दौड़ द्दूप करते हैं वही लोग (जहन्नुम के) अज़ाब में झोक दिए जाएॅगे
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अनुवाद — सबा 36

सूरा सबा आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार जिसके लिए…

सूरा आयत 36/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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