अस-साफ्फात · 56/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
قَالَ تَاللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ ۝٥٦
Qaala tallaahi in kitta laturdeen
📖 हिंदी अर्थ
(ये देख कर बेसाख्ता) बोल उठेगा कि खुदा की क़सम तुम तो मुझे भी तबाह करने ही को थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَاللَّهِ: अल्लाह की क़सम!
  • إِن كِدتَّ: तू तो लगभग (करीब था)।
  • لَتُرْدِينِ: मुझे हलाक (बर्बाद) करने वाला था, मुझे विनाश की ओर ले जाने वाला था।

व्याख्या:

यह वह दृश्य है जब जन्नत में प्रवेश पाने वाला ईमानवाला व्यक्ति अपने उस साथी (क़रीन) को देखता है जो दुनिया में उसे गुमराह करने की कोशिश करता था और आज वह जहन्नुम की आग में जल रहा है। वह ईमानवाला व्यक्ति उसे देखकर अल्लाह की क़सम खाकर कहता है: "अल्लाह की क़सम! ऐ मेरे गुमराह करने वाले साथी! तू तो मुझे लगभग बर्बाद ही कर चुका था। तूने मुझे कुफ़्र और आख़िरत के इनकार की ओर बुलाया, मुझे ईमान से रोकने की पूरी कोशिश की, और अगर अल्लाह का फज़ल (कृपा) मेरे साथ न होता, अगर उसने मुझे हिदायत न दी होती और मुझ पर दया न की होती, तो मैं भी आज तेरी तरह इसी आग में झुलस रहा होता।"

यह वह क्षण है जब ईमानवाला व्यक्ति अपने रब की नेमत को याद करता है और उसका शुक्र अदा करता है कि अल्लाह ने उसे उस बुरे साथी के जाल से बचाया। वह उस गुमराह करने वाले को तमाचा मारता है और उसे अपनी हालत पर शर्मिंदा करता है।


दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि बुरे साथी इंसान की ज़िंदगी के लिए कितने खतरनाक होते हैं। वे धीरे-धीरे, चुपचाप इंसान को ईमान से दूर करके उसे जहन्नम की ओर ले जाते हैं। इसलिए ऐ मुसलमान! अपने साथियों को चुनने में बहुत सावधानी बरतो। अच्छे साथी तुम्हें जन्नत की राह दिखाएंगे, और बुरे साथी तुम्हें जहन्नम की खाई में धकेल देंगे।

और सबसे बड़ी बात — अल्लाह का शुक्र अदा करो कि उसने तुम्हें हिदायत दी, तुम्हें सीधा रास्ता दिखाया। अगर वह चाहता तो तुम भी गुमराह होते। इसलिए अपने रब की नेमत को पहचानो, उसकी इबादत करो, और उसके दीन पर साबित क़दम रहो। याद रखो, आज का हर अच्छा काम कल क़ियामत के दिन तुम्हारे काम आएगा, और आज की हर बुराई तुम्हें पछतावे में डाल देगी। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 54-58 — अस-साफ्फात

54قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ
(फिर अपने बेहश्त के साथियों से कहेगा)
55فَاطَّلَعَ فَرَآهُ فِي سَوَاءِ الْجَحِيمِ
तो क्या तुम लोग भी (मेरे साथ उसे झांक कर देखोगे) ग़रज़ झाँका तो उसे बीच जहन्नुम में (पड़ा हुआ) देखा
56قَالَ تَاللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ
(ये देख कर बेसाख्ता) बोल उठेगा कि खुदा की क़सम तुम तो मुझे भी तबाह करने ही को थे
57وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّي لَكُنتُ مِنَ الْمُحْضَرِينَ
और अगर मेरे परवरदिगार का एहसान न होता तो मैं भी (इस वक्त) तेरी तरह जहन्नुम में गिरफ्तार किया गया होता
58أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ
(अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है
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अनुवाद — अस-साफ्फात 56

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Tuesday, August 18, 2026

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