अस-साफ्फात · 63/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِنَّا جَعَلْنَاهَا فِتْنَةً لِّلظَّالِمِينَ ۝٦٣
Innaa ja`alnaahaa fitnatal lizzaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जَعَلْنَاهَا: हमने उसे बनाया
  • फ़ित्ना: परीक्षा, आज़माइश, कसौटी
  • लिल्लाहिमीन: ज़ालिमों के लिए (अत्याचारियों के लिए)

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने उस पेड़ (ज़क़्क़ूम) को ज़ालिमों के लिए परीक्षा और आज़माइश का ज़रिया बनाया है। यह वही पेड़ है जो जहन्नम की आग में उगता है और जिसका ज़िक्र पिछली आयतों में हुआ। यह आयत उन काफ़िरों और मुशरिकों की ओर इशारा करती है जिन्होंने इस आयत को सुनकर मज़ाक उड़ाया और कहा कि "आग में पेड़ कैसे उग सकता है? आग तो पेड़ों को जला देती है!" उन्होंने इस पर विश्वास न करते हुए इसे असंभव बताया और रसूलुल्लाह ﷺ की नबुव्वत पर सवाल उठाया।

अल्लाह तआला ने इस पेड़ को ज़ालिमों के लिए फ़ित्ना (परीक्षा) इसलिए बनाया कि उनके दिलों में जो कुफ़्र और इन्कार है, वह सामने आ जाए और उनकी सच्चाई या झूठ साबित हो जाए। जो लोग अपने नफ़्स पर ज़ुल्म कर रहे हैं, वे इस आयत को सुनकर और भी गुमराह हो जाते हैं और मज़ाक उड़ाते हैं, जबकि मोमिनीन इस पर ईमान लाते हैं और अल्लाह की क़ुदरत को देखते हैं। अल्लाह तआला के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है — वह आग में पेड़ उगा सकता है, क्योंकि वह हर चीज़ पर क़ादिर है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे हमारी अक़्ल और समझ की कोई हैसियत नहीं। जो चीज़ हमारी समझ से परे लगती है, वह अल्लाह के लिए आसान है। हमें चाहिए कि हर बात पर ईमान लाएँ और अल्लाह के फ़ैसलों पर भरोसा करें। जो लोग अल्लाह की आयतों पर मज़ाक उड़ाते हैं, वे दरअसल अपने ऊपर ज़ुल्म करते हैं और अपने लिए जहन्नम का सामान इकट्ठा करते हैं। अल्लाह तआला हमें उन ज़ालिमों में से न बनाए और हमें सच्चे मोमिनों में शामिल करे। आमीन।



📜 आयत 61-65 — सूरा अस-साफ्फात

61لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ
ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए
62أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّومِ
भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)
63إِنَّا جَعَلْنَاهَا فِتْنَةً لِّلظَّالِمِينَ
जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है
64إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِي أَصْلِ الْجَحِيمِ
ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है
65طَلْعُهَا كَأَنَّهُ رُءُوسُ الشَّيَاطِينِ
उसके फल ऐसे (बदनुमा) हैं गोया (हू बहू) साँप के फन जिसे छूते दिल डरे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
63आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 63

सूरा अस-साफ्फात आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है

सूरा आयत 63/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए