अस-साफ्फात · 81/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ ۝٨١
Innahoo min `ibaadinal mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِنَّهُ — निस्संदेह वह (नूह अलैहिस्सलाम)
  • مِنْ عِبَادِنَا — हमारे (अल्लाह के) बंदों में से
  • الْمُؤْمِنِينَ — सच्चे ईमानवाले, अल्लाह पर पूर्ण विश्वास रखने वाले और उसकी आज्ञाओं का पालन करने वाले

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी नूह अलैहिस्सलाम की प्रशंसा करते हुए फ़रमा रहे हैं कि नूह हमारे उन ख़ास बंदों में से थे जो सच्चे ईमानवाले थे। यह ईमान केवल ज़ुबानी दावा नहीं था, बल्कि उनका पूरा जीवन इसी ईमान की गवाही देता था। वे अल्लाह के आदेशों पर पूर्ण रूप से अमल करने वाले, उसकी इबादत में मशगूल रहने वाले और उसकी राह में हर क़ुर्बानी देने वाले थे।

नूह अलैहिस्सलाम ने नौ सौ पचास साल तक अपनी क़ौम को अल्लाह की ओर बुलाया, लेकिन उनकी क़ौम ने उन्हें झुठलाया। इसके बावजूद उन्होंने अल्लाह पर भरोसा नहीं छोड़ा और अल्लाह ने उन्हें तूफ़ान से बचाकर उनकी नेकी का बदला दिया। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के यहाँ असली मान्यता ईमान और अच्छे आचरण की है। जो लोग अल्लाह पर सच्चा ईमान रखते हैं और उसके आदेशों पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें प्यार करता है, उनकी मदद करता है और उन्हें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी देता है।

यह आयत हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम भी अपने जीवन को नूह अलैहिस्सलाम की तरह ईमान और अच्छे कर्मों से सजाएँ। अल्लाह उन बंदों से प्रेम करता है जो उस पर भरोसा करते हैं और उसकी इबादत में अपना जीवन बिताते हैं। आज हमें भी इसी ईमान की ज़रूरत है — एक ऐसा ईमान जो हमें अल्लाह से जोड़े, हमारे दिलों को साफ़ करे और हमें अच्छे कामों की ओर ले जाए। जब हम सच्चे दिल से अल्लाह की ओर मुड़ेंगे, तो अल्लाह भी हमें अपनी रहमत और मदद से नवाज़ेगा, जैसे उसने अपने नेक नबी नूह को नवाज़ा।



📜 आयत 79-83 — सूरा अस-साफ्फात

79سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ
कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है
80إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
81إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे
82ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ
फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया
83۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِ لَإِبْرَاهِيمَ
और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
81आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 81

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Saturday, October 3, 2026

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