अस-साफ्फात · 29/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
قَالُوا بَل لَّمْ تَكُونُوا مُؤْمِنِينَ ۝٢٩
Qaaloo bal lam takoonoo mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَلْ (बल): बल्कि, नहीं, बल्कि यह सही है।
  • لَمْ تَكُونُوا (लम तकूनू): तुम नहीं थे।
  • مُؤْمِنِينَ (मोमिनीन): ईमान लाने वाले, सच्चे विश्वासी।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में उस स्थिति का वर्णन किया गया है जब नरक में प्रवेश करने के बाद कमज़ोर लोग (अनुयायी) अपने बड़ों और सरदारों (नेताओं) से कहेंगे कि "आपने हमें सीधे रास्ते से भटकाया और हमें गुमराह किया।" तब उनके नेता जवाब देंगे: "नहीं, बल्कि तुम खुद ईमान नहीं लाए थे।"

यानी नेता साफ़-साफ़ कहेंगे कि हमने तुम्हें ज़बरदस्ती गुमराह नहीं किया था। हमने तो सिर्फ़ बुलाया था, लेकिन तुम्हारे दिलों में खुद ही सच्चाई को क़बूल करने की तैयारी नहीं थी। तुम्हारा अपना दिल कु़फ़्र (इनकार) की तरफ़ झुका हुआ था। हमने तुम्हें सच्चाई से हटाया नहीं, बल्कि तुम खुद ही सच्चाई से दूर थे। तुम्हारे अंदर ईमान की कोई चाहत ही नहीं थी, इसलिए तुमने हमारी बात मान ली।

यह जवाब उनके बहानों को जड़ से ख़त्म कर देगा। क्योंकि अल्लाह तआला ने हर इंसान को अक़्ल और समझ दी थी, और सच्चाई को पहचानने की ताक़त दी थी। लेकिन उन्होंने अपनी अक़्ल का इस्तेमाल नहीं किया और अपनी इच्छाओं का पालन किया। इसलिए क़यामत के दिन कोई बहाना क़बूल नहीं होगा।


दावती पहलू (उपदेश):

यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है कि हम अपने कर्मों की ज़िम्मेदारी खुद उठाएँ। किसी और को अपनी गलती का ठीकरा न सौंपें। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है, क़ुरआन दिया है, और सही रास्ता दिखाया है। अगर हम आज उस पर चलेंगे, तो क़यामत के दिन हमें किसी से कोई शिकायत नहीं होगी। लेकिन अगर हमने ग़लत रास्ता चुना, तो वहाँ कोई बहाना काम नहीं आएगा।

आज ही वक़्त है कि हम अपने दिल को ईमान की रोशनी से रोशन करें, नेक काम करें, और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें। क़ुरआन और सुन्नत हमारे लिए रहनुमा हैं — इन्हें पकड़ लें, तो कामयाबी हमारी होगी। अल्लाह हमें सच्चे ईमान की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 27-31 — सूरा अस-साफ्फात

27وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ
और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे
28قَالُوا إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ الْيَمِينِ
(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे
29قَالُوا بَل لَّمْ تَكُونُوا مُؤْمِنِينَ
वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे
30وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَانٍ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًا طَاغِينَ
और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे
31فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَا ۖ إِنَّا لَذَائِقُونَ
फिर अब तो लोगों पर हमारे परवरदिगार का (अज़ाब का) क़ौल पूरा हो गया कि अब हम सब यक़ीनन अज़ाब का मज़ा चखेंगे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
29आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 29

सूरा अस-साफ्फात आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान…

सूरा आयत 29/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए