अस-साफ्फात · 82/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ ۝٨٢
Summa aghraqnal aakhareen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَغْرَقْنَا: हमने डुबो दिया (पानी में ग़र्क कर दिया)
  • الْآخَرِينَ: दूसरों को, यानी वे लोग जो नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम में से ईमान नहीं लाए थे

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम के उन लोगों का हाल बयान किया है जिन्होंने ईमान लाने से इनकार किया और अपनी सरकशी और ज़ुल्म पर अड़े रहे। जब अल्लाह का अज़ाब आया, तो उसने उन सबको पानी के तूफ़ान (तूफ़ान-ए-नूह) में डुबो दिया। यानी जो लोग ईमान लाए थे, उन्हें अल्लाह ने कश्ती में सवार करके बचा लिया, और बाक़ी सब काफ़िरों को पानी में ग़र्क कर दिया। उनमें से कोई भी बच नहीं पाया—न कोई बूढ़ा, न जवान, न अमीर, न ग़रीब। यहाँ तक कि हज़रत नूह अलैहिस्सलाम का बेटा भी, जो ईमान नहीं लाया था, उन्हीं डूबने वालों में शामिल था।

यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जब वह किसी क़ौम पर अज़ाब नाज़िल करता है, तो उसमें कोई ढील नहीं होती। नूह अलैहिस्सलाम ने सैकड़ों साल तक अपनी क़ौम को ईमान की दावत दी, लेकिन उन्होंने सुधार नहीं किया। आख़िरकार अल्लाह का फ़ैसला आया और उन सबको हलाक कर दिया गया।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी और उसके रसूलों की मुख़ालफ़त का अंजाम हमेशा बर्बादी है। अल्लाह की रहमत उनके लिए है जो ईमान लाएँ और नेक अमल करें, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो हक़ को ठुकरा दें। यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और ज़ालिमों को कभी बख़्शिश नहीं देता। इसलिए हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह की इताअत करें, उसके रसूल की पैरवी करें और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्मों के मुताबिक़ ढालें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह ने बचा लिया और उनकी मदद की।



📜 आयत 80-84 — सूरा अस-साफ्फात

80إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
81إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे
82ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ
फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया
83۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِ لَإِبْرَاهِيمَ
और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे
84إِذْ جَاءَ رَبَّهُ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ
जब वह अपने परवरदिगार (कि इबादत) की तरफ (पहलू में) ऐसा दिल लिए हुए बढ़े जो (हर ऐब से पाक था
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
82आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 82

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Friday, October 2, 2026

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