अस-साफ्फात · 83/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِ لَإِبْرَاهِيمَ ۝٨٣
Wa ina min shee`atihee la Ibraaheem
📖 हिंदी अर्थ
और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شِيعَتِهِ – उसके अनुयायी, उसके पथ के अनुसरणकर्ता, उसकी मिल्लत और पैरवी करने वाले।
  • لَإِبْرَاهِيمَ – निश्चय ही इब्राहीम (अलैहिस्सलाम)।

तफसीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि नूह (अलैहिस्सलाम) के अनुयायियों और उनके मार्ग पर चलने वालों में से ही इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) भी थे। यानी जिस तरह नूह (अलैहिस्सलाम) ने तौहीद (एकेश्वरवाद) की दावत दी और अपनी क़ौम को अल्लाह की इबादत की ओर बुलाया, उसी तरह इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) भी उसी मूल दीन और उसी सिद्धांत पर थे। भले ही उनके बीच लंबा समय गुज़रा हो और शरीयत के कुछ अहकाम अलग हों, लेकिन दीन का मूल — अल्लाह की वहदानिय्यत और उसकी इबादत — एक ही था।

यह बात बड़ी अहमियत रखती है कि अल्लाह तआला ने इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को नूह (अलैहिस्सलाम) के अनुयायियों में शुमार किया। इससे हमें यह सबक मिलता है कि असली निस्बत ख़ून और रिश्तों की नहीं, बल्कि ईमान और अमल की है। जो भी अल्लाह के दीन पर चले, वही सच्चा अनुयायी है, चाहे वह किसी भी ज़माने में क्यों न हो।

इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) वह महान पैग़म्बर हैं जो अपने रब के पास साफ़ और पाक दिल लेकर आए — हर बातिल अक़ीदे और हर बुरे अख़लाक़ से पाक। उन्होंने अपने बाप और अपनी क़ौम से कहा: "तुम किस चीज़ की इबादत करते हो? क्या तुम अल्लाह को छोड़कर ऐसे माबूदों की पूजा करते हो जिन्हें तुमने ख़ुद बना रखा है? क्या तुम्हें उस रब्बुल-आलमीन के बारे में कुछ ख़याल नहीं?" यानी उन्होंने शिर्क को जड़ से ख़ारिज किया और तौहीद को अपनी ज़िंदगी का निशान बनाया।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के दीन की रस्सी सभी पैग़म्बरों के ज़रिए एक ही रही है — और वह है अल्लाह की इबादत और उसके साथ किसी को शरीक न करना। आज हमें भी उसी राह पर चलना है जिस पर नूह और इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) चले। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत, मग़फिरत और जन्नत तक पहुँचाता है। हमें चाहिए कि अपने दिल को शिर्क और बुरे अख़लाक़ से पाक करें, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए समर्पित कर दें — ताकि हम भी उन पाक हस्तियों के अनुयायियों में शामिल हो सकें।

🎧 सुनें

📜 आयत 81-85 — अस-साफ्फात

81إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे
82ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ
फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया
83۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِ لَإِبْرَاهِيمَ
और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे
84إِذْ جَاءَ رَبَّهُ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ
जब वह अपने परवरदिगार (कि इबादत) की तरफ (पहलू में) ऐसा दिल लिए हुए बढ़े जो (हर ऐब से पाक था
85إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَاذَا تَعْبُدُونَ
जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग किस चीज़ की परसतिश करते हो
अस-साफ्फातकुरान सूची
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अनुवाद — अस-साफ्फात 83

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Tuesday, August 18, 2026

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