अस-साफ्फात · 118/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَهَدَيْنَاهُمَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ ۝١١٨
Wa hadainaahumus Siraatal Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَهَدَيْنَاهُمَا: और हमने उन दोनों (मूसा और हारून अलैहिमुस्सलाम) को मार्गदर्शन दिया।
  • الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ: सीधा रास्ता, जिसमें कोई टेढ़ापन न हो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने दो महान नबियों — हज़रत मूसा और हज़रत हारून (अलैहिमुस्सलाम) — को वह तौरात प्रदान की जो सत्य और मार्गदर्शन से भरपूर थी, और उन्हें उस सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दी जो हर प्रकार की कमी और टेढ़ेपन से पाक है। यह सीधा रास्ता इस्लाम का रास्ता है — वही दीन जिसे अल्लाह ने अपने सभी नबियों के लिए चुना था। यह वह रास्ता है जो बंदे को उसके रब की रज़ा तक पहुँचाता है, और जो अल्लाह की तरफ़ से आया हुआ सत्य और हक़ का रास्ता है।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि उसने मूसा और हारून (अलैहिमुस्सलाम) को न केवल ज्ञान दिया, बल्कि उन्हें अमल की तौफ़ीक़ भी दी — यानी सिर्फ़ रास्ता दिखाना ही काफ़ी नहीं, बल्कि उस पर चलने की हिम्मत और हिदायत भी अल्लाह ही की तरफ़ से मिलती है। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है कि हमें अल्लाह से सीधे रास्ते पर चलने की दुआ माँगते रहना चाहिए, क्योंकि हिदायत पूरी तरह अल्लाह के हाथ में है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। जिस तरह उसने मूसा और हारून (अलैहिमुस्सलाम) को सीधा रास्ता दिखाया और उन्हें दुनिया में अच्छी यादगार और आख़िरत में बड़ा इनाम दिया, उसी तरह आज भी वह हर उस बंदे की मदद करता है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करता है और सीधे रास्ते पर चलने की कोशिश करता है। इस्लाम वही सीधा रास्ता है जो इंसान को दुनिया की तंगगियों और गुमराहियों से निकालकर सुकून, शांति और अल्लाह की रज़ा तक पहुँचाता है। आइए, हम सब इस रास्ते को अपनाएँ और अल्लाह से हिदायत की दुआ करते रहें — क्योंकि यही कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 116-120 — सूरा अस-साफ्फात

116وَنَصَرْنَاهُمْ فَكَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ
और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आख़िर) यही लोग ग़ालिब रहे
117وَآتَيْنَاهُمَا الْكِتَابَ الْمُسْتَبِينَ
और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की
118وَهَدَيْنَاهُمَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई
119وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِي الْآخِرِينَ
और बाद को आने वालों में उनका ज़िक्रे ख़ैर बाक़ी रखा
120سَلَامٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
118आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 118

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Saturday, October 3, 2026

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