यासीन · 19/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
قَالُوا طَائِرُكُم مَّعَكُمْ ۚ أَئِن ذُكِّرْتُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ مُّسْرِفُونَ ۝١٩
Qaaloo taaa`irukum ma`akum; a`in zukkirtum; bal antum qawmum musrifoon
📖 हिंदी अर्थ
पैग़म्बरों ने कहा कि तुम्हारी बद शुगूनी (तुम्हारी करनी से) तुम्हारे साथ है क्या जब नसीहत की जाती है (तो तुम उसे बदफ़ाली कहते हो नहीं) बल्कि तुम खुद (अपनी) हद से बढ़ गए हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • طَائِرُكُمْ (ताइरुकुम): तुम्हारी बदशगुनी, तुम्हारा अशुभ संकेत, तुम्हारा शगुन।
  • مَعَكُمْ (मअकुम): तुम्हारे साथ है, तुम्हीं से जुड़ा हुआ है।
  • أَئِن ذُكِّرْتُمْ (ए-इन ज़ुक्किर्तुम): क्या इसलिए कि तुम्हें नसीहत की गई, क्या इसलिए कि तुम्हें याद दिलाया गया।
  • مُسْرِفُونَ (मुसरिफ़ून): हद से गुज़रने वाले, सीमा से आगे बढ़ने वाले, ज़्यादती करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबियों ने अपनी क़ौम को सीधे रास्ते की दावत दी और उन्हें अल्लाह की याद दिलाई, तो उस क़ौम ने नबियों पर इल्ज़ाम लगाया कि तुम हमारे लिए बदशगुनी और अशुभता लेकर आए हो। उन्होंने कहा कि तुम्हारी वजह से हम पर मुसीबतें आई हैं और हमारा हाल बिगड़ गया है। इस पर नबियों ने बड़ी साफ़गोई और हिकमत से जवाब दिया:

"तुम्हारी बदशगुनी तुम्हारे साथ है" — यानी जो बुराई और मुसीबत तुम देख रहे हो, वह हमारी वजह से नहीं, बल्कि तुम्हारे अपने कुफ़्र, तुम्हारे शिर्क और तुम्हारे गुनाहों की वजह से है। तुम्हारा अशुभ संकेत तुम्हारे साथ ही है, तुम्हारे आमाल (कर्मों) में है, तुम्हारे अक़ीदों में है। हम तो सिर्फ़ अल्लाह के पैग़ाम पहुँचाने वाले हैं, हमारी तरफ़ से कोई बुराई नहीं आती।

फिर नबियों ने उनसे कहा: "क्या इसलिए कि तुम्हें नसीहत की गई (तुम बदशगुनी मानते हो)?" यानी क्या यह तुम्हारी सज़ा का सबब बन गया कि हमने तुम्हें अल्लाह की याद दिलाई और तुम्हें भलाई की तरफ़ बुलाया? क्या नसीहत करना और सच्चाई बताना कोई जुर्म है? यह तो बड़ी अजीब बात है कि जो लोग तुम्हारी भलाई चाहते हैं, उन्हें तुम बदशगुनी समझो और उन्हें सज़ा देने की धमकी दो।

आख़िर में नबियों ने उन्हें साफ़ लफ़्ज़ों में बता दिया: "बल्कि तुम लोग हद से गुज़रने वाले हो।" यानी असल बात यह है कि तुम मुसरिफ़ हो — तुमने कुफ़्र और गुनाहों में हद से तजावुज़ कर दिया है, तुम ज़ुल्म और सरकशी में सीमा से आगे निकल गए हो। तुम्हारी यह हालत ही तुम्हारी बदबख़्ती का असली सबब है, न कि हमारी दावत।

दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त सिखाती है — जब इंसान सच्चाई से मुँह मोड़ता है और नसीहत को क़बूल नहीं करता, तो वह अपनी नाकामी और बुरे हालात का ज़िम्मेदार ख़ुद होता है, किसी और को नहीं ठहरा सकता। अल्लाह के नबी और उनके वारिस (उलमा और दुआत) जब लोगों को भलाई की तरफ़ बुलाते हैं, तो वह उनकी भलाई के लिए होता है, उनकी बदशगुनी के लिए नहीं।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें नसीहत और दावत को बुरा नहीं समझना चाहिए। जो इंसान हमें अल्लाह की याद दिलाता है, वह हमारा सच्चा दोस्त है। हमें अपने गुनाहों पर नज़र रखनी चाहिए और अपनी मुसीबतों का सबब अपने आमाल में तलाश करना चाहिए, न कि दूसरों पर इल्ज़ाम लगाना चाहिए। अल्लाह तआला हमें हद से गुज़रने से बचाए और हमें नसीहत क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 17-21 — सूरा यासीन

17وَمَا عَلَيْنَا إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
हम पर तो बस खुल्लम खुल्ला एहकामे खुदा का पहुँचा देना फर्ज़ है
18قَالُوا إِنَّا تَطَيَّرْنَا بِكُمْ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهُوا لَنَرْجُمَنَّكُمْ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ
वह बोले हमने तुम लोगों को बहुत नहस क़दम पाया कि (तुम्हारे आते ही क़हत में मुबतेला हुए) तो अगर तुम (अपनी बातों से) बाज़ न आओगे तो हम लोग तुम्हें ज़रूर संगसार कर देगें और तुमको यक़ीनी हमारा दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा
19قَالُوا طَائِرُكُم مَّعَكُمْ ۚ أَئِن ذُكِّرْتُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ مُّسْرِفُونَ
पैग़म्बरों ने कहा कि तुम्हारी बद शुगूनी (तुम्हारी करनी से) तुम्हारे साथ है क्या जब नसीहत की जाती है (तो तुम उसे बदफ़ाली कहते हो नहीं) बल्कि तुम खुद (अपनी) हद से बढ़ गए हो
20وَجَاءَ مِنْ أَقْصَى الْمَدِينَةِ رَجُلٌ يَسْعَىٰ قَالَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُوا الْمُرْسَلِينَ
और (इतने में) शहर के उस सिरे से एक शख्स (हबीब नज्जार) दौड़ता हुआ आया और कहने लगा कि ऐ मेरी क़ौम (इन) पैग़म्बरों का कहना मानो
21اتَّبِعُوا مَن لَّا يَسْأَلُكُمْ أَجْرًا وَهُم مُّهْتَدُونَ
ऐसे लोगों का (ज़रूर) कहना मानो जो तुमसे (तबलीख़े रिसालत की) कुछ मज़दूरी नहीं माँगते और वह लोग हिदायत याफ्ता भी हैं
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
19आयत

अनुवाद — यासीन 19

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Thursday, October 1, 2026

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