Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- نِعْمَةُ رَبِّي – मेरे रब की कृपा और अनुग्रह
- الْمُحْضَرِينَ – उन लोगों में से जिन्हें (आज़ाब के लिए) हाज़िर किया जाए, यानी जो अज़ाब में डाले जाएँ
तफ़सीर:
यह आयत उस मोमिन (ईमानवाले) के क़ौल को बयान कर रही है जो अपने काफ़िर साथी (जो बहिश्त में उससे बात कर रहा है) से कह रहा है। वह उस काफ़िर से कहता है: "अगर मेरे रब की मेहरबानी और उसकी नेमत न होती, जिसने मुझे ईमान की हिदायत दी और मुझे उस पर क़ायम रखा, तो मैं भी तुम्हारी तरह उस अज़ाब में मौजूद होता जिसमें तुम अभी हो।"
यानी वह मोमिन यह स्वीकार कर रहा है कि उसका ईमान और नजात उसके अपने दम-ख़म से नहीं, बल्कि अल्लाह की फज़ल-ओ-करम से है। अल्लाह ने उसे हिदायत दी, उसे साबित क़दम रखा और उसे कुफ़्र और गुमराही से बचाया। अगर अल्लाह की यह नेमत न होती, तो वह भी उन्हीं लोगों में से होता जिन्हें जहन्नुम के अज़ाब के लिए हाज़िर किया जाता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान और नेकी अल्लाह की बड़ी नेमत है। हमें चाहिए कि हम अपने ईमान पर घमंड न करें, बल्कि हर वक़्त अल्लाह का शुक्र अदा करें कि उसने हमें इस नेमत से नवाज़ा। हमें यह भी समझना चाहिए कि अल्लाह की हिदायत के बग़ैर कोई भी इंसान नेक रास्ते पर नहीं चल सकता। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें ईमान पर साबित क़दम रखे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो अज़ाब में डाले जाएँगे।
यह क़िस्सा हमें बताता है कि दोस्तों की सोहबत का इंसान पर गहरा असर होता है। वह काफ़िर दोस्त अपने मोमिन दोस्त को गुमराह करना चाहता था, लेकिन अल्लाह की रहमत ने उस मोमिन को बचा लिया। इससे हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम अपने दोस्तों के चुनाव में होशियार रहें और उन लोगों की सोहबत से बचें जो हमें अल्लाह के रास्ते से भटका सकते हैं। साथ ही, हमें उन लोगों के लिए दुआ करनी चाहिए जो गुमराही में हैं, कि अल्लाह उन्हें भी हिदायत दे।
📜 आयत 55-59 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 57
सूरा अस-साफ्फात आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर मेरे परवरदिगार का एहसान न होता तो मैं…सूरा आयत 57/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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