अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- طَائِرُكُمْ (ताइरुकुम): तुम्हारी बदशगुनी, तुम्हारा अशुभ संकेत, तुम्हारा शगुन।
- مَعَكُمْ (मअकुम): तुम्हारे साथ है, तुम्हीं से जुड़ा हुआ है।
- أَئِن ذُكِّرْتُمْ (ए-इन ज़ुक्किर्तुम): क्या इसलिए कि तुम्हें नसीहत की गई, क्या इसलिए कि तुम्हें याद दिलाया गया।
- مُسْرِفُونَ (मुसरिफ़ून): हद से गुज़रने वाले, सीमा से आगे बढ़ने वाले, ज़्यादती करने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब नबियों ने अपनी क़ौम को सीधे रास्ते की दावत दी और उन्हें अल्लाह की याद दिलाई, तो उस क़ौम ने नबियों पर इल्ज़ाम लगाया कि तुम हमारे लिए बदशगुनी और अशुभता लेकर आए हो। उन्होंने कहा कि तुम्हारी वजह से हम पर मुसीबतें आई हैं और हमारा हाल बिगड़ गया है। इस पर नबियों ने बड़ी साफ़गोई और हिकमत से जवाब दिया:
"तुम्हारी बदशगुनी तुम्हारे साथ है" — यानी जो बुराई और मुसीबत तुम देख रहे हो, वह हमारी वजह से नहीं, बल्कि तुम्हारे अपने कुफ़्र, तुम्हारे शिर्क और तुम्हारे गुनाहों की वजह से है। तुम्हारा अशुभ संकेत तुम्हारे साथ ही है, तुम्हारे आमाल (कर्मों) में है, तुम्हारे अक़ीदों में है। हम तो सिर्फ़ अल्लाह के पैग़ाम पहुँचाने वाले हैं, हमारी तरफ़ से कोई बुराई नहीं आती।
फिर नबियों ने उनसे कहा: "क्या इसलिए कि तुम्हें नसीहत की गई (तुम बदशगुनी मानते हो)?" यानी क्या यह तुम्हारी सज़ा का सबब बन गया कि हमने तुम्हें अल्लाह की याद दिलाई और तुम्हें भलाई की तरफ़ बुलाया? क्या नसीहत करना और सच्चाई बताना कोई जुर्म है? यह तो बड़ी अजीब बात है कि जो लोग तुम्हारी भलाई चाहते हैं, उन्हें तुम बदशगुनी समझो और उन्हें सज़ा देने की धमकी दो।
आख़िर में नबियों ने उन्हें साफ़ लफ़्ज़ों में बता दिया: "बल्कि तुम लोग हद से गुज़रने वाले हो।" यानी असल बात यह है कि तुम मुसरिफ़ हो — तुमने कुफ़्र और गुनाहों में हद से तजावुज़ कर दिया है, तुम ज़ुल्म और सरकशी में सीमा से आगे निकल गए हो। तुम्हारी यह हालत ही तुम्हारी बदबख़्ती का असली सबब है, न कि हमारी दावत।
दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त सिखाती है — जब इंसान सच्चाई से मुँह मोड़ता है और नसीहत को क़बूल नहीं करता, तो वह अपनी नाकामी और बुरे हालात का ज़िम्मेदार ख़ुद होता है, किसी और को नहीं ठहरा सकता। अल्लाह के नबी और उनके वारिस (उलमा और दुआत) जब लोगों को भलाई की तरफ़ बुलाते हैं, तो वह उनकी भलाई के लिए होता है, उनकी बदशगुनी के लिए नहीं।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें नसीहत और दावत को बुरा नहीं समझना चाहिए। जो इंसान हमें अल्लाह की याद दिलाता है, वह हमारा सच्चा दोस्त है। हमें अपने गुनाहों पर नज़र रखनी चाहिए और अपनी मुसीबतों का सबब अपने आमाल में तलाश करना चाहिए, न कि दूसरों पर इल्ज़ाम लगाना चाहिए। अल्लाह तआला हमें हद से गुज़रने से बचाए और हमें नसीहत क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 17-21 — यासीन
अनुवाद — यासीन 19
सूरा यासीन आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : पैग़म्बरों ने कहा कि तुम्हारी बद शुगूनी (तुम्हारी करनी से)…सूरा आयत 19/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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