अस-साफ्फात · 58/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ ۝٥٨
Afamaa nahnu bimaiyiteen
📖 हिंदी अर्थ
(अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَفَمَا – क्या हम (क्या यह सच नहीं)
  • نَحْنُ – हम
  • بِمَيّتِينَ – मरने वाले (मृत्यु को प्राप्त होने वाले)

व्याख्या:

यह आयत उन ईमानवालों के कथन को प्रस्तुत करती है जो जन्नत में प्रवेश कर चुके हैं और अपनी आँखों से उस अनन्त सुख और सम्मान को देख रहे हैं जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार किया है। वे अपने उन साथियों से, जो दुनिया में उनके साथ थे और अब जन्नत में उनसे मिले हैं, कहते हैं: "क्या यह सच है कि हम अब कभी नहीं मरेंगे?" यह प्रश्न वास्तव में एक खुशी और आश्चर्य से भरा हुआ है, क्योंकि दुनिया में मृत्यु का भय हर इंसान को सताता था, लेकिन अब उन्हें यकीन हो गया है कि यहाँ की ज़िन्दगी हमेशा की है, कोई मौत नहीं, कोई दर्द नहीं, कोई अंत नहीं।

यह वही सच्चाई है जिसका वादा अल्लाह ने अपने नेक बंदों से किया था। जन्नत में प्रवेश के बाद मौत की कोई गुंजाइश नहीं, न ही कोई कष्ट या चिंता। यही वह महान सफलता है जिसके लिए दुनिया में नेक अमल किए गए और जिसकी खातिर हर मुश्किल को सहा गया। अल्लाह तआला ने इस आयत में जन्नतियों के इस खुशी भरे सवाल को बयान करके हमें बताया है कि उनका इंतज़ार कितना शानदार है।

दृष्टिकोण और नसीहत:

यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की ज़िन्दगी फानी है, लेकिन आख़िरत की ज़िन्दगी हमेशा रहने वाली है। जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और नेक कर्म करते रहे, उनके लिए वहाँ कोई मौत नहीं, बल्कि अनन्त सुख और शान्ति है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िन्दगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बनाएँ, उसकी इबादत करें, उसके दिए हुए आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें। यही वह रास्ता है जो हमें उस स्थान तक पहुँचाएगा जहाँ मौत का भय नहीं, बल्कि हमेशा की खुशी और अल्लाह की रहमत का साया होगा। आइए, हम अपने अमल को सुधारें और उस दिन की तैयारी करें जब हम भी यही कह सकेंगे: "क्या सच में हम अब कभी नहीं मरेंगे?" — और जवाब में हमें यकीन होगा कि यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 56-60 — अस-साफ्फात

56قَالَ تَاللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ
(ये देख कर बेसाख्ता) बोल उठेगा कि खुदा की क़सम तुम तो मुझे भी तबाह करने ही को थे
57وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّي لَكُنتُ مِنَ الْمُحْضَرِينَ
और अगर मेरे परवरदिगार का एहसान न होता तो मैं भी (इस वक्त) तेरी तरह जहन्नुम में गिरफ्तार किया गया होता
58أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ
(अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है
59إِلَّا مَوْتَتَنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ
और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा
60إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है
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अनुवाद — अस-साफ्फात 58

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Tuesday, August 18, 2026

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