अस-साफ्फात · 119/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِي الْآخِرِينَ ۝١١٩
Wa taraknaa `alaihimaa fil aakhireen
📖 हिंदी अर्थ
और बाद को आने वालों में उनका ज़िक्रे ख़ैर बाक़ी रखा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَتَرَكْنَا: हमने छोड़ा / बनाए रखा
  • عَلَيْهِمَا: उन दोनों (हज़रत मूसा और हज़रत हारून) पर
  • فِي الْآخِرِينَ: बाद की उम्मतों में / पिछली पीढ़ियों के बाद आने वाली पीढ़ियों में

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में हज़रत मूसा और हज़रत हारून (अलैहिमुस्सलाम) के उस सम्मान और इज़्ज़त का ज़िक्र किया है जो उन्होंने दुनिया में हासिल की। अल्लाह ने उन दोनों नबियों के लिए बाद की उम्मतों में एक अच्छा नाम, पाक स्मृति और सराहनीय ज़िक्र छोड़ा। यह कोई साधारण बात नहीं है कि अल्लाह किसी बंदे का नाम उसकी मौत के बाद भी लोगों की ज़ुबानों पर जारी रखे, और आने वाली पीढ़ियाँ उसे अच्छाई और सम्मान के साथ याद करें।

यह अल्लाह की ओर से उन नबियों के लिए एक विशेष इनाम और सम्मान है, जो उनकी दुनियावी ज़िंदगी के बाद भी जारी रहता है। अल्लाह ने उनके नाम को बाद की सभी उम्मतों में इस तरह रोशन किया कि हर ज़माने में लोग उन्हें प्यार और अदब से याद करते हैं। यह उनके ईमान, सब्र और अल्लाह के दीन की खिदमत का नतीजा था।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी। जो लोग अल्लाह के रास्ते में काम करते हैं और उसके दीन की खिदमत करते हैं, अल्लाह उनके नाम को अच्छाई के साथ ज़िंदा रखता है। यह एक ऐसी नेमत है जो हर मोमिन के लिए सबसे बड़ी कामयाबी है—कि उसका ज़िक्र अच्छाई के साथ किया जाए।

अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा और हारून (अलैहिमुस्सलाम) को तौरात जैसी रोशन किताब दी, उन्हें सीधे रास्ते पर चलाया, और फिर उनके लिए बाद की पीढ़ियों में अच्छा नाम और पाक ज़िक्र छोड़ा। यह उनके लिए दुनिया की ज़िंदगी में भी एक बड़ा सम्मान है और आख़िरत में उनके लिए और भी बड़ा इनाम है।

इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने जीवन को इस तरह गुज़ारना चाहिए कि हमारा नाम भी अच्छाई के साथ याद किया जाए। अच्छे कर्म, ईमान, सच्चाई, और अल्लाह की इबादत ही वे चीज़ें हैं जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त दिलाती हैं। अल्लाह हमें अपने नेक बंदों के रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 117-121 — अस-साफ्फात

117وَآتَيْنَاهُمَا الْكِتَابَ الْمُسْتَبِينَ
और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की
118وَهَدَيْنَاهُمَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई
119وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِي الْآخِرِينَ
और बाद को आने वालों में उनका ज़िक्रे ख़ैर बाक़ी रखा
120سَلَامٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है
121إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
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अनुवाद — अस-साफ्फात 119

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Tuesday, August 18, 2026

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