अस-साफ्फात · 64/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِي أَصْلِ الْجَحِيمِ ۝٦٤
Innahaa shajaratun takhruju feee aslil Jaheem
📖 हिंदी अर्थ
ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَجَرَةٌ (शजरतुन): पेड़
  • تَخْرُجُ (तख़्रुजु): निकलती है, उगती है
  • أَصْلِ (अस्लि): जड़, तल, सबसे निचला हिस्सा
  • الْجَحِيمِ (अल-जहीम): नरक की आग, दहकती हुई आग

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक पेड़ "ज़क़्क़ूम" का वर्णन कर रही है, जो नरक के सबसे गहरे और सबसे निचले हिस्से में उगता है। यह कोई साधारण पेड़ नहीं है — इसकी जड़ें नरक की आग के भीतर हैं, और यह आग से ही पोषित होता है। इसकी शाखाएँ नरक की विभिन्न मंज़िलों तक फैली हुई हैं।

सोचिए! यह पेड़ ऐसी जगह उगता है जहाँ केवल आग और जलन है। इसका अस्तित्व ही अल्लाह की क़ुदरत का एक भयानक प्रमाण है कि वहाँ भी वह चीज़ें पैदा कर सकता है जो उसके अज़ाब को और भी सख्त कर दें। यह पेड़ नरक के निवासियों के लिए भोजन है, लेकिन ऐसा भोजन जो उन्हें कभी आराम नहीं देगा, बल्कि उनकी पीड़ा को और बढ़ा देगा।

इस आयत में एक गहरा संदेश है — जिस तरह यह पेड़ नरक की आग से पोषित होकर उगता है, उसी तरह पाप और अवज्ञा के बीज भी दिल में पनपते हैं और अंततः नरक की ओर ले जाते हैं। अल्लाह ने इसका वर्णन इसलिए किया ताकि हम सोचें और अपने कर्मों को सुधारें।

यह आयत हमें डराती है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह ने हमें आगाह कर दिया है — ताकि हम उस रास्ते से बचें जो इस भयानक अंजाम तक पहुँचाता है। अल्लाह की रहमत यह है कि उसने हमें दुनिया में ही चेतावनी दे दी, ताकि हम तौबा करें और अपने जीवन को सही दिशा दें।

याद रखिए! यह पेड़ उन लोगों के लिए है जो अल्लाह के रास्ते से भटक गए और अपने पैग़म्बरों को झुठलाया। लेकिन जो लोग ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, उनके लिए अल्लाह ने जन्नत के ऐसे बाग़ तैयार किए हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं, और वहाँ उन्हें हमेशा हमेशा के लिए रहने का सुखद जीवन मिलेगा। अल्लाह हम सभी को उस रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे जो उसकी रज़ा और जन्नत तक पहुँचाता है। आमीन।



📜 आयत 62-66 — अस-साफ्फात

62أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّومِ
भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)
63إِنَّا جَعَلْنَاهَا فِتْنَةً لِّلظَّالِمِينَ
जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है
64إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِي أَصْلِ الْجَحِيمِ
ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है
65طَلْعُهَا كَأَنَّهُ رُءُوسُ الشَّيَاطِينِ
उसके फल ऐसे (बदनुमा) हैं गोया (हू बहू) साँप के फन जिसे छूते दिल डरे
66فَإِنَّهُمْ لَآكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِئُونَ مِنْهَا الْبُطُونَ
फिर ये (जहन्नुमी लोग) यक़ीनन उसमें से खाएँगे फिर उसी से अपने पेट भरेंगे
अस-साफ्फातकुरान सूची
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64आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 64

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Tuesday, August 18, 2026

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