अस-साफ्फात · 106/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ ۝١٠٦
Inna haazaa lahuwal balaaa`ul mubeen
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही इम्तिहान था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْبَلَاءُ: परीक्षा, आज़माइश, इम्तिहान।
  • الْمُبِينُ: स्पष्ट, ज़ाहिर, खुला हुआ।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह (बेटे को ज़बह करने का हुक्म) यक़ीनन वह स्पष्ट और खुली परीक्षा थी, जिसमें हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सच्चाई, फ़रमाबरदारी और अल्लाह की मुहब्बत का इम्तिहान था। यह कोई साधारण आज़माइश नहीं थी, बल्कि ऐसी कठिन परीक्षा थी जिसमें एक पिता को अपने ही बेटे, जो कि बुढ़ापे में मिली नेमत था, को अपने हाथों ज़बह करने का हुक्म दिया गया।

यह परीक्षा इसलिए "मुबीन" (स्पष्ट) कहलाई क्योंकि इसमें कोई धुंधलापन नहीं था — हुक्म साफ़ था, और इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसे पूरा करने का इरादा कर लिया। यह उनके ईमान की बुलंदी और अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाने की निहायत दर्जे की मिसाल है।

इस आयत से हमें सबक मिलता है कि अल्लाह की राह में आने वाली मुश्किलें और परीक्षाएँ दरअसल हमारे ईमान को निखारने का ज़रिया होती हैं। जब हम अल्लाह पर भरोसा करके हर हुक्म को दिल से क़बूल करते हैं, तो अल्लाह हमारे लिए उसमें से निकलने का रास्ता बनाता है और हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता फ़रमाता है।

याद रखिए, अल्लाह किसी को उसकी ताक़त से बढ़कर परीक्षा नहीं देता। इब्राहीम अलैहिस्सलाम की यह कुर्बानी आज भी हर मुसलमान के लिए मशाल-ए-राह है कि अल्लाह की मुहब्बत में हर क़ुर्बानी देना आसान हो जाता है, और अल्लाह अपने बंदों को उनकी नीयत के बदले बेहतर इनाम देता है — जैसे उन्होंने इस परीक्षा में कामयाब होकर एक बड़ी कुर्बानी (दुम्बा) अता किया और उनके नाम को आने वाली नस्लों तक ज़िंदा रखा।



📜 आयत 104-108 — सूरा अस-साफ्फात

104وَنَادَيْنَاهُ أَن يَا إِبْرَاهِيمُ
और हमने (आमादा देखकर) आवाज़ दी ऐ इबराहीम
105قَدْ صَدَّقْتَ الرُّؤْيَا ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
तुमने अपने ख्वाब को सच कर दिखाया अब तुम दोनों को बड़े मरतबे मिलेगें हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर देते हैं
106إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ
इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही इम्तिहान था
107وَفَدَيْنَاهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ
और हमने इस्माईल का फ़िदया एक ज़िबाहे अज़ीम (बड़ी कुर्बानी) क़रार दिया
108وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
106आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 106

सूरा अस-साफ्फात आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही…

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Saturday, October 3, 2026

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