अस-साफ्फात · 34/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِينَ ۝٣٤
Innaa kazaalika naf`alu bil mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
और हम तो गुनाहगारों के साथ यूँ ही किया करते हैं ये लोग ऐसे (शरीर) थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • المُجْرِمِينَ (मुजरिमीन): अपराधी, वे लोग जिन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, उसकी अवज्ञा की और उसके साथ दूसरों को साझीदार ठहराया।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने इन अपराधियों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया है, और हमारा यही तरीक़ा हर उस व्यक्ति के साथ है जो अपराधी होगा। यानी जिस तरह हमने इन मुशरिकों को अज़ाब में डाला, उसी तरह हम हर उस शख़्स के साथ करेंगे जो अल्लाह की नाफ़रमानी करेगा और उसके साथ शिर्क करेगा। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है जो क़ियामत के दिन सामने आएगी, जब अपराधियों को उनके किए की सज़ा दी जाएगी और उन्हें दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखाया जाएगा।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल कामिल है। वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर किसी को उसके कर्मों का पूरा बदला देता है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की रहमत और हिदायत को ठुकराकर गुनाह और सरकशी का रास्ता अपनाते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास सख्त अज़ाब तैयार है। मगर इसके साथ ही अल्लाह की रहमत भी बेहद वसीअ है — वह चाहता है कि लोग तौबा करें और उसकी तरफ़ रुजू करें, ताकि वह उन्हें माफ़ कर दे और उन्हें जन्नत की नेअमतों से नवाज़े।

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) को अपना निशाना बनाएं और उसके साथ किसी को शरीक न करें। यही वह रास्ता है जो हमें अज़ाब से बचाकर अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुंचाता है। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 32-36 — अस-साफ्फात

32فَأَغْوَيْنَاكُمْ إِنَّا كُنَّا غَاوِينَ
हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह किया
33فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ
ग़रज़ ये लोग सब के सब उस दिन अज़ाब में शरीक होगें
34إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِينَ
और हम तो गुनाहगारों के साथ यूँ ही किया करते हैं ये लोग ऐसे (शरीर) थे
35إِنَّهُمْ كَانُوا إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ
कि जब उनसे कहा जाता था कि खुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो अकड़ा करते थे
36وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُو آلِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَّجْنُونٍ
और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर के लिए हम अपने माबूदों को छोड़ बैठें (अरे कम्बख्तों ये शायर या पागल नहीं)
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अनुवाद — अस-साफ्फात 34

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Tuesday, August 18, 2026

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