यासीन · 15/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
قَالُوا مَا أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا وَمَا أَنزَلَ الرَّحْمَٰنُ مِن شَيْءٍ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَكْذِبُونَ ۝١٥
Qaaloo maaa antum illaa basharum mislunaa wa maaa anzalar Rahmaanu min shai`in in antum illaa takziboon
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कहने लगे कि तुम लोग भी तो बस हमारे ही जैसे आदमी हो और खुदा ने कुछ नाज़िल (वाज़िल) नहीं किया है तुम सब के सब बस बिल्कुल झूठे हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا: तुम हमारे समान इंसान हो, इसमें कोई विशेषता नहीं।
  • وَمَا أَنزَلَ الرَّحْمَٰنُ مِن شَيْءٍ: अल्लाह (रहमान) ने कोई चीज़ (वही या रिसालत) नाज़िल नहीं की।
  • إِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَكْذِبُونَ: तुम केवल झूठ बोल रहे हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह के भेजे हुए रसूल उस बस्ती के लोगों को सीधे रास्ते पर बुलाने आए, तो उन लोगों ने अहंकार और जिद के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा: "तुम हमारे समान ही इंसान हो, तुममें कोई ऐसी विशेषता नहीं जो तुम्हें हमसे अलग करे। और अल्लाह (रहमान) ने तो कोई चीज़ भी नाज़िल नहीं की। तुम केवल झूठ बोल रहे हो, अपनी इस दावे में कि तुम रसूल हो।"

यह उन लोगों की नादानी और सत्य से दूरी थी कि उन्होंने यह नहीं सोचा कि अल्लाह की रहमत और हिकमत (बुद्धिमत्ता) यही मांगती है कि वह अपने बंदों की हिदायत के लिए रसूल भेजे। उन्होंने केवल इसलिए रसूलों को झुठला दिया क्योंकि वे उनके समान इंसान थे, जबकि यही अल्लाह की सुन्नत (रीति) रही है कि वह इंसानों में से ही रसूल चुनता है, ताकि वे लोगों से सीधे बात कर सकें और उनकी समझ में आ सकें।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि हमें सत्य को उसके प्रस्तुतकर्ता की सूरत-ए-हाल (शक्ल-ओ-शबीह) से नहीं, बल्कि उसकी सच्चाई और दलील से परखना चाहिए। अल्लाह के रसूलों की सबसे बड़ी निशानी यह है कि वे लोगों को अल्लाह की इबादत की तरफ बुलाते हैं, उनका चरित्र सर्वोत्तम होता है, और उनकी दावत में कोई स्वार्थ नहीं होता। जो लोग इस तरह केवल इसलिए सत्य को ठुकरा देते हैं कि वह उनके समान इंसान के द्वारा आया है, वे वास्तव में अपनी ही हिदायत और भलाई को ठुकरा रहे होते हैं।

अल्लाह तआला ने हम पर बड़ा एहसान किया है कि उसने हमें कुरआन और रसूल ﷺ के ज़रिए सीधा रास्ता दिखाया। हमें चाहिए कि हम इस नेमत की क़द्र करें, अल्लाह के हुक्मों को मानें और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें। यही हमारी दुनिया और आख़िरत की कामयाबी है।



📜 आयत 13-17 — सूरा यासीन

13وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلًا أَصْحَابَ الْقَرْيَةِ إِذْ جَاءَهَا الْمُرْسَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम (इनसे) मिसाल के तौर पर एक गाँव (अता किया) वालों का क़िस्सा बयान करो जब वहाँ (हमारे) पैग़म्बर आए
14إِذْ أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمُ اثْنَيْنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزْنَا بِثَالِثٍ فَقَالُوا إِنَّا إِلَيْكُم مُّرْسَلُونَ
इस तरह कि जब हमने उनके पास दो (पैग़म्बर योहना और यूनुस) भेजे तो उन लोगों ने दोनों को झुठलाया जब हमने एक तीसरे (पैग़म्बर शमऊन) से (उन दोनों को) मद्द दी तो इन तीनों ने कहा कि हम तुम्हारे पास खुदा के भेजे हुए (आए) हैं
15قَالُوا مَا أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا وَمَا أَنزَلَ الرَّحْمَٰنُ مِن شَيْءٍ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَكْذِبُونَ
वह लोग कहने लगे कि तुम लोग भी तो बस हमारे ही जैसे आदमी हो और खुदा ने कुछ नाज़िल (वाज़िल) नहीं किया है तुम सब के सब बस बिल्कुल झूठे हो
16قَالُوا رَبُّنَا يَعْلَمُ إِنَّا إِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ
तब उन पैग़म्बरों ने कहा हमारा परवरदिगार जानता है कि हम यक़ीनन उसी के भेजे हुए (आए) हैं और (तुम मानो या न मानो)
17وَمَا عَلَيْنَا إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
हम पर तो बस खुल्लम खुल्ला एहकामे खुदा का पहुँचा देना फर्ज़ है
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — यासीन 15

सूरा यासीन आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहने लगे कि तुम लोग भी तो बस…

सूरा आयत 15/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए