सबा · 48/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
قُلْ إِنَّ رَبِّي يَقْذِفُ بِالْحَقِّ عَلَّامُ الْغُيُوبِ ۝٤٨
Qul inna Rabbee yaqzifu bilhaqq `Allaamul Ghuyoob
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि मेरा बड़ा गैबवाँ परवरदिगार (मेरे दिल में) दीन हक़ को बराबर ऊपर से उतारता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَقْذِفُ بِالْحَقِّ: सत्य को (बातिल पर) डालता है, अर्थात सत्य को प्रस्तुत करके असत्य को मिटा देता है।
  • عَلَّامُ الْغُيُوبِ: छिपी हुई चीज़ों का पूर्ण ज्ञान रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन लोगों से कह दीजिए जो तौहीद (एकेश्वरवाद) और इस्लाम के संदेश को नकारते हैं: "मेरा रब सत्य को असत्य पर डालता है, अर्थात वह सत्य के प्रबल प्रमाणों और हुज्जतों के माध्यम से बातिल (झूठ) को परास्त कर देता है, उसे बेनक़ाब कर देता है और उसका सत्यानाश कर देता है।" यह सत्य वही वही (प्रकाशना) और क़ुरआन की आयतें हैं, जो हर युग में सत्य को स्थापित करती हैं और असत्य को मिटा देती हैं। अल्लाह तआला छिपी हुई चीज़ों का पूर्ण ज्ञान रखने वाला है; आसमानों और ज़मीन की कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है, और न ही उसके बंदों के कोई कर्म उससे ओझल हैं। वह सब कुछ जानता है और उसके ज्ञान की कोई सीमा नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत मोमिन के दिल को सुकून और इत्मिनान देती है कि सत्य की जीत अल्लाह के हाथ में है। चाहे बातिल (असत्य) कितना भी शक्तिशाली क्यों न दिखे, अल्लाह उसे सत्य के हथियार से ज़रूर मिटा देगा। यह हमारे लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब हर छिपी चीज़ का जानने वाला है; वह हमारी नीयतों, हमारी मेहनत और हमारी कुर्बानियों को देखता है। जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमारे साथ है और वह सत्य को स्थापित करने वाला है, तो हमारे दिलों में हिम्मत और साहस पैदा होता है। हमें चाहिए कि हम सत्य को अपनाएँ, उस पर साबित क़दम रहें, और यह विश्वास रखें कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी, क्योंकि वही सबसे बड़ा जानने वाला और सबसे शक्तिशाली है। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है — सत्य का साथ देना और अल्लाह पर भरोसा रखना।



📜 आयत 46-50 — सूरा सबा

46۞ قُلْ إِنَّمَا أَعِظُكُم بِوَاحِدَةٍ ۖ أَن تَقُومُوا لِلَّهِ مَثْنَىٰ وَفُرَادَىٰ ثُمَّ تَتَفَكَّرُوا ۚ مَا بِصَاحِبِكُم مِّن جِنَّةٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا نَذِيرٌ لَّكُم بَيْنَ يَدَيْ عَذَابٍ شَدِيدٍ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तुमसे नसीहत की बस एक बात कहता हूँ (वह) ये (है) कि तुम लोग बाज़ खुदा के वास्ते एक-एक और दो-दो उठ खड़े हो और अच्छी तरह ग़ौर करो तो (देख लोगे कि) तुम्हारे रफीक़ (मोहम्मद स0) को किसी तरह का जुनून नहीं वह तो बस तुम्हें एक सख्त अज़ाब (क़यामत) के सामने (आने) से डराने वाला है
47قُلْ مَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍ فَهُوَ لَكُمْ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
(ऐ रसूल) तुम (ये भी) कह दो कि (तबलीख़े रिसालत की) मैंने तुमसे कुछ उजरत माँगी हो तो वह तुम्हीं को (मुबारक) हो मेरी उजरत तो बस खुदा पर है और वही (तुम्हारे आमाल अफआल) हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
48قُلْ إِنَّ رَبِّي يَقْذِفُ بِالْحَقِّ عَلَّامُ الْغُيُوبِ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि मेरा बड़ा गैबवाँ परवरदिगार (मेरे दिल में) दीन हक़ को बराबर ऊपर से उतारता है
49قُلْ جَاءَ الْحَقُّ وَمَا يُبْدِئُ الْبَاطِلُ وَمَا يُعِيدُ
(अब उनसे) कह दो दीने हक़ आ गया और इतना तो भी (समझो की) बातिल (माबूद) शुरू-शुरू कुछ पैदा करता है न (मरने के बाद) दोबारा ज़िन्दा कर सकता है
50قُلْ إِن ضَلَلْتُ فَإِنَّمَا أَضِلُّ عَلَىٰ نَفْسِي ۖ وَإِنِ اهْتَدَيْتُ فَبِمَا يُوحِي إِلَيَّ رَبِّي ۚ إِنَّهُ سَمِيعٌ قَرِيبٌ
(ऐ रसूल) तुम ये भी कह दो कि अगर मैं गुमराह हो गया हूँ तो अपनी ही जान पर मेरी गुमराही (का वबाल) है और अगर मैं राहे रास्त पर हूँ तो इस ''वही'' के तुफ़ैल से जो मेरा परवरदिगार मेरी तरफ़ भेजता है बेशक वह सुनने वाला (और बहुत) क़रीब है
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अनुवाद — सबा 48

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Monday, September 7, 2026

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