सबा · 35/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
وَقَالُوا نَحْنُ أَكْثَرُ أَمْوَالًا وَأَوْلَادًا وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ ۝٣٥
Wa qaaloo nahnu aksaru amwaalanw wa awlaadanw wa maa nahnu bimu `azzabeen
📖 हिंदी अर्थ
और ये भी कहने लगे कि हम तो (ईमानदारों से) माल और औलाद में कहीं ज्यादा है और हम पर आख़ेरत में (अज़ाब) भी नहीं किया जाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَكْثَرُ أَمْوَالًا وَأَوْلَادًا: अधिक धन-दौलत और संतान वाले।
  • بِمُعَذَّبِينَ: यातना दिए जाने वाले (अज़ाब में डाले जाने वाले)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन काफ़िरों और अमीर-ओ-ज़ाहिद लोगों का ज़िक्र कर रहे हैं, जो अपने धन-दौलत और बच्चों की बहुतायत पर इतराते थे और ग़रीब मुसलमानों से कहते थे: "हम तुमसे ज़्यादा अमीर हैं, हमारे पास ज़्यादा माल है, ज़्यादा बच्चे हैं। यह इस बात का सबूत है कि अल्लाह हमसे खुश है और हमें प्यार करता है। अगर अल्लाह हमें अज़ाब देता, तो हमें यह सब न देता। हम कभी भी अज़ाब में नहीं डाले जाएँगे – न दुनिया में और न आख़िरत में।"

यह उनकी बड़ी भूल और अहंकार था। उन्होंने दुनिया की चमक-दमक को अल्लाह की रज़ामंदी का पैमाना समझ लिया, जबकि अल्लाह तआला दुनिया में नेक और बद दोनों को रिज़्क़ देता है। धन और संतान अल्लाह की रहमत भी हो सकते हैं और इम्तिहान (परीक्षा) का ज़रिया भी। क़ुरआन में अल्लाह ने साफ़ फ़रमाया है कि यह माल और औलाद तो महज़ दुनिया की ज़ीनत है, और असली कामयाबी उसी की है जो नेक अमल करे।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि हमें दुनिया के ऐशो-आराम पर नाज़ नहीं करना चाहिए, न ही इसे अपनी बुराइयों का बहाना बनाना चाहिए। अल्लाह की नेअमतें शुक्र और इबादत का मौक़ा देती हैं, न कि घमंड और सरकशी का। जो लोग अपनी दौलत और औलाद पर इतराते हैं, वह भूल जाते हैं कि यह सब कुछ एक दिन ख़त्म होने वाला है, और असली हिसाब आख़िरत में होगा। अल्लाह तआला इंसाफ़ करने वाला है, और उसके हुक्म के आगे किसी की दौलत या औलाद काम नहीं आएगी।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी नेअमतों को अल्लाह की तरफ़ से इम्तिहान समझें, शुक्र अदा करें, ग़रीबों की मदद करें और अपने आख़िरत के सफ़र के लिए नेक अमल इकट्ठा करें। याद रखें, अल्लाह के पास जो कुछ है वह बेहतर और बाक़ी रहने वाला है, और उसी की रज़ा ही असली कामयाबी है।



📜 आयत 33-37 — सूरा सबा

33وَقَالَ الَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا بَلْ مَكْرُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ إِذْ تَأْمُرُونَنَا أَن نَّكْفُرَ بِاللَّهِ وَنَجْعَلَ لَهُ أَندَادًا ۚ وَأَسَرُّوا النَّدَامَةَ لَمَّا رَأَوُا الْعَذَابَ وَجَعَلْنَا الْأَغْلَالَ فِي أَعْنَاقِ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ هَلْ يُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और कमज़ोर लोग बड़े लोगों से कहेंगे (कि ज़बरदस्ती तो नहीं की मगर हम खुद भी गुमराह नहीं हुए) बल्कि (तुम्हारी) रात-दिन की फरेबदेही ने (गुमराह किया कि) तुम लोग हमको खुदा न मानने और उसका शरीक ठहराने का बराबर हुक्म देते रहे (तो हम क्या करते) और जब ये लोग अज़ाब को (अपनी ऑंखों से) देख लेंगे तो दिल ही दिल में पछताएँगे और जो लोग काफिर हो बैठे हम उनकी गर्दनों में तौक़ डाल देंगे जो कारस्तानियां ये लोग (दुनिया में) करते थे उसी के मुवाफिक़ तो सज़ा दी जाएगी
34وَمَا أَرْسَلْنَا فِي قَرْيَةٍ مِّن نَّذِيرٍ إِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَا إِنَّا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ كَافِرُونَ
और हमने किसी बस्ती में कोई डराने वाला पैग़म्बर नहीं भेजा मगर वहाँ के लोग ये ज़रूर बोल उठेंगे कि जो एहकाम देकर तुम भेजे गए हो हम उनको नहीं मानते
35وَقَالُوا نَحْنُ أَكْثَرُ أَمْوَالًا وَأَوْلَادًا وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ
और ये भी कहने लगे कि हम तो (ईमानदारों से) माल और औलाद में कहीं ज्यादा है और हम पर आख़ेरत में (अज़ाब) भी नहीं किया जाएगा
36قُلْ إِنَّ رَبِّي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिऐ चाहता है) तंग करता है मगर बहुतेरे लोग नहीं जानते हैं
37وَمَا أَمْوَالُكُمْ وَلَا أَوْلَادُكُم بِالَّتِي تُقَرِّبُكُمْ عِندَنَا زُلْفَىٰ إِلَّا مَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَأُولَٰئِكَ لَهُمْ جَزَاءُ الضِّعْفِ بِمَا عَمِلُوا وَهُمْ فِي الْغُرُفَاتِ آمِنُونَ
और (याद रखो) तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद की ये हस्ती नहीं कि तुम को हमारी बारगाह में मुक़र्रिब बना दें मगर (हाँ) जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए उन लोगों के लिए तो उनकी कारगुज़ारियों की दोहरी जज़ा है और वह लोग (बेहश्त के) झरोखों में इत्मेनान से रहेंगे
सबाकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — सबा 35

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सूरा आयत 35/54 — सूरा सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा सबा सुनें, सूरा सबा अनुवाद, सूरा सबा mp3, सूरा सबा pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.





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Wednesday, September 30, 2026

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