Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَنَافِعُ: लाभ, फ़ायदे
- مَشَارِبُ: पीने की चीज़ें, पेय पदार्थ
- أَفَلَا يَشْكُرُونَ: तो क्या वे शुक्र (कृतज्ञता) अदा नहीं करते?
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इन चौपायों (जानवरों) में इंसानों के लिए कई और भी नेमतें रखी हैं, जो सिर्फ़ सवारी और गोश्त खाने तक ही सीमित नहीं हैं। इनके ऊन, बाल और रोएँ से इंसान कपड़े, कालीन, गद्दे और कई तरह की चीज़ें बनाते हैं, जिनसे वे अपने घरों को सजाते हैं और अपने शरीर को ढकते हैं। ये चीज़ें उनके लिए ज़ीनत और आराम का साधन बनती हैं।
इसके अलावा, इन जानवरों से उन्हें दूध (لبن) मिलता है — जो एक शुद्ध, स्वादिष्ट और पौष्टिक पेय है। यह दूध इंसान के लिए एक बड़ी रहमत है, जो बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी के लिए फ़ायदेमंद है। अल्लाह ने इन जानवरों के शरीर में यह व्यवस्था बनाई है कि वे हरा-भरा चारा खाते हैं और उससे शुद्ध सफ़ेद दूध पैदा करते हैं — यह अल्लाह की क़ुदरत का अद्भुत नमूना है।
अब सवाल यह है कि जब अल्लाह ने इतनी सारी नेमतें इंसान को दी हैं — सवारी, गोश्त, ऊन, दूध, और कई और फ़ायदे — तो क्या इंसान को चाहिए कि वह इन नेमतों के बदले अल्लाह का शुक्र अदा करे? क्या उसे चाहिए कि वह अल्लाह की इबादत करे और उसी की तरफ़ रुजू करे? बिल्कुल! इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह का शुक्र अदा करे, उसकी नेमतों को पहचाने और उसी की इबादत करे — क्योंकि ये सारी नेमतें किसी और की देन नहीं, बल्कि सिर्फ़ अल्लाह ही की देन हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें गिनती से बाहर हैं। हर सुबह-शाम हम जो दूध पीते हैं, जो कपड़े पहनते हैं, जो आराम की चीज़ें इस्तेमाल करते हैं — ये सब अल्लाह की मेहरबानी का नतीजा हैं। शुक्र अदा करने का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि हम अल्लाह की इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ। जब हम शुक्र अदा करते हैं, तो अल्लाह और नेमतें बढ़ाता है, जैसा कि क़ुरआन में है: "अगर तुम शुक्र करोगे तो मैं तुम्हें और ज़्यादा दूँगा।" (इब्राहीम: 7)
तो आओ, हम अपने रब के शुक्रगुज़ार बनें, उसकी नेमतों को पहचानें और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें — यही हमारी कामयाबी है।
📜 आयत 71-75 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 73
सूरा यासीन आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और चार पायों में उनके (और) बहुत से फायदे हैं…सूरा आयत 73/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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