यासीन · 72/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
وَذَلَّلْنَاهَا لَهُمْ فَمِنْهَا رَكُوبُهُمْ وَمِنْهَا يَأْكُلُونَ ۝٧٢
Wa zallalnaahaa lahum faminhaa rakoobuhum wa minhaa yaakuloon
📖 हिंदी अर्थ
और हम ही ने चार पायों को उनका मुतीय बना दिया तो बाज़ उनकी सवारियां हैं और बाज़ को खाते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَذَلَّلْنَاهَا: हमने उन्हें (जानवरों को) वश में कर दिया
  • رَكُوبُهُمْ: उनकी सवारी
  • يَأْكُلُونَ: वे खाते हैं

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपनी महान शक्ति और बेपनाह रहमत का ज़िक्र करते हुए बताया कि उसने इन चौपायों (जानवरों) को इंसान के लिए वश में कर दिया है। यह अल्लाह की बड़ी नेमत है कि ये जानवर, जो जंगली और खूँख्वार हो सकते थे, इंसान के काबू में हैं। उनमें से कुछ पर इंसान सवारी करता है, उन पर अपना सामान लादता है, लंबे सफ़र तय करता है, और कुछ से उसका गुज़ारा होता है—उनका गोश्त खाता है, उनका दूध पीता है, और उनकी खाल से फ़ायदा उठाता है।

यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करने की तरफ़ बुलाती है। जिस रब ने इन जानवरों को इंसान के ताबे में कर दिया, वही रब इंसान की हर ज़रूरत को जानता है और उसे पूरा करता है। यह सब कुछ अल्लाह की मेहरबानी से है, वरना ये जानवर इंसान के क़ाबू में कैसे आ सकते थे?

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करें। जब हम सवारी करें, खाना खाएँ, या इन जानवरों से कोई फ़ायदा उठाएँ, तो अल्लाह का शुक्रिया अदा करें और उसे याद करें। यह भी याद रखें कि ये सब नेमतें अल्लाह की तरफ़ से हैं, और अल्लाह ही इन्हें देने वाला है। जो शख्स अल्लाह की इन नेमतों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अल्लाह की मुहब्बत में बढ़ जाता है।

अल्लाह तआला ने यह भी बताया कि ये जानवर इंसान के लिए ज़ीनत और सुंदरता का सामान हैं, जैसा कि दूसरी आयतों में ज़िक्र आया है। यानी अल्लाह ने इन्हें सिर्फ़ काम के लिए ही नहीं, बल्कि इंसान की ख़ूबसूरती और रौनक़ के लिए भी बनाया है। यह अल्लाह की कमाल हिकमत और रहमत की दलील है।

इसलिए हमें चाहिए कि इन नेमतों को अल्लाह की नेमत समझकर उसका शुक्र अदा करें, और अल्लाह की इबादत में लगे रहें, क्योंकि अल्लाह ही सब कुछ देने वाला है और वही सबसे बड़ा मेहरबान है।

🎧 सुनें

📜 आयत 70-74 — यासीन

70لِّيُنذِرَ مَن كَانَ حَيًّا وَيَحِقَّ الْقَوْلُ عَلَى الْكَافِرِينَ
ताकि जो ज़िन्दा (दिल आक़िल) हों उसे (अज़ाब से) डराए और काफ़िरों पर (अज़ाब का) क़ौल साबित हो जाए (और हुज्जत बाक़ी न रहे)
71أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّا خَلَقْنَا لَهُم مِّمَّا عَمِلَتْ أَيْدِينَا أَنْعَامًا فَهُمْ لَهَا مَالِكُونَ
क्या उन लोगों ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनके फायदे के लिए चारपाए उस चीज़ से पैदा किए जिसे हमारी ही क़ुदरत ने बनाया तो ये लोग (ख्वाहमाख्वाह) उनके मालिक बन गए
72وَذَلَّلْنَاهَا لَهُمْ فَمِنْهَا رَكُوبُهُمْ وَمِنْهَا يَأْكُلُونَ
और हम ही ने चार पायों को उनका मुतीय बना दिया तो बाज़ उनकी सवारियां हैं और बाज़ को खाते हैं
73وَلَهُمْ فِيهَا مَنَافِعُ وَمَشَارِبُ ۖ أَفَلَا يَشْكُرُونَ
और चार पायों में उनके (और) बहुत से फायदे हैं और पीने की चीज़ (दूध) तो क्या ये लोग (इस पर भी) शुक्र नहीं करते
74وَاتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ آلِهَةً لَّعَلَّهُمْ يُنصَرُونَ
और लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर (फर्ज़ी माबूद बनाए हैं ताकि उन्हें उनसे कुछ मद्द मिले हालाँकि वह लोग उनकी किसी तरह मद्द कर ही नहीं सकते
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अनुवाद — यासीन 72

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सूरा आयत 72/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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